कुछ खो जाने का डर बाहर निकाल फेंकिए : जाकिर खान

एक जीत से पहले कई बार हारना होता है

First Person। हमारी सबसे बड़ी समस्या होती है कि हम अपनी कमियों को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। अक्सर उन्हें ढंकने की कोशिश करते हैं। लेकिन याद रखें कमतरी आपके मन में होती है और आपको पता ही नहीं लगता कि लोग आपके साथ गलत व्यवहार कर रहे होते हैं। असल में काॅम्प्लेक्स आपके मन में होता है और हम सभी कहीं न कहीं डरे हुए रहते हैं। जबकि इसे बाहर निकाल फेंकना बेहद जरूरी है। लेकिन इससे पहले जरूरी है इन कमियों को पहचानना। जिंदगी में जो लोग आपको अपनी कमियों का अहसास कराते हैं, वे भी अप्रत्यक्ष रूप से आपकी मदद ही कर रहे होते हैं।

मुझे याद है बचपन में अपने रंग और कद, काठी की वजह से मेरा अपमान किया गया। वह मुश्किल वक्त था, लेकिन अगर मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ होता तो मैं वह नहीं होता जो मैं आज हूं। यही वजह है कि मैं नजरअंदाज करने की थ्योरी के खिलाफ हूं। मेरा मानना है कि आप इस स्थिति का सामना कीजिए। उस पर ध्यान दीजिए और किसी नतीजे पर पहुंचिए। यही आपको आगे लेकर जाएगा।

कुछ खो जाने का डर बाहर निकाल फेंकिए
- खोने से मत डरिए क्योंकि यह कुछ चले जाने का डर ही हमें कहीं नहीं जाने देता। मुझे याद है जब मैं अपने घर से निकला तो थर्ड क्लास के डिब्बे में टाॅयलेट के बाहर बैठा था। ठंड का मौसम था और मेरे पास एक शाॅल थी जो मैंने एक ठिठुरते हुए बच्चे को दे दी थी। जेब में कुल जमा 15 सौ रुपए थे। उस रात ठंड से ठिठुरते हुए मैंने एक प्रेरणास्पद कविता - मैं शून्य पर सवार हूं,- लिखी जिसका सार यही था कि जिंदगी में कई मुश्किलें हैं, लेकिन हमें उनका सामना बहादुरी से करना होगा। सचमुच जब हम सोच लेते हैं कि हमारे पास हारने को कुछ नहीं है तो संघर्षों से सामना करने की ऊर्जा दोगुनी हो जाती है और लक्ष्य तक पहुंचने की हमारी रफ्तार भी बढ़ जाती है।

फर्क पड़ना जरूरी है
- जिंदगी में चाहे अच्छा हो या बुरा असर जरूरी है। याद रखें जब आपको फर्क पड़ना बंद हो जाता है तो यह मृत्यु जैसा है इसलिए फर्क पड़ना चाहिए। यह भी ख्याल रखें कि आप एक दिन में विनर नहीं होते हैं। एक बार जीतने से पहले आपको कई बार हारना होता है। एक जीत के पीछे सालों का होमवर्क होता है। जिन लोगों की जिंदगी में कोई रुकावट या मुश्किलें नहीं होतीं वे सिर्फ एक ही तरीके से सोचते हैं। रुकावटें और मुसीबतें आपको क्रिएटिव बनाती हैं। तब आप नया सोचने के लिए मजबूर होते हैं। हर बार नई समस्या और उसका एक नया समाधान। हर बार नए उपाय के चक्कर में आप कब क्रिएटिव हो जाते हैं आपको पता ही नहीं चलता। इसलिए बदलाव से मत घबराइए, उसे मैनेज करने की कोशिश कीजिए। 

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