नीट में 2 लाख स्टूडेंट्स बढ़े, जेईई में हुए कम; जॉब सिक्योरिटी सबसे बड़ा कारण

नीट में जॉब सिक्योरिटी और अच्छे अवसर होने के कारण साइंस स्टूडेंट्स मेडिकल को ऑप्ट कर रहे हैं, जबकि जेईई में इनकी संख्या वर्ष 2016 से तेजी से घट रही है

एजुकेशन डेस्क। जेईई 2018 के लिए पिछले साल के मुकाबले 23000 ज्यादा यानी 10.43 लाख स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इनमें से जेईई मेन से 2,31,024 स्टूडेंट्स ने जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया था। इनमें से करीब 70 हजार स्टूडेंट्स ने जेईई एडवांस से क्विट कर लिया था। आईआईटी कानपुर की ओर से घोषित जेईई एडवांस रिजल्ट में पिछले साल के मुकाबले 18,475 कम स्टूडेंट्स सलेक्ट हुए। यानी करीब डेढ़ लाख में से सिर्फ 31,980 स्टूडेंट्स ने क्वालिफाई किया है। पिछले तीन सालों के रेशो पर गौर करें तो जेईई क्वालिफाई करने वाले स्टूडेंट्स में बहुत ज्यादा गिरावट आई है। 

2013 में इंजीनियरींग में आया था बूम: एक्सपर्ट्स 
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2013 में इंजीनियरिंग फील्ड में जो बूम आया था वो 2018 में बहुत कम हो गया है। क्योंकि हर साल सभी एनआईटीज, आईआईटीज और प्राइवेट कॉलेजेज से हर साल करीब 3.50लाख स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकल रहे हैं। 
- इसके विपरीत इंजीनियरिंग जॉब्स केवल डेढ़ लाख निकल रही हैं। जॉब के अवसर नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स मेडिकल फील्ड में शिफ्ट हो रहे हैं। क्योंकि इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करने में बराबर समय लग रहा है। 
- इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को औसतन सालाना 3.5 लाख का पैकेज मिलता है। सबसे बड़ा कारण ये भी है कि इंजीनियरिंग फील्ड में जॉब सिक्योरिटी नहीं है, जिसने जैसा परफॉर्म किया वैसी ग्रोथ है। मेडिकल में जॉब के अवसर हैं क्योंकि अब देश में सरकारी डॉक्टर्स की कमी है। 


फीस भी कारण 
- 2014 के बाद सरकार ने आईआईटीज में सब्सिडी कम कर दी है। यही कारण है कि आईआईटी करने वाले स्टूडेंट्स की एक साल की कॉस्ट तीन से पांच लाख होती है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेज से नीट करने वाले स्टूडेंट्स की फीस इसकी तुलना में कम होती है। 
- एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर की बात करें, तो एक साल की फीस 60 हजार रुपए है। हालांकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस लाखों में होती है। मेडिकल एजुकेशन के एडिशनल डायरेक्टर एस.सी. सोनी ने कहा कि डॉक्टर्स की कमी के चलते मेडिकल की तरफ रुझान बढ़ा है। - डब्लूएचओ के अनुसार 1000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए, जबकि इंडिया में 1593 लोगों पर एक एलोपैथी डॉक्टर है। 

जेईई में सलेक्शन क्राइटेरिया टफ 
- नीट में सलेक्शन पर्सेंटाइल भी कम है। 50वीं पर्सेंटाइल पर एडमिशन मिल जाता है। इस बार 16 परसेंट वाले को क्वालिफाई माना गया है। नीट में सब्जेक्ट वाइज पास होना जरूरी नहीं है। इसमें ओवरऑल 33 परसेंट नंबर लाने होते हैं। जेईई का सलेक्शन पैटर्न टफ है। 
- एक्सपर्ट आशीष अरोड़ा कहते हैं कि जेईई में हर सब्जेक्ट में पास होने के लिए कम से कम 10 परसेंट मार्क्स लाने जरूरी हैं। इस बार ऐसे कई स्टूडेंट्स हैं जिनके ओवरऑल 126 मार्क्स बन रहे हैं, लेकिन सब्जेक्ट में फेल होने के कारण उन्होंने जेईई क्वालिफाई नहीं किया। 


जेईई में 1 सीट के लिए 1.60 स्टूडेंट्स और नीट में 11.60 स्टूडेंट्स 
- जेईई में 1 सीट के मुकाबले 1.60 स्टूडेंट्स को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। पिछले साल 10,988 सीट थीं जिनके लिए 50,455 स्टूडेंट्स ने क्वालीफाई किया था। यानी 1 सीट पर 4.60 स्टूडेंट थे, जबकि नीट में 7 लाख स्टूडेंट्स ने क्वालिफाई किया है। 
- एमबीबीएस की 476 मेडिकल कॉलेजेज की कुल 61,390 सीट्स हैं। यानी इस बार एक सीट पर 11.60 स्टूडेंट्स फाइट कर रहे हैं। 



नीट में रजिस्ट्रेशन का रेशो 

2016

8.02 लाख 

2017

11.39 लाख 

2018

13 .26 लाख 

 

जेईई में रजिस्ट्रेशन 

2016

12.07 लाख 

2017

10.20 लाख 

2018

10.43 लाख 

जेईई मेन से क्वालिफाई हुए सवा दो लाख स्टूडेंट्स में 70 हजार ने एडवांस नहीं दिया। 
 

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