खुद के डिल्यूजन्ड वर्जन को सच बनाने की कोशिश करें - रवि दुबे

एक्टर रवि दुबे इस बात में यकीन रखते हैं कि आप जैसा सोचते हैं आपकी पर्सनैलिटी भी वैसी ही बन जाती है।

First Person। एक एक्टर होने के नाते मेरे जीवन में दो बातें बहुत मायने रखती हैं। एक है ग्रेटिट्यूड यानी कृतज्ञता और दूसरा है भ्रम यानी डिल्यूजन। मैं आज जो कुछ भी हूं अपनी इन दो आदतों की वजह से ही हूं। दरअसल जब आप एक्टिंग के फील्ड में काम करते हैं तो आप कई तरह के लोगों के संपर्क में आते हैं। इनमें से बहुत से लोग एक मुकाम अचीव कर चुके होते हैं जबकि कई अचीव करने की कोशिश में होते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो हार मान चुके होते हैं। इन सभी लोगों की एक खास बात यह है कि हम इनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। साथ ही उनकी कंडीशनिंग इतनी अलग होती है कि वे जो कुछ शेयर करते हैं वह आपकी पर्सनैलिटी काे एक आकार देने में मदद करता है।

अपना मूल्य समझना सबसे जरूरी आभारी होने के साथ-साथ मैं डिल्यूजन में भी विश्वास करता हूं। दरअसल जब आप यकीन करते हैं तभी कुछ कर सकते हैं। एक एग्जाम में फेल हो गया तो बहुत ही निराश और दुखी हुआ। उस दौरान मैंने सुसाइड करने तक का मन बना लिया था लेकिन बस एक पल के लिए मेरेदिमाग में यह ख्याल आया कि मुझे खुद को दिलासा देने के लिए कोई बड़ी कल्पना करनी चाहिए जैसेकि मैं बहुत सक्सेसफुल होने वाला हूं या मुझे बहुत से अवार्ड्समिलने वाले हैं।

यह रियलिस्टिक नहीं था लेकिन इस डिल्यूजन ने मेरेदिमाग से आत्महत्या जैसा विचार दूर करने में बहुत मदद की। इस भम्र नेमुझे बहुत सा सेल्फ-वर्थ दिया और यह सोचने का मौका भी कि मैं भी कुछ कर सकता हूं। इससे मैं न सिर्फ अपने आप को बल्कि दूसरों को भी रेस्पेक्ट देसका। मैं अपनी कहानी का नायक बन गया और मेरा नजरिया  ही बदल गया। इसके बाद मैंनेजो कुछ किया उससेमेरी सेल्फ-वर्थ बढ़ गई। जब एक बार आप अपनी वर्थ को समझ लेते हैं और अपनेसाथ खड़े होते हैं तो काम का चुनाव भी आप आजादी और दृढ़ता से करते हैं। याद रखें कि हम अपने पास्ट और प्रेजेंट के लिए कुछ नहीं कर सकते, लेकिन हमारा फ्यूचर हमेशा असीमित संभावनाओं से भरा होता है। युवाओं से भी मैं यही कहना चाहूंगा कि सबसे पहले अपना डिल्यूजन्ड वर्जन तैयार करें और उस वर्जन को सच बनाने के लिए काम करें।

सभी से कुछ न कुछ प्रेणा लेता हूं
मैं सबसे पहले उनकी बात करता हूं जिन्होंने बहुत कुछ अचीव कर लिया है क्योंकि हम हमेशा उनकी कहानियों से प्रेेरणा लेते हैं चाहे वह राज कपूर हों या गुरुदत्त, देव आनंद, शाहरुख खान या रणबीर कपूर। मार्टिन स्कोर्सेसे, क्रिस्टोफर नोलन या डेनियल डे- लिवाइस जैसी कई अंतरराष्ट्रीय शख्सियतें भी हैं जिनसे आप आमने-सामने तो नहीं मिल पाते लेकिन वे आपके जीवन पर असर जरूर डालती हैं। इन सभी में एक कॉमन बात होती है और वह है अपने काम के प्रति इनका पागलपन यानी मैडनेस। उदाहरण के लिए एक दिन जब शाहरुख मुम्बई को देख कर कहते हैं कि
मैं यहां रूल करुंगा तो यह उनकी मैडनेस ही होती है। मैं इन पर्सनैलिटीज सेजो भी सीखता हूं उसके लिए इनका आभार जरूर मानता हूं।

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