बैकग्राउंड सपोर्ट से नहीं, काम से प्राप्त होगी सफलता : सिद्धार्थ मल्होत्रा

अभिनय के क्षेत्र में आने से पहले मॉडल रहे इस अभिनेता ने एक सहायक निर्देशक के रूप में भी काम किया

First Person। मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा तो नहीं था, लेकिन जो भी करता था उसमें अपनी ओर से पूरी मेहनत करता था। बहुत जल्दी ही मैंने मॉडलिंग करना शुरू कर दिया था। उस समय फिल्मों में काम करने के बारे में सोचा भी नहीं था। मॉडलिंग के लिए बहुत से ऑडिशंस देने होते थे। ऐसे ही एक ऑडिशन देने के लिए गया, तो पता चला कि वह ऑडिशन अनुभव सिन्हा की फिल्म के लिए है। मैंने सोचा कोशिश करके देखने में क्या बुराई है।

इस तरह मैं उस ऑडिशन में सलेक्ट हो गया और मुझे मुम्बई बुला लिया गया। हालांकि किन्हीं कारणों से वह फिल्म बन नहीं सकी और मैं अपना खर्च चलाने के लिए फिर से मॉडलिंग करने लगा। वह समय काफी संघर्ष में बीता। उसी दौरान मेरे एक दोस्त ने सलाह दी कि मैं पहले असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करूं। यह बात मुझे सही लगी, क्योंकि इससे मैं फिल्ममेकिंग के बारे में बहुत कुछ सीख सकता था। असिस्टेंट के तौर पर काम करके मैं सीख पाया कि एक एक्टर से क्या उम्मीदें की जाती हैं और उसे किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

ऑडिशंस से परेशान होकर बना असिस्टेंट डायरेक्टर
हालांकि मैं बहुत कम उम्र में बॉलीवुड में अपनी एक जगह बना पाया हूं, लेकिन फिल्मी बैकग्राउंड से न होने की वजह से मेरे लिए यह बहुत आसान नहीं रहा। रोज ऑडिशंस देने होते थे जो बहुत मोटिवेटिंग नहीं हाेते थे। दरअसल ऑडिशंस के दौरान एक कतार में डेढ़ सौ ऐसे लोगों के बीच खड़े होना आपके लिए काफी तनाव भरा होता है। इसके अलावा ऑडिशंस की सबसे खराब बात यह होती है कि लोग आपको बहुत ही गैर-जरूरी और छोटा महसूस करवाते हैं। यह भी एक कारण है कि मैंने पहले असिस्टेंट डायरेक्टर बनने का निश्चय किया। इस दौरान बहुत बार तारीफ होती, तो कई बार डांट भी खानी पड़ती थी जो आज तक भी जारी है।

एक जैसे नहीं होते दो लोगों के अनुभव व यात्रा
मैं समझता हूं कि क्रिटिसिज्म और तारीफ दोनों ही लम्बे समय तक नहीं चल पाते। आपके लिए दोनों ही स्थितियों में काम करते रहना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए कई बार आपकी तुलना आपके साथियों से की जाती है। जरूरी नहीं कि दो लोगों के अनुभव और यात्रा एक जैसे हों, लेकिन फिर भी आपके आलोचक और प्रशंसक आपकी तुलना करते हैं। हालांकि यह पूरी तरह आप पर ही निर्भर करता है कि आप इस तरह की आलोचना को गंभीरता से लेते हैं या नहीं।

आपको मजबूत बनाते हैं रिजेक्शंस
मैं इस बात में पूरी तरह यकीन करता हूं कि हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम कहां से आए हैं और किन लोगों ने हमारी मदद की है। एक आउटसाइडर होने के कारण बहुत-से ऑडिशंस और रिजेक्शंस के बाद मैंने यह जगह बनाई है। रिजेक्शन आपको बहुत मजबूत बनाते हैं और धीरे-धीरे आप लोगों को खुश करने के लिए नहीं खुद को खुश करने के लिए काम करना सीख जाते हैं। मुझे लगता है कि स्क्रैच से शुरुआत करने की वजह से आप बहुत-सी मुश्किलों का सामना पहले ही कर लेते हैं।

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