UPSC / श्रेयांश ने कहा, एक टॉपिक पर दो पेज लिखने की प्रेक्टिस करें

जनरल स्टडी की तैयारी के लिए अपने बनाए हुए शार्ट नोट्स को रिवाइज करें

एजुकेशन डेस्क. यूपीएससी को क्लियर करने में जनरल स्टडी का अहम रोल होता है। यूपीएससी 2018 के ऑल इंडिया 4th टॉपर श्रेयांश कुमट का कहना है, जनरल स्टडी की तैयारी के लिए अपने बनाए हुए शार्ट नोट्स को रिवाइज करें। मेन्स परीक्षा में डेढ़ महीना बाकी है इसलिए किसी भी एक टॉपिक पर 2 पेज लिखने की कोशिश करें, इससे टाइम मैनेजमेंट और प्रभावी शब्दों का चुनाव बेहतर होगा। केस स्टडी के लिए ऐसे शब्दों का चुनाव करें जो एग्जामिनर को प्रभावित करें। श्रेयांश कुमट ने दैनिक भास्कर ऐप से साझा की अपनी तैयारी और बताया कैसे अंतिम दौर में परीक्षा की तैयारी करें, पढ़िए इंटरव्यू....

सवाल : आपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लियर करने के लिए कैसे और कितने घंटे रोज तैयारी की?
जवाब : मैं टॉपिक के हिसाब से पढ़ाई करता था। रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करता था।

सवाल : करंट अफेयर्स से अपडेट कैसे रहें? इसके लिए क्या साधन होने जरूरी हैं?
जवाब : मैं रोजाना न्यूज पेपर पढ़ता था। एडिटोरियल पेज की खबरों से शार्ट नोट्स तैयार करता था। कई ऑनलाइन वेबसाइट, वीडियो चैनल, मंथली मैग्जीन की भी मदद लेता था।

सवाल : ऑप्शनल सबजेक्ट के लिए एंथ्रोपोलॉजी ही क्यों चुना?
जवाब : मेरा सबसे पसंदीदा सब्जेक्ट मैथ्स था, लेकिन मैंने जब जॉब छोड़ी तो यूपीएससी एग्जाम के लिए 1 साल ही बचा था। इतने कम समय में मैथ्स के साथ जनरल स्टडीज कवर करना काफी मुश्किल था। मैंने सोचा कि ह्यूमैनिटी का सब्जेक्ट लेकर तैयारी कर समय में पूरी कर पाउंगा। उस समय मैंने डॉ. युवल हरारी की सीपीएम बुक पढ़ी, वो मुझे पढ़ने में इंट्रेस्टिंग लगी थी। मैंने ये भी देखा कि 4-5 सालों में स्टूडेंट्स काफी अच्छे मार्क्स स्कोर कर रहे हैं।

सवाल : खुद को मोटिवेट रखने के लिए क्या करते थे? डर और शंका हो तो क्या करना चाहिए?
जवाब : मेडिटेशन के साथ यूट्यूब पर मोटिवेशनल वीडियो देखता था। मैं फैमली और खास दोस्तों से बातचीत करता था ताकि तनाव दूर हो। डर और शंका सभी के मन में होती है। लेकिन यह सोचें कि तैयारी क्यों शुरू की थी। ऐस लोगो संग रहें जो मोटिवेट करें। उन लोगों का धन्यवाद करें जिनकी वजह से आप यहां तक पहुंचे हैं।

सवाल : जनरल स्टडीज -1 की तैयारी कैसे की?
जवाब : इसके ज्यादादर टॉपिक ज्यादातर प्रीलिम्स में कवर हो जाते हैं। जैसे पर्सनैलिटी और घटनात्मक इवेंट के लिए 250 से 400 शब्द के शार्ट नोट्स बनाकर कंपाइल कर लेता था, ताकि रिविजन आसानी से हो सके। सोसाइटी वाले पार्ट की तैयारी के लिए मैं एंथ्रोपोलॉजी के टॉपिक कवर करता था। क्योंकि इसमें काफी सोशियोलॉजी का पार्ट आता है। बेसिक एनसीईआरटी 11वीं-12वीं से भी तैयारी में मदद लेता था।

सवाल : जनरल स्टडीज -2 की तैयारी कैसे की?
जवाब : पॉलिटी और गवर्नेंस के लिए मैंने लक्ष्मीकांत बुक और अपने नोट्स से पढ़ाई की। गवर्नेंस के मॉड्यूल मार्केट में मिल जाते हैं। मैंने विजन आईएएस के यूज किए थे, क्योंकि इसमें काफी स्टेटिक और करेंट अफेयर्स बेहतर तालमेल होता है। गवर्नेंस के टॉपिक के बारे में ए4 शीट पर लिख लेता था और उसी को बार-बार रिवाइज करता था। इंटरनेशनल रिलेशन के लिए विकिपीडिया पेज से पढ़ता था, किस देश से कैसे रिलेशन हैं। बाकी करंट अफेयर्स से कवर हो जाता था।

सवाल : जनरल स्टडीज- 3 की तैयारी कैसे की?
जवाब : इसमें इकोनॉमिक और एग्रीकल्चर का पार्ट है उसके लिए मैंने इकोनॉमिक सर्वे, करंट अफेयर्स और बेसिक प्रीलिम्स के सोर्स से कवर किया था। यह पेपर काफी एक्सपेंसिव है। क्योंकि इसमें डिजास्टर मैनेजमेंट, एन्वायरमेंट, सिक्योरिटी भी आता है। डिजास्टर मैनेजमेंट में 7-8 डिजास्टर हैं जिनके बारे में एक पेपर पर आइडिया लग जाएगा, कि रिस्क क्या होते हैं उनके लिए हम क्या अच्छा कर सकते हैं कुछ उदाहरणों एक पेपर पर लिखा और बार-बार रिवाइज किया। मेन्स के लिए जितने शार्ट नोट्स बना सकते हैं बनाएं, ये मदद करते हैं।

  • एन्वायरमेंट में जैसे क्लाइमेट चेंज से काफी सवाल पूछे जाते हैं। वैसे ही एग्रीकल्चर में बैकवर्ड एंड फॉरवर्ड लिंकेजेज़ के बारे में अच्छे से पढ़ लिया तो किसी भी तरह के सवाल का जवाब लिख सकते हैं। 
  • हमेशा ध्यान रखें कि जनरल स्टडी में बेसिक अवेयरनेस होनी चाहिए तभी स्टूडेंट्स कुछ लिख सकेगा। जनरल स्टडी ऐसा नहीं है कि आपने उस टॉपिक के बारे में पढ़ा है तभी आप सवाल का जवाब लिख सकते हैं। नॉलेज और अनुभव से आंसर लिख सकते हैं, इसकी कोशिश प्रैक्टिस करते समय करनी चाहिए।
  • मैं 2 पेज लिखता था चाहे मुझे क्वेश्चन का आंसर आता हो या नहीं। उस टॉपिक पर लिखने की प्रैक्टिस करता था जो मुझे उस टॉपिक से जुड़ा लगता था टाइम मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर।

सवाल : जनरल स्टडीज - 4 की तैयारी कैसे की?
जवाब : एथिक्स के लिए मैंने कोई स्टेंडर्ड बुक्स नहीं पढ़ी थी। जो सिलेबस है उसमें काफी सारे की-टर्म आते हैं, तो उनको मैंने गूगल किया था। जिससे मुझे उन शब्दों का मतलब समझ आ सके। हिंदी मातृ भाषा होने के कारण मुश्किल शब्दों के मायने आसानी से समझ आ जाते हैं। इसके लिए मैंने शब्दों की एक शीट बना ली थी। जब भी सवाल आते थे मैं उन शब्दों को यूज करने की कोशिश करता था। इसके अलावा मैंने बाजीराव नोट्स की मदद से मैंने अपनी वोकेबलरी स्ट्रॉन्ग की। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत जनरल स्टडी-4 पेपर में पड़ती है। क्योंकि कुछ शब्द ऐसे हैं जब हम केस स्टडी का आंसर लिख रहे हैं तो हम उन शब्दों को यूज करेंगे तो एग्जामिनर को लगेगा कि व्यक्ति तैयारी करके आया है। ऐसा नहीं है कि वह वही लिख रहा है जो उसे जनरली पता है।

केस स्टडी लिखते वक्त अपने आप को उस परिस्थितियों में ढालने की कोशिश करें। आप अगर वहां रहेंगे तो किस तरह से रिएक्ट करेंगे, किस तरह से शार्ट टर्म और लांग टर्म सॉल्यूशन पर ध्यान देंगे। किस तरह से आप हेल्प कर सकते हैं। केस स्टडी में बेसिकली प्रैक्टिकल कम आइडियल ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम आइडियल तरीके से प्राब्लम को सॉल्व कर रहे हैं। आपको लगता है कि हां मैं कभी फील्ड में हूं और मेरे सामने कोई सिचुएशन आती है तो मैं ये स्टेप लूंगा तो सबका बेनिफिट हो सकता है। ऐसी सोच रखनी चाहिए।

सवाल : अपने ऑप्शनल की तैयारी कैसे की ?
जवाब : इसके लिए मैंने दिल्ली कोचिंग ज्वाइन की थी। कोचिंग में 60% सिलेबस कवर हो गया था। बाकि के लिए कोचिंग से मटेरियल दिया गया था। लेकिन इस सबजेक्ट में काफी कुछ रह जाता है। इसके लिए इग्नू का मटेरियल, ऑनलाइन ई-पीजी पाठशाला गवर्नमेंट की, कई दूसरी मैग्जीन जिसके अंदर कभी-कभी केस स्टडी आती है। 

सवाल : निबंध के पेपर की तैयारी कैसे की ?
जवाब : इसके लिए खासतौर पर अलग तैयारी नहीं करनी होती है। जनरल स्टडी में ही काफी कुछ कवर हो जाता है। मैं जब भी न्यूज पेपर या कोई वेबसाइट देखता था तो मुझे कोई केस स्टडी मिलती थी मैं नोट कर लेता था। उनको हम जनरल स्टडी के क्वेश्चन में भी यूज कर सकते हैं। मैं जो भी टॉपिक चुनता था उसपर 15 मिनट ब्रेन स्टॉर्मिंग पर देता था, इसके बाद मैं अपने हिसाब से लिखता था।

हर महीने मैं 1 निबंध लिखता था। मैं निबंध को सिंपल रखता था। स्टूडेंट‌्स को बताना चाहूंगा कि प्रैक्टिस से ही इंप्रूवमेंट आता है, आप पहली बार खराब लिखेंगे लेकिन 50वीं बार में नहीं। इसके अलावा हमेशा निबंध एक फ्लो में लिखना चाहिए।

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