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लाइफ में कितने भी कामयाब क्यों न हो जाएं, विनम्रता कभी न छोड़ें: रतन टाटा

एक समय था जब रतन टाटा भी एक सामान्य छात्र थे। उन्होंने अपनी आदतों की वजह से एक सामान्य छात्र से लेकर बिजनेस टाइकून तक का सफर तय किया।

एजुकेशन डेस्क। पद्म विभूषण अवॉर्ड से सम्मानित टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा अक्सर कहते हैं कि व्यापार का अर्थ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना होता है। एक समय था जब वह भी एक सामान्य छात्र थे। उन्होंने अपनी आदतों की वजह से एक सामान्य छात्र से लेकर बिजनेस टाइकून तक का सफर तय किया। 28 दिसम्बर 1937 को गुजरात के सूरत में जन्मे रतन टाटा ने कई बार मोटिवेशनल भाषण दिए हैं जिनसे स्टूडेंट्स काफी प्रभावित हुए हैं। स्टूडेंट्स को दिए गए मोटिवेशन से भरपूर उनके भाषण के कुछ अंश... 


आप अपने इर्द-गिर्द लोगों से अक्सर सुनते होंगे कि यह काम नहीं हो सकता। कॉलेज से निकलने के बाद अब यह आपकी ड्यूटी है कि आप ऐसे मिथ्स को तोड़ें। बहुत से ऐसे काम हैं, जो हमारे देश में होने चाहिए थे, लेकिन वे नहीं हो पाए। इनके पीछे जिम्मेदार ऐसी मानसिकता के लोग ही हैं, जो कहते हैं कि इस काम को कर पाना मुमकिन नहीं है। 

आने वाले सालों में आप लोग इस देश के लीडर्स होंगे। इस देश का भविष्य आपके ही कंधों पर है। यह काम कर पाना मुमकिन नहीं है, यह नहीं हो सकता... ऐसे विचारों को मन में जगह न दें। अपने चारों ओर नजर उठाकर देखिए, दुनिया कामयाबी की मिसालों से भरी पड़ी है। तमाम बड़ी कंपनियों के उदहारण हैं। सोचिए इन कंपनियों को बनाने के आइडियाज कहां से आए? माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फेसबुक, ऐपल, एमजॉन जैसी कंपिनयां कहां से आईं? ये कंपनियां तभी अस्तित्व में आईं जब किसी ने सोचा कि यह काम किया जा सकता है, यह मुमकिन है। 

आपसे यही उम्मीद है कि नकारात्मकता की ओर न देखें, सोच लिया जाए तो बड़े से बड़ा काम हो सकता है। इसके अलावा, ध्यान रखें कि जीवन में कितने भी कामयाब क्यों न हो जाएं, विनम्रता कभी न छोड़ें। कभी किसी नोबेल विजेता के पास बैठकर देखा है आपने? वह आपको कभी महसूस नहीं होने देंगे कि वह इतना बड़ा अवॉर्ड जीत चुके हैं। उनके आसपास के लोगों से ही आपको उनकी महानता के बारे में पता चलेगा। आपने जो भी शिक्षा हासिल की है, उसे समाज को वापस करने के लिए भी थोड़ा काम करते रहें। 

अपनी कामयाबी को इस आधार पर कभी नहीं आंकिए कि आपने कितना पैसा कमा लिया, आप किस पद पर पहुंच गए या आपकी समाज में कितनी प्रतिष्ठा है। आपकी कामयाबी का पैमाना यह होना चाहिए कि जब आप रात को घर लौटें तो मन में यह संतुष्टि रहे कि आपने देश और समाज की तरक्की में अपनी ओर से योगदान दिया है, भले ही वह योगदान कितना भी छोटा क्यों न हो! 


कामयाबी की नई मिसाल बनें 

मैं आज आप लोगों के बीच आकर थोड़ा दुखी हूं, इस बात को लेकर कि मैं आज आपकी उम्र में नहीं हूं और ऐसे वक्त में कॉलेज से पासआउट नहीं हो रहा हूं, जब बिजनेस की दुनिया बांहें पसारे आपका स्वागत कर रही है। आपके लिए यह एक बेहद अहम पल है। जाहिर है आपकी जिम्मेदारियां भी बड़ी होंगी। 

आप आने वाले सालों में लीडर्स बनने वाले हैं। कॉलेज से निकलकर आप सभी को बिजनेस वर्ल्ड की बड़ी जिम्मेदारियों को निभाना है और ऐसे में आपके पास अपना बेस्ट देने के अलावा दूसरा ऑप्शन नहीं है। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना ही है। जिस लीडरशिप की बात मैं कर रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि उसे निभाने के लिए आप अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करेंगे और अपनी वैल्यूज को पूरी तवज्जो देंगे। 

मेरा मानना है कि असली लीडर वह होता है, जिसके पास विजन है, जो भविष्य के गर्भ में छिपे अवसरों को बहुत पहले ही ताड़ लेता है और उसके मुताबिक ही काम करता है। वैसे मुझे इस बात का अफसोस है कि हमारे देश में ऐसे बिजनेस लीडर्स की कमी रही है। हमारे बहुत से बिजनेस लीडर्स दुनिया के बिजनेस लीडर्स के फॉलोअर्स रहे हैं। आपको इस ट्रेंड को तोड़ना है और कामयाबी की अपनी नई कहानी लिखनी है। इसके लिए आपको दृढ़ संकल्प, काबलियत और भरपूर आत्मविश्वास की जरूरत होगी। 

इसके अलावा मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि पैसा, पद, प्रतिष्ठा कमाने के अलावा भी आपकी एक और अहम जिम्मेदारी है और उस जिम्मेदारी को भी आपको पूरी शिद्दत से निभाना है। यह जिम्मेदारी है एक इंसान के तौर पर समाज में आपकी भूमिका। भले ही कोई भी काम कितना भी छोटा हो, लेकिन आपको कुछ न कुछ ऐसा काम जरूर करते रहना होगा, जो इस देश के ग्रामीण इलाकों में रह रहे करोड़ों लोगों के जीवन की क्वॉलिटी को बेहतर बना सके, उनके जीवन में बदलाव ला सके। अगर आप ऐसा कर पाए तभी आप सच्चे मायनों में कामयाब होंगे।
 

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