आरजीपीवी / डिप्लोमा इंजीनियरिंग में आउट कम बेस्ड कॅरिकुलम लागू

78 सरकारी, 89 निजी पॉलिटेक्निक में इसी सत्र से लागू होगी यह शिक्षा प्रणाली

एजुकेशन डेस्क।  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) सत्र 2019-20 से डिप्लोमा इंजीनियरिंग में आउट कम बेस्ड कॅरिकुलम (परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली) लागू कर दिया है। इस सत्र में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को नए कॅरिकुलम के अनुसार ही पढ़ाया जाएगा। इसे लागू करने की मंजूरी विवि की कार्यपरिषद ने दे दी है। इसका मकसद अब रट्टा लगाकर केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स की कौशल को परखना और उन्हें रोजगार से जोड़ना है। तीन वर्षीय प्रोग्राम में स्टूडेंट्स ने जो पढ़ा और वह उसे हर समस्या को हल करने के काबिल बन सके।

प्रदेश में 78 सरकारी और 89 निजी पॉलिटेक्निक हैं। इनमें संचालित डिप्लोमा इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के लिए यह प्रणाली लागू की गई है। नए कॅरिकुलम से स्टूडेंट्स में नॉलेज स्किल को निखारने पर फोकस किया जाएगा, ताकि जब वह अपनी पढ़ाई पूरी करे तो रोजगार प्राप्त करने में उसे कोई परेशानी न आए। दरअसल, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली को लागू करने के कदम को एक महत्वपूर्ण पहल बताया जा रहा है। वहीं नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड आॅफ एक्रिडिटेशन (एबीए) ने भी इस प्रणाली को लागू करने की सिफारिश की है।

ऐसे समझिए आखिर क्या है आउटकम बेस्ड एजुकेशन…
इस प्रणाली के चार पार्ट हैं। प्रोग्राम आउट कम, कोर्स आउट कम, परफार्मेंस, इंडिकेटर और परीक्षा में पूछे गए प्रश्न को शामिल किया गया है। हर कोर्स का एक विशेष उद्देश्य होगा, स्टूडेंट्स को पता होगा कि वह संबंधित कोर्स को क्यों पढ़ रहा है। ताकि स्टूडेंट्स अच्छा इंजीनियर तो बने साथ ही वह एक अच्छा प्रोफेशनल भी बन सके, इसके लिए अलग-अलग पैरामीटर्स तैयार किए गए हैं।

इसके लिए अब टीचर्स को भी पूरी तैयारी के साथ ही क्लास में पहुंचना होगा
परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली में स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान देना ही काफी नहीं होगा। टीचर्स द्वारा पढ़ाए गए टॉपिक्स स्टूडेंट्स की मैमोरी में बने रहें, इसके साथ ही उनमें समझने की क्षमता विकसित हो और वह उसका एनालिसिस भी कर सके। वे उनके सामने आने वाली समस्याओं को हल करने के काबिल बन सकें। इन सब बातों को लेकर इस प्रणाली को लागू किया जा रहा है। इसके लिए टीचर्स को भी पूरी तैयारी के साथ क्लास में पहुंचना होगा।

सिलेबस से लेकर पढ़ाई के तौर-तरीके और परीक्षा का पैटर्न भी बदलेगा
आरजीपीवी डिप्लोमा विंग की रिसर्च ऑफिसर पद्मजा राव ने बताया कि इस बार सिलेबस में भी बदलाव किया गया है। वहीं, हर विषय को पांच यूनिट में बांटा गया है। उन्होंने बताया कि इसमें ना सिर्फ पढ़ाई करने और कराने के तौर-तरीके बदलेंगे बल्कि परीक्षा का पैटर्नभी बदला जाएगा। ताकि, स्टूडेंट्स का मूल्यांकन सही से हो सके। परीक्षा में तार्किक क्षमता, कठिन परिस्थितियों में समस्या को हल करने के तरीके आदि जैसे सवाल पूछे जाएंगे।

तर्क... इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्किल फुल बनाना है
नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन के मापदंड के अनुसार नया कॅरिकुलम तैयार किया गया है। इसके तहत परीक्षाओं का पैटर्नभी बदलेगा। इसमें स्टूडेंट्स के स्तर का तो पता चलेगा ही टीचर्स के परफार्मेंस भी पता चल सकेगा। इसका उद्देश्य यह है कि स्टूडेंट्स को एकेडमिक ही बल्कि प्रैक्टिकली भी सक्षम बनाया जा सके।
- डॉ. अरुण नाहर, सचिव, डिप्लोमा विंग आरजीपीवी
 

Next News

एडमिशन / बीएड की 6883 सीट के लिए 16339 की स्टूडेंट्स की मेरिट लिस्ट जारी

बीएड में एडमिशन के लिए 18638 ने प्राथमिकता दर्ज कराई थी

Array ( )