फाइटर पायलट बनने की चाह बचपन सेथी : भावना

देश की पहली महिला ऑपरेशनल फाइटर पायलट हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट कांत

First Person। मैं बचपन से ही फाइटर पायलट बनने का सपना देखा करती थी। मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझे यही सिखाया कि अपना कोई भी सपना सिर्फ इसलिए मत छोड़ देना कि तुम लड़की हो। उन्होंने कहा कि सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सोच बदलना या लड़कों की तरह साेचना बिलकुल जरूरी नहीं है। शायद उनकी इसी प्रेणा की वजह से आज मैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन पाई हूं। एक छोटे शहर से निकलकर यह दर्जा हासिल करना मेरे लिए किसी बहुत बड़े सपने के सच होने जैसा है। यह मेरे पिता के प्रोत्साहन और मेहनत का नतीजा है कि आज मैं यह मुकाम हासिल कर पाई हूं।

बीई के बाद किया आईटी कंपनी में काम
- मेरा बचपन बिहार के दरभंगा में गुजरा और मेरी शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुई। पढ़ाई के साथ-साथ मेरी रुचि खेलों में बहुत थी और खो-खो व बैडमिंटन जैसे खेल मैं खूब खेला करती थी। बरौनी में स्कूलिंग करने के बाद मैं कोटा में इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने के लिए चली गई। इस दौरान मुझे लगा कि यह अपना सपना पूरा करने का सही समय है। इस तरह मेरे मन में नेशनल डिफेंस एकेडमी जॉइन करने का विचार तो आया, लेकिन उस समय एनडीए में महिलाओं को सलेक्ट नहीं किया जाता था जो मेरे सामने एक बड़ी समस्या थी। इसी के चलते मैंने अपने सपने को दबाकर मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई की डिग्री हासिल की। वहां से कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए मुझे टीसीएस में जॉब मिल गई, लेकिन मैंने जॉब के साथ-साथ कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी जारी रखी।

पेरेंट्स की तरफ से कभी कोई दबाव नहीं था
- इसी दौरान आईएएफ में महिला पायलट की भर्ती को अनुमति मिल गई थी और यह खबर मिलते ही मुझे बहुत खुशी हुई। तब मैंने शॉर्टसर्विसेज कमीशन एग्जाम दिया। इस परीक्षा में पास होने के बाद मैंने अपनी जॉब छोड़कर एयरफोर्स जॉइन करने का फैसला कर लिया। एक के बाद एक कई मजबूत निर्णय लेना मेरे लिए इसलिए आसान रहा कि मेरे माता-पिता ने मुझे हर कदम पर प्रोत्साहित किया। मैं समझती हूं कि पेरेंट्स को कभी भी अपने बच्चों पर किसी विषय या स्ट्रीम को चुनने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। मेरी सफलता का यह एक बड़ा कारण है।

अपने नजदीकी लोगों को दें पूरा सम्मान
- फाइटर पायलट के लिए मेरा सलेक्शन हो जाने के बाद मेरी मां थोड़ा घबरा जरूर रही थीं, लेकिन बाद में जब मैंने उन्हें समझाया कि फाइटर प्लेन भी साधारण प्लेन की तरह ही उड़ाया जाता है, तब वे मान गईं। दरअसल किसी एक व्यक्ति की सफलता में बहुत-से लोगों का योगदान होता है। मैं यह मानती हूं कि सफलता हमारी मेहनत के साथ-साथ इस बात पर भी निर्भर करती है कि हमारे आसपास के लोग किस तरह से सोचते हैं। हमें समय-समय पर उनका आभार व्यक्त करना नहीं भूलना चाहिए। यह सफलता की पहली शर्त होती है।
 

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