बेहतर बनने के लिए रिजेक्शंस और क्रिटिसिज्म से दोस्ती कर लें - कनिका ढिल्लों

कनिका ढिल्लों, मनमर्जियां, केदारनाथ और जजमेंटल है क्या जैसी फिल्मों की स्क्रीनप्ले राइटर हैं

First Person। मैं अमृतसर में जन्मी और वहीं पली-बढ़ी। हमारे घर में हमेशा पढ़ाई-लिखाई का माहौल था। मैं और मेरी बहन पढ़ाई में ही व्यस्त रहते थे। कभी-कभी तो ऐसा होता था कि मां हमसेकिताबें लेकर बाहर खेलकर आने को कहतीं। स्कूलिंग के बाद ग्रेजुएशन के लिए मैंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज में दाखिला लिया और इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स डिग्री ली। मेरी डिग्रीज भले ही अलग-अलग फील्ड्स में रही हों, लेकिन राइटर बनने का सपना शुरू से ही था और इसीलिए पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने इसी दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया।

पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पैशन को कॅरिअर के तौर पर चुना
अपने राइटिंग के सपने को पूरा करने के लिए मैं पढ़ाई पूरी होने के बाद मुम्बई शिफ्ट हो गई और रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के साथ बतौर स्क्रिप्ट सुपरवाइजर जुड़ गई। कुछ ही समय बाद मुझे कंपनी के बैनर तले बनी फिल्म ओम शांति ओम में असिस्टैंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने का मौका मिला। इसके बाद लिखने का सिलसिला अब तक जारी है। अब सही मायनों में समझ पर रही हूं कि राइटर होने का अर्थ कहीं भी सीमित नहीं है। दरअसल काम का सही अंदाजा आपको काम के क्षेत्र में आकर ही होता है। तभी आप समझ पाते हैं कि आपकी कल्पना और यथार्थ में कितना फर्क होता है। यह जरूर है कि अगर खुद में विश्वास हो और काम में रुचि तो आप हर मुश्किल को पार करके आगे बढ़ते रह सकते हैं।

यदि आप एक नए राइटर हैं तो लिखना जारी रखें
एस्पाइरिंग राइटर्स से मैं यही कहना चाहूंगी कि एक मोटी चमड़ी पहन लें और रिजेक्शन व क्रिटिसिज्म से दोस्ती कर लें। दूसरा, एक जिद के साथ जीना शुरू करें और अपनी आवाज को कभी दबने न दें। एक राइटर के तौर पर खुद को स्थापित करने और अपनी स्किल्स को धारदार बनाने के लिए सबसे जरूरी अगर कुछ है, तो यह कि आप हर हाल में लिखना जारी रखें। आपके पास अपने लेखन को सुधारने का एक ही तरीका है और वह है, ज्यादा से ज्यादा लिखना। हालांकि स्टोरीज का चयन करते हुए आपको बहुत ही सावधान रहने की जरूरत होगी, क्योंकि आपकी कामयाबी इन्हीं पर निर्भर होगी।

हर बार कुछ नया लिखने की कोशिश
विलियम कार्लोस मेरे पसंदीदा लेखक हैं और उनकी इस बात से काफी हद तक सहमत हूं कि लिखने का शौक एक बार लग जाए, तो आप खुद को रोक नहीं सकते। एक स्क्रीनराइटर के तौर पर अब मेरी खुद से उम्मीद काफी बढ़ गई है और मैं अब अधिक से अधिक ऑडिएंस को दिमाग में लेकर चलती हूं और उनकी पसंद का लिखने की कोशिश भी करती हूं। मुझे लगता है यही राइटिंग के क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती भी है।
 

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