कॉमर्स में इंटरेस्टेड कैंडिडेट्स को लिए ये कोर्स हो सकते हैं बेहतर करियर ऑप्शन

बीकॉम, बीए, बीबीए, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे कोर्सेस से आप प्रोफेशनल वर्ल्ड में लाखों के पैकेज

जुकेशन डेस्क। इसमें कोई दोराय नहीं कि कॉमर्स एक ऐसी स्ट्रीम का दर्जा हासिल कर चुका है जो बिजनेस, लीगल फाइनेंस, इकोनॉमिक्स, बैंकिंग के अलावा टेक्निकल व पॉलिटिकल क्षेत्रों में करियर बनाने में मददगार साबित हो रही है। करियर की विस्तृत संभावनाओं और तरक्की के अवसरों को देखते हुए कॉमर्स भी अब मेडिकल और इंजीनियरिंग स्ट्रीम्स की तरह ही स्टूडेंट्स की पहली पसंद बन गया है। देश के प्रतिष्ठित कॉमर्स कॉलेजों में एडमिशन की कटऑफ 98 से 100 प्रतिशत के बीच रहना इसका संकेत भी देता है। अगर आप भी इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर के ऑप्शन्स को आजमाने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए इससे जुड़े सभी कोर्सेज और करियर की संभावनाओं की गहरी पड़ताल जरूरी होगी।

बीकॉम ऑनर्स /बीकॉम रेग्युलर 

- 12वीं के बाद कॉमर्स स्ट्रीम में यह सबसे लोकप्रिय कोर्स है। इसमें आपको इकोनॉमिक्स, मार्केटिंग, कॉर्पोरेट, अकाउंटिंग, लॉ, बिजनेस एनवायरनमेंट जैसे विषय पढ़ने होते हैं। 
- यह डिग्री लेकर आप अकाउंटिंग, बैंकिंग फाइनेंशियल मैनेजमेंट, इंफॉर्मेशन सिस्टम और मैनेजमेंट से जुड़े करियर बना सकते हैं। कई यूनिवर्सिटीज में बीकॉम इन बैंकिंग इंश्योरेंस और बीकॉम विथ कम्प्यूटर्स भी करवाया जाता है। 


बीए (ऑनर्स) इकोनॉमिक्स/ बीए (ऑनर्स) बिजनेस इकोनॉमिक्स 

- यह भी एक महत्वपूर्ण ऑप्शन है जो 12वीं के बाद उपलब्ध होता है। इस कोर्स में स्टूडेंट्स को विभिन्न इकोनॉमिक कॉन्सेप्ट्स और एनालिटिकल मैथड व स्टडीज का एक्सपोजर मिलता है और आपको एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स, मैक्रोइकोनॉमिक्स, इंडियन इकोनॉमिक्स, इंटरनेशनल ट्रेड पढ़ना होता है। 
- कुछ कॉलेजों में इस कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं में मैथ्स, इकोनॉमिक्स और अकाउंटिंग पढ़ना अनिवार्य होता है। 


बीबीए, बीएफएम, बीबीएस व बीएमएस 

- बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, बैचलर ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट, बैचलर ऑफ बिजनेस स्टडीज और बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज भी कुछ पॉपुलर कोर्स हैं। इन तीन वर्षीय कोर्सेज के दौरान स्टूडेंट बिजनेस, मैनेजमेंट, एजुकेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप स्किल्स और एडमिनिस्ट्रेशन के बारे में पढ़ते हैं।
- अपना बिजनेस शुरू करने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए यह कोर्स बेहतर हैं। कोर्स के लिए 12वीं में मैथ्स व इंग्लिश होना जरूरी है। 

 

बैचलर इन स्टैटिस्टिक्स 

- यदि आंकड़ों के हिसाब किताब व सांख्यिकी में आपकी दिलचस्पी है तो बैचलर इन स्टैटिस्टिक्स आपके लिए बेस्ट विषय है। इस तीन वर्षीय कोर्स में एडमिशन लेने के बाद स्टैटिस्टिक्स मैथड्स,पर्मुटेशन व प्रोबैबिलिटी जैसे टॉपिक्स को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। 

 

एमकॉम फाइव ईयर इंटीग्रेटेड प्रोग्राम


- यह एक ड्यूअल डिग्री कोर्स है जो देश की कई यूनिवर्सिटीज में पढ़ाया जाता है। इस कोर्स में एडमिशन के लिए स्टूडेंट को 12वीं में गणित विषय होना जरूरी शर्त है।
- यह डिग्री लेने के बाद आप बैंकिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरी, स्टॉक ब्रोकिंग, कॉस्ट वर्क जैसे क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। 

 

कॉमर्स स्ट्रीम के प्रोफेशनल कोर्स 

 

चार्टर्ड अकाउंटेंट 

- चार्टर्ड अकाउंटेंट कॉर्पोरेट वर्ल्ड का जिम्मेदारी भरा करियर है जहां आपको कंपनी के अकाउंट्स का ब्यौरा रखना होता है। सीए स्टूडेंट्स के लिए जरूरी है कि अकाउंटिंग, ऑडिट व टैक्सेशन पर पकड़ मजबूत हो। 
- 12वीं के बाद स्टूडेंट इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीए की पढ़ाई काफी चैलेंजिंग होती है इसलिए सीए के साथ बीकॉम या किसी दूसरी डिग्री की पढ़ाई न करें। 

 

कंपनी सेक्रेटरी 

- लॉ और थ्योरिटिकल सब्जेक्ट्स में रुचि रखने वाले कॉमर्स के स्टूडेंट्स 12वीं के बाद सीएस की पढ़ाई कर सकते हैं। यहां आप किसी भी कंपनी की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े कानूनों के बारे में सीखते हैं। 
- सीएस को कंपनी के हर डिपार्टमेंट के बीच संतुलन रखने के साथ कानूनों की पालना सुनिश्चित करनी होती है। 

 

कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट 

- सीडब्ल्यूए का मुख्य काम कंपनी के कॉस्ट ऑडिट को देखना और उसकी जांच करना है। साथ ही वे इम्पोर्ट व एक्सपोर्ट डॉक्यूमेंट्स की जांच एग्जिम पॉलिसी के मापदंडों के आधार पर करते हैं। 
- इसके लिए आपको आईसीडब्ल्यूए एग्जाम देना होगा जो फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल की तीन स्टेजेज में होता है। 
- 12वीं के बाद स्टूडेंट्स फाउंडेशन कोर्स के लिए जबकि ग्रेजुएट स्टूडेंट्स इंटरमीडिएट कोर्स के लिए और तीन साल के अनुभव के बाद कैंडिडेट सीधे फाइनल स्टेज पर होने वाले एग्जाम के जरिए आईसीडब्लूएआई के साथ जुड़ सकते हैं। 

 

कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (सीएमए) 

- इस प्रोफेशनल कोर्स को आईसीएआई आयोजित करता है। सीए व सीएस की तरह ही इस कोर्स के एंट्रेंस को भी कई लेवल में विभाजित किया गया है।
- इसकी पढ़ाई के दौरान एक स्टूडेंट कॉस्टिंग, प्लानिंग व कंट्रोलिंग और मैनेजमेंट अकाउंटिंग के विभिन्न पहलुओं को सीखता व समझता है। 

 

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) 

- जिन स्टूडेंट्स की दिलचस्पी पर्सनल फाइनेंस, वेल्थ मैनेजमेंट, इंश्योरेंस प्लानिंग, म्युचूअल फंड्स में है तो उनके लिए यह बेहद खास कोर्स है।
- फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया के द्वारा इस कोर्स को संचालित किया जाता है। 
 

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