लर्निंग से जुड़े इन मिथकों की ये है रियलिटी

लर्निंग से जुड़े इन मिथकों के बजाय सेल्फ डेवलपमेंट के लिए नए तरीके अपनाए

लर्निंग सिर्फ सीखने की प्रक्रिया भर नहीं है बल्कि यह सेल्फ डेवलपमेंट का ताकतवर जरिया है। लेकिन समस्या है कि पारंपरिक ज्ञान और तथ्यों के बीच बड़ा गैप है। जिसके चलते हम सीखने के लिए वही तरीके अपनाते हैं जो वर्षों से चलन में हैं। इस प्रक्रिया में लर्निंग के साथ कई मिथक भी जुड़ गए हैं जिन्हें अक्सर सच मान लिया जाता है। असल में अक्सर लोग नॉलेज और स्किल्स को सीखने के बेहतरीन तरीकों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, जबकि लर्निंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आप जितना ज्यादा सक्रिय रूप से शामिल होंगे उतना ही बेहतर सीख पाएंगे। इस सिलसिले में लर्न बेटर : मास्टरिंग द स्किल्स फॉर सक्सेस इन लाइफ, बिजनेस एंड स्कूल के लेखक अलरिच बोसर ने लर्निंग से जुड़े कुछ मिथकों और उनसे छुटकारा पाने के तरीकों के बारे में बताया है। 

मिथ : एक बार में एक विषय 
रियलिटी :
जब भी किसी मुश्किल विषय को सीखना हो तो ऐसा माना जाता है कि आपको एक बार में एक ही चीज की प्रैक्टिस करनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर आप कोई नया सॉफ्टवेयर तैयार करना सीख रहे हैं तो एक दिन में एक प्रोग्राम समझते हैं, लेकिन साइंस के मुताबिक चीजों को मिक्स करके सीखना ज्यादा बेहतर अप्रोच है। मिक्स्ड लर्निंग में आप मुख्य आइडिया को समझ पाते हैं और इससे समझने की क्षमता का भी विस्तार होता है।

मिथ : पहला जवाब ही सही जवाब
रियलिटी :
अक्सर ऐसा माना जाता है कि किसी भी परीक्षा में जो जवाब पहली बार में सूझता है उसे आप नहीं बदल पाते क्योंकि वह अापको सही लगता है, लेकिन वास्तविकता में उस पर दोबारा विचार करना ज्यादा बेहतर है। रिसर्च के अनुसार, कई बार लोग ज्यादा कॉन्फिडेंट होते हैं और सोचते हैं कि वे एक बार में सही जवाब दे सकते हैं, जबकि इसके लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। नई समस्याओं को सुलझाने और नए आइडियाज के लिए यह समझना जरूरी है कि चीजें कैसे एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। इन कनेक्शंस को समझने में समय लगता है।

मिथ : कंटेंट को याद रखने के लिए उसे बार-बार पढ़ना चाहिए 
रियलिटी :
जब कभी आप महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए जाते हैं तो अपने नोट्स का रीव्यू करके सबकुछ याद रखना चाहते हैं, लेकिन यह अप्रोच लर्निंग के लिए ठीक नहीं है। अलरिच बोसर ने अपने अध्ययन में पाया कि 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बार-बार पढ़ने को लर्निंग का इफेक्टिव तरीका माना था जबकि यह सही नहीं था। रिसर्च के अनुसार लोग खुद में कम्प्यूटर की तरह ही इन्फॉर्मेशन फ्लो करते हैं। जबकि रटने के बजाय सूचनाओं को समझना जरूरी है। महत्वपूर्ण सूचनाओं को हाइलाइट करें, अंडरलाइन करें या उस इंफॉर्मेशन को क्विज में बदल लें। क्विज के जरिए आप बेहतर ढंग से याद रख पाएंगे। 

मिथ : ज्यादा से ज्यादा घंटे लगाने पर समझ बेहतर होगी 
रियलिटी :
लेखक माल्कोम ग्लैडवेल की 10,000 आवर्स थ्योरी के मुताबिक किसी भी स्किल का एक्सपर्ट बनने के लिए उसमें बड़ी मात्रा में समय का निवेश और प्रैक्टिस की जरूरत होती है़, लेकिन वास्तविकता में इसका बेहतर लर्निंग से कोई लेना-देना नहीं है। उदाहरण के तौर पर ज्यादातर लोग रोज गाड़ी ड्राइव करते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस प्रैक्टिस से उनकी ड्राइविंग भी बेहतर होगी। याद रखें किसी भी काम में बहुत से घंटे देने का यह मतलब नहीं है कि आप उसमें बेहतर प्रदर्शन करेंगे। कई रिसर्च बताते हैं कि लोग अक्सर किसी भी फील्ड में अपनी विशेषज्ञता को जरूरत से ज्यादा बेहतर मानते हैं। चाहे फिर उनकी ड्राइविंग हो या इंग्लिश स्किल्स, जबकि वे अपनी अक्षमताओं से अनजान होते हैं। असल में यह सिर्फ समय पर निर्भर नहीं करता। यह अनुभवियों की सलाह और आपके इनपुट पर आधारित होता है।

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