आपकी असफ मेहनत तो पैशन मिल जाने के बाद शुरू होती है - हरिका द्रोणावल्ली

मात्र 28 की उम्र में इस शतरंज ग्रैंडमास्टर को हाल ही पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

First Person। मेरी परवरिश आंध्रप्रदेश के गुंटुर शहर में हुई। मैंने बचपन से ही शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। इस मामले में हंगरी के महान शतरंज खिलाड़ी जुदित पोलगर से मैं हमेशा से प्रेरित रही हूं। दरअसल मेरे पिता एक प्लेयर थे, इसीलिए बड़े होने के दौरान मुझे और मेरी बहन को खेलों के प्रति बहुत-सा प्रोत्साहन मिला। जब मैं सात साल की थी, तभी से पापा ने मुझे शतरंज खेलने भेजना शुरू कर दिया था। इस खेल को सीखना शुरू करने के कुछ ही सालों बाद मैंने पहली बार अंडर-9 नेशनल चैंपियनशिप में भाग लिया और मेडल जीता।

इस तरह मौज-मस्ती में जो खेल शुरू हुआ था, वह कब मेरा पैशन बन गया, पता ही नहीं चला। अक्सर लोग सोचते हैं कि एक बार उन्हें अपना पैशन मिल जाए, तो आगे का रास्ता बहुत आसान हो जाता है, लेकिन सच यह है कि असल मेहनत तो पैशन मिलने के बाद शुरू हाेती है। आप अपने सपने कैसे पूरे करेंगे, इसकी जिम्मेदारी आप पर आ जाती है। शतरंज की ट्रेनिंग कुछ घंटों के बाद आपको चिड़चिड़ा बना सकती है। इसलिए इस खेल के साथ मुझे अपनी प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स पर भी काम करना पड़ा। 

मेहनत के दिन आपके जीवन का बेहतरीन समय है 
शतरंज ने मुझे नाम के साथ ही पहचान भी दिलाई। मेरा सपना है कि मैं दुनिया की नम्बर एक चैंपियन बनूं। यह ऐसा गेम नहीं है जो किसी को भी आसानी से समझ आ जाए। दरअसल इस गेम को लेकर बहुत-सी भ्रांतियां होती है। वर्ष 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में बहुत उतार-चढ़ाव थे। मैं हर दिन एक नई चुनौती का सामना कर रही थी, लेकिन उस समय जो सीखा वह मेरे आगे के खेलों में बहुत काम आया। हमेशा मान के चलना चाहिए जिस समय आप बहुत-सा काम और दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वही जीवन का सबसे अच्छा समय और जीवनभर काम आने वाले सबक देकर जाएगा। 

खेल के समान ही धैर्य की आवश्यकता होती है जीवन में 
शतरंज में मैंने अब तक बहुत से खेल जीते और बहुत-से हारे, लेकिन मैं यकीन के साथ कह सकती हूं कि जिन गेम्स में मुझे हार का सामना करना पड़ा, उनसे मैंने सबसे अधिक सीखा। ऐसा भी हुआ कि कई बार लगातार हार जाने के बाद भी मैं दुखी नहीं हुई, क्योंकि मैं अपने परफॉर्मेंस से खुश थी और जो मैंने सीखा उसे मैंने आगे के गेम्स में काम में लिया। वैसे भी आप सिर्फ एक काम करके या एक गेम खेलकर ही चैंपियन नहीं बन सकते। लाइफ की तरह गेम में भी आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते चले जाते हैं। ध्यान रखें कि इस यात्रा में धैर्य आपके बहुत काम आता है।

सजग रहें जीवन और कॅरिअर के प्रति 
मैं हमेशा सबसे यही कहना चाहती हूं कि मैं अपने कॅरिअर और जीवन के प्रति समान रूप से सजग रहती हूं। मैं मानती हूं कि हमें हमारे हर काम को गंभीरतापूर्वक लेना चाहिए। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहती हूं कि भले ही आप किसी भी तरह की रैंकिंग में कितने भी ऊंचे पायदान पर आ जाएं, लेकिन यदि आप खुश नहीं हैं, तो इन सबका कोई मतलब नहीं है। खुश रहना और कॅरिअर में अच्छा करना दोनों जुड़ी हुई बातें हैं। 
 

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