काम को गंभीरता से लेकर ही आप कामयाबी की सीढ़ी चढ़ सकते है - रणवीर सिंह

वर्सेटाइल एक्टिंग के लिए चर्चा में रहने वाले रणवीर सिंह ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए संघर्ष भी किया

FirstPerson। आज से लगभग दस साल पहले तक फिल्म इंडस्ट्री में दाखिल होना आसान नहीं था। खासतौर पर जब आप यहां किसी को जानते न हों और किसी फिल्मी परिवार से भी न आते हों। इसी वजह से मुझे कई साल कठिन संघर्ष करना पड़ा और हाथ-पैर मारने पड़े। अपनी इस यात्रा में मैंने सेल्फ-डाउट से लड़ाई भी की और फेलिअर का सामना भी किया। इसी के चलते पिछले दस साल मेरे जीवन में रोलर कोस्टर राइड की तरह रहे हैं। संघर्ष के उन दिनों से मैंने जीवन का सबसे अहम सबक यह सीखा कि हमें अपने काम को गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं अगर आप काम से ज्यादा खुद को गंभीरता से लेंगे तो काम पीछे रह जाएगा। हालांकि अब इंडस्ट्री में टैलेंट को खूब पहचान मिल रही है। आज आपका टैलेंट बहुत से माध्यमों से दुनिया के सामने लाया जा सकता है लेकिन शर्त अब भी वही है कि अपने काम को लेकर कोई लापरवाही या समझौता न करें।  

अपने पैशन को पहचाना और रिस्क लिया
मैं बचपन से ही मेनस्ट्रीम एक्टर यानी हिन्दी फिल्म का हीरो बनना चाहता था, लेकिन जब मुझे लगा कि यह संभव नहीं है तब मैं एडवर्टाइजिंग में कॉपिराइटर के तौर पर खुद को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने लगा और कुछ सालों बाद मैं पढ़ाई के लिए अमेरिका गया। वहां मुझे एक्टिंग फिर से अपनी ओर खींचने लगी और मैंने तय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो मैं एक्टर ही बनूंगा। डिग्री पूरी करके मैं मुंबई आ गया। यहां तीन चार साल तक स्ट्रगल किया। मुझे लगता है कि संघर्ष हमें तराशता है। 

दो अलग-अलग दुनिया का अनुभव काम आया
मुम्बई में मैं जहां रहता था वह जगह बांद्रा ईस्ट और बांद्रा वेस्ट की बॉर्डर पर थी। एक तरफ जहां प्राइवेट स्कूल और बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स थे जिनमें अपर मिडिल क्लास लोग रहते थे और दूसरी तरफ स्लम्स थे जहां गरीब परिवार बसते थे। मैं दिन में प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाता और बाद में स्लम्स में रहने वाले अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता। आज मैं समझता हूं कि उसी अनुभव ने मुझे जीवन में सहज रहना और जमीन से जुड़े रहना सिखाया। इस तरह मैं दो दुनिया को करीब से देख पाया।

अपनी सीमाओं को पुश करते रहना जरूरी है
25 सालों तक उन दोनों दुनिया काे देखने समझने का जो मौका मुझे मिला वह एक्टिंग में भी मेरे बहुत काम आता है। चाहे वह अलग किरदार हों, उनके बोलने का तरीका हो, उनके सुख-दुख के हाव-भाव सब मेरे बहुत काम आता है। मैं हर स्थिति में खुद को ढाल लेता हूं और यही सबसे जरूरी चीज है जो आप संघर्ष से सीखते हैं। एक और खास चीज अपनी यात्रा में मैंने सीखी कि हम खुद को जितना अपनी सीमाओं से बाहर धकेलेंगे जीवन का, अनुभव का और सफलता का दायरा उतना ही बढ़ता जाएगा।
 

Next News

शॉर्ट मैसेज में मेरी रुचि ने पहुंचाया ट्विटर तक : जैक डोर्सी

बचपन में हकलाने की समस्या से जूझने वाले ट्विटर सीईओ से जानें सफलता की कहानी

लोगों की उम्मीदें मुझे जीतने के लिए प्रोत्साहित करती हैं : सौरभ चौधरी

आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड बनाने वाले देश के सबसे युवा शूटर हैं सौरभ

Array ( )