सफल कंपनी शुरू करने वाला यह आंत्रप्रेन्योर स्कूल ड्रॉपआउट है

अपना पैशन फॉलो करने का मौका मिला तो तृष्नीत ने भरपूर कोशिश की और सफल हुए।

Success Story।  तृष्नीत की आंत्रप्रेन्योरशिप की यात्रा तब ही शुरू हो गई थी जब वे आठ साल के थे। दरअसल टेक्नोलॉजी में अपनी जिज्ञासा के चलते उन्होंने अपनेपिता का पूरा कम्प्यूटर खोल दिया और कई कोशिशों के बावजूद उसे फिर से जोड़ नहीं पाए। जब उनके पिता उस सिस्टम को मैकेनिक के पास लेकर गए तो वे भी साथ गए और बहुत ध्यान से उसे जुड़ते हुए देखा। मैकेनिक को कम्प्यूटर ठीक करने में मात्र 15

Success Story।  तृष्नीत की आंत्रप्रेन्योरशिप की यात्रा तब ही शुरू हो गई थी जब वे आठ साल के थे। दरअसल टेक्नोलॉजी में अपनी जिज्ञासा के चलते उन्होंने अपनेपिता का पूरा कम्प्यूटर खोल दिया और कई कोशिशों के बावजूद उसे फिर से जोड़ नहीं पाए। जब उनके पिता उस सिस्टम को मैकेनिक के पास लेकर गए तो वे भी साथ गए और बहुत ध्यान से उसे जुड़ते हुए देखा। मैकेनिक को कम्प्यूटर ठीक करने में मात्र 15 मिनट का समय लगा। यह देखकर तृष्नीत की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में रुचि बढ़ने लगी और वे अपना अधिकतर समय इनसे जुड़ी जानकारी हासिल करने में बिताने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि वे आठवीं क्लास के एग्जाम में फेल हो गए। तब उनके पिता ने उनसे गंभीरता से पूछा कि वे जीवन में आगे चलकर क्या करना चाहते हैं। तब तृष्नीत ने उन्हें बताया कि वे कम्प्यूटर के क्षेत्र में ही कुछ करना चाहते हैं और इसके बाद उन्होंने स्कूल ड्रॉप करने का निर्णय लिया।

कई बड़ी कंपनियां इनकी क्लाएंट्स है
- तृष्नीत की कंपनी टैक सिक्योरिटी सॉल्यूंशंस, कॉर्पोरेट्स की साइबर सिक्योरिटी की कमजोरियों का पता लगाने के लिए वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनिट्रेशन टेस्टिंग करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार टैक सिक्योरिटी के क्लाइंट्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज, अमूल, एवन साइकिल्स, राल्को टायर्स सहित कई सरकारी संगठन जैसे सीबीआई, पंजाब और गुजरात पुलिस आदि भी शामिल हैं। 2013 में उन्होंने हैकिंग पर एक किताब भी लिखी जिसका नाम था हैकिंग एरा। एक समय में स्कूल ड्रॉपआउट रह चुके तृष्नीत फोर्ब्स की अंडर 30 एशिया 2018 लिस्ट में जगह बनाने में सफल हुए। साइबर सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग में खूब नाम कमा चुके इस युवा आंत्रप्रेन्योर का मानना है कि आगे आने वाले समय में हैकिंग से जुड़ी सर्विसेस की मांग और बढ़ जाएगी। साइबर सिक्योरिटी एक महत्वपूर्ण विषय है। दुनियाभर में हैकिंग से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनीज के लिए यह एक गंभीर समस्या का रूप ले रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा है। इस लिहाज से 2020 तक अकेले भारत को ही कम से कम एक हजार साइबर सिक्योरिटी स्टार्टअप्स की जरूरत होगी। 

खुद सीखकर आगे बढ़े :
- तृष्नीत खुद के स्तर पर कम्प्यूटर से जुड़ी नई चीजें सीखने लगे। उनके इस पैशन को देखते हुए उनके पेरेंट्स ने भी अपना सपोर्ट दिया और उन्हें नया कम्प्यूटर दिलवाया जिस पर वे खूब प्रयोग और प्रैक्टिस करते रहते थे। कम्प्यूटर पर इतना समय बिताने को लेकर उनके पेरेंट्स कई बार कम्प्यूटर लॉक कर देते थे, लेकिन तृष्णीत हर बार पासवर्ड क्रैक करने में सफल हो जाते थे। 19 साल की उम्र तक वे कई तरह की हैकिंग ट्रिक्स सीख गए। एथिकल हैकर के तौर पर खुद को स्थापित करने के लिए तृष्नीत ने आगे चलकर अपनी कंपनी टैक सिक्योरिटी सॉल्यूशन्स की नींव रख दी। 

 मिनट का समय लगा। यह देखकर तृष्नीत की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में रुचि बढ़ने लगी और वे अपना अधिकतर समय इनसे जुड़ी जानकारी हासिल करने में बिताने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि वे आठवीं क्लास के एग्जाम में फेल हो गए। तब उनके पिता ने उनसे गंभीरता से पूछा कि वे जीवन में आगे चलकर क्या करना चाहते हैं। तब तृष्नीत ने उन्हें बताया कि वे कम्प्यूटर के क्षेत्र में ही कुछ करना चाहते हैं और इसके बाद उन्होंने स्कूल ड्रॉप करने का निर्णय लिया।

कई बड़ी कंपनियां इनकी क्लाएंट्स है
- तृष्नीत की कंपनी टैक सिक्योरिटी सॉल्यूंशंस, कॉर्पोरेट्स की साइबर सिक्योरिटी की कमजोरियों का पता लगाने के लिए वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनिट्रेशन टेस्टिंग करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार टैक सिक्योरिटी के क्लाइंट्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज, अमूल, एवन साइकिल्स, राल्को टायर्स सहित कई सरकारी संगठन जैसे सीबीआई, पंजाब और गुजरात पुलिस आदि भी शामिल हैं। 2013 में उन्होंने हैकिंग पर एक किताब भी लिखी जिसका नाम था हैकिंग एरा। एक समय में स्कूल ड्रॉपआउट रह चुके तृष्नीत फोर्ब्स की अंडर 30 एशिया 2018 लिस्ट में जगह बनाने में सफल हुए। साइबर सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग में खूब नाम कमा चुके इस युवा आंत्रप्रेन्योर का मानना है कि आगे आने वाले समय में हैकिंग से जुड़ी सर्विसेस की मांग और बढ़ जाएगी। साइबर सिक्योरिटी एक महत्वपूर्ण विषय है। दुनियाभर में हैकिंग से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनीज के लिए यह एक गंभीर समस्या का रूप ले रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा है। इस लिहाज से 2020 तक अकेले भारत को ही कम से कम एक हजार साइबर सिक्योरिटी स्टार्टअप्स की जरूरत होगी। 

खुद सीखकर आगे बढ़े :
- तृष्नीत खुद के स्तर पर कम्प्यूटर से जुड़ी नई चीजें सीखने लगे। उनके इस पैशन को देखते हुए उनके पेरेंट्स ने भी अपना सपोर्ट दिया और उन्हें नया कम्प्यूटर दिलवाया जिस पर वे खूब प्रयोग और प्रैक्टिस करते रहते थे। कम्प्यूटर पर इतना समय बिताने को लेकर उनके पेरेंट्स कई बार कम्प्यूटर लॉक कर देते थे, लेकिन तृष्णीत हर बार पासवर्ड क्रैक करने में सफल हो जाते थे। 19 साल की उम्र तक वे कई तरह की हैकिंग ट्रिक्स सीख गए। एथिकल हैकर के तौर पर खुद को स्थापित करने के लिए तृष्नीत ने आगे चलकर अपनी कंपनी टैक सिक्योरिटी सॉल्यूशन्स की नींव रख दी। 

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