आज की कड़ी मेहनत आपके कल को बेहतर बनाती है- श्रेया घोषाल

कला को निखारने में मदद करता है काम का दबाव

 First Person मैं एक बंगाली परिवार से हूं। मेरी मां एक सिंगर थीं और पिता का भी म्यूजिक में काफी रुझान था। शहर के कल्चरल प्रोग्राम्स में हिस्सा लेने के लिए मेरी मां जब गाने की रिहर्सल किया करती थीं, तो मैं भी उन्हें देखकर गुनगुनाती रहती थी। इसे देखकर मेरेपेरेंट्स को यह अंदाजा हो गया था कि मुझमें गाने का हुनर मौजूद है। मैं चार साल की थी जब म्यूजिक में मेरी ट्रेनिंग शुरू हो गई थी और मेरी पहली गुरु मेरी मां थीं। इसके बाद छह साल की उम्र में मैंने इंडियन क्लासिकल की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी।

म्यूजिक के लिए साइंस छोड़ आर्ट्स चुना

मैंनेसिंगिंग रिएलिटी शो सारेगामापा में हिस्सा लिया और इस शो की विनर रही। उस वक्त मैं केवल 16 साल की थी। इससेप्रेरित होकर मेरेपेरेंट्स ने मुम्बई शिफ्ट होने का फैसला कर लिया। यहां आकर मैंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी म्यूजिक जर्नी भी जारी रखी। इसी बीच मैंने हायर स्टडीज के लिए साइंस विषय चुना, लेकिन म्यूजिक की प्रैक्टिस के साथ साइंस की पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाई तो आर्ट्स लेने का फैसला किया और सिंगिंग पर काम करती रही।

मुझे लगातार मोटिवेट करती है बेहतर करने की चाह

लगातार इतने सालों तक काम करने के बाद भी मैं अपने अंदर एक रेस्टलेसनेस महसूस करती हूं। क्या मैंने जो किया है वह काफी है? क्या मैंने वाकई ऐसे गाने गाए हैं जो हमेशा याद किए जाएंगे? क्या मैं अपना बेस्ट दे चुकी हूं? ऐसे ही कई सवाल मेरे अंदर उमड़ते रहते हैं। दरअसल मैं अपने जीवन में आसानी से संतुष्ट नहीं होती हूं और इसी से मुझे आगे बढ़ने का मोटिवेशन मिलता है। मैं जानती हूं कि अगर आज मैं मेहनत करूंगी, तो कल को और बेहतर बना सकती हूं। मुझे लगता है कि मेरी लगातार अच्छा काम करने की चाहत, मेरे साथ काम करने वालों को भी समझ आती है और इसलिए वे भी अपना बेहतरीन देने की कोशिश करते हैं।

कला को निखारने में मदद करता है काम का दबाव

सारेगामापा जीतने के तुरंत बाद मुझे संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म देवदास में गाने का मौका दिया। इस तरह मुझे प्लेबैक सिंगिंग में पहला ब्रेक मिला और इस गाने के लिए मुझे नेशनल अवॉर्ड भी दिया गया। सिंगिंग का यह सफर अब तक जारी है। इस दौरान और भी कई गीतों के लिए मुझे नेशनल और फिल्मफेयर अवॉर्ड्समिले हैं। मैं 15 साल की उम्र से गा रही हूं, लेकिन आज भी जब नया गीत गाना होता है, तो बहुत दबाव महसूस होता है। हर दिन कुछ नया करने की कोशिश करती हूं और सोचती हूं कि आज अपनी सिंगिंग में क्या सुधार कर सकती हूं। मुझे लगता है कि यही प्रेशर एक आर्टिस्ट के तौर पर मुझे बेहतर बनने में मदद करता है।

Next News

फाइटर पायलट बनने की चाह बचपन सेथी : भावना

देश की पहली महिला ऑपरेशनल फाइटर पायलट हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट कांत

शिखर पर पहुंचने के लिए चुनौतियां पार करनी ही होंगी- अपर्णा कुमार

हाल ही अपर्णा, सेवन समिट चैलेंज को पूरा करने वाली पहली आईपीएस ऑफिसर के तौर पर चर्चा में रहीं

Array ( )