शिखर पर पहुंचने के लिए चुनौतियां पार करनी ही होंगी- अपर्णा कुमार

हाल ही अपर्णा, सेवन समिट चैलेंज को पूरा करने वाली पहली आईपीएस ऑफिसर के तौर पर चर्चा में रहीं

First Person। सर एडमंड हिलेरी नेकहा है कि पहाड़ के ऊपर पहुंचकर हम दरअसल पर्वतों पर नहीं, बल्कि खुद पर जीत हासिल करते हैं। मेरेलिए भी नॉर्थ अमेरिका के माउंट डेनाली पर चढ़ना, खुद पर जीत हासिल करने जैसा ही था। मैं 2002 के बैच में उत्तर प्रदेश की पहली महिला आईपीएस बनी। उस समय तक मैंने माउंटेनियरिंग के बारे में कभी विचार नहीं किया था। हालांकि इसका शौक मुझेकुछ साल पहले हुआ जब मेरी पोस्टिंग मुरादाबाद में थी और वहां मैं नवीं पीएसी बटालियन को कमांड कर रही थी। यह बटालियन चाइना बॉर्डर पर तैनात रहती है। वहीं पहली बार मुझे लगा कि क्या मैं भी सेवन समिट चैलेंज को पूरा कर सकती हूं यानी कि सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर पहुंच सकती हूं? एक तरह से मैंने अपने आपको चैलेंज किया। वर्ष 2002 में मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी में आने से पहले मैंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी।

अपने आप में अलग होती है हर चुनौती, हार न मानें आगे बढ़ते रहें
अपने अनुभव से मैं यह तो कह ही सकती हूं कि हर चुनौती अपने आप में अलग होती है। आईपीएस ऑफिसर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनेलिए इस तरह के लक्ष्य बनाना और फिर उन्हें हासिल करने के लिए तैयारी करते रहना आसान नहीं था, लेकिन अगर आप कहीं पहुंचकर उसे मंजिल मान लेंगे, तो फिर आगे नहीं बढ़ पाएंगे। मैं भी यही सोचकर आगे बढ़ती हूं कि मेरे सामने अब और मुश्किल चुनाैतियां हैं और मुझे उनके लिए खुद को तैयार करना है।

भूकंप ने असफल किए शुरुआती दो प्रयास
बैंगलुरू में पली-बढ़ी होने के कारण मेरा ठंड से पहला सरोकार तभी हुआ था। ऐसे में बहुत रिस्क होते हुए भी मैंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी। शुरू में मेरे दो प्रयास भूकंप की वजह से असफल रहे। वर्ष 2016 में मैं पहली बार एवरेस्ट पर पहुंची। वहां शिखर पर पहुंच कर जो दृश्य देखा उसने न सिर्फ मेरी थकान मिटा दी, बल्कि मुझे अपने संकल्प को पूरा करने का हौसला भी दिया। अपनी इस यात्रा में मैंने समझा कि हमारा शरीर बहुत जल्दी थक जाता है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम अपनेदिमाग को न थकने दें और जो भी लक्ष्य हमने तय किया है, उस पर अडिग रहें।

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