परफेक्शन ही कामयाबी की गारंटी नहीं है : इम्तियाज अली 

फिल्म डायरेक्टर इम्तियाज अली के इन तजुर्बों में मिलेंगी आपको उपयोगी सलाहें 

First Person। बचपन में मैं बहुत कंफ्यूज था। मुझे ऐसा लगता था कि मैं किसी काम का नहीं हूं, लेकिन दूसरों के सामने मैं खुद को कमतर साबित नहीं करना चाहता था। तब मैं अक्सर खुद को श्रेष्ठ दिखाने के लिए झूठ भी बोल देता था। इस सिलसिले में अपने स्कूल के दोस्तों से कहता कि मैं अपनी कॉलोनी का हीरो हूं और कॉलोनी में कहता कि मैं अपने स्कूल की क्रिकेट और फुटबॉल टीम का बेस्ट प्लेयर हूं, लेकिन यह सब झूठ था। दरअसल मैं अक्सर अपने ख्यालों में डूबा रहने वाला स्टूडेंट था और सबके साथ आसानी से घुलमिल नहीं पाता था, संभवत: उस दौरान मैं खुद को नहीं समझ पा रहा था। जैसा कि अक्सर उस उम्र में होता है। मुझे नहीं पता था कि मैं क्या करना चाहता हूं, लेकिन मैं इस कन्फ्यूजन को बाहर भी नहीं लाना चाहता था। यही वजह थी कि मैं खुद को बेस्ट दिखाने की कोशिश करता था। असल में मैं खुद को सबसे अलग महसूस करता था। वास्तविकता में हम सब अलग ही होते हैं और हमारी यात्राएं भी अलग होती हैं, लेकिन इस बात को वक्त रहते समझना बहुत जरूरी है। वर्ना आपकी मेहनत को सही दिशा नहीं मिल पाएगी। आप जैसे भी हैं खुद को स्वीकार करें। मुझे लगता है कि हमें खुद को समझना चाहिए और वही करना चाहिए, जो हमें अच्छा लगता है। 

छोटा-बड़ा नहीं है कोई काम 
जब मैं अपनी पहली फिल्म का निर्देशन कर रहा था तो मैंने डायरेक्शन के अलावा भी कई काम किए। ये ऐसे काम थे जिन्हें कोई नहीं करना चाहता था। इन सभी कामों से मैंने काफी कुछ सीखा। अगर मैं इन्हें नहीं करता तो संभवत: काफी कुछ सीखने से छूट जाता। याद रखें, हर नई चुनौती आपके लिए कई मौके साथ लाती है। मौकों के साथ आपको आलोचनाओं के लिए भी तैयार रहना होगा। आप कुछ भी करेंगे तो दूसरे उस पर रिएक्ट करेंगे ही। यह ह्यूमन बिहेवियर है। लेकिन इससे आपको पूरी तरह बेअसर रहना होगा, तभी आप आगे की ओर बढ़ पाएंगे। 

समस्याओं को बदलिए अवसरों में 
मैं जब पहली बार टीवी सीरीयल डायरेक्ट कर रहा था तब मुझे कोई आइडिया नहीं था कि मुझे क्या करना है, लेकिन मैं ऐसे ही व्यवहार करता था जैसे मुझे सब कुछ पता है। इसका नतीजा यह था कि लोग खुद ही सुझाव लेकर आते थे और उनमें से जो सबसे बेहतर होता था मैं उसे मान लेता था इस तरह मैंने काम के दौरान ही काम सीखा। क्योंकि यह सिर्फ मैं जानता था कि मुझे काम नहीं आता। इसकी भरपाई के लिए मैंने अपनी कमजोरियों को ठीक करने के लिए मेहनत की और मन लगाकर सीखा भी। इस घटना से मैंने जाना कि थोड़ा धैर्य और खुद पर विश्वास रखकर हम किसी भी समस्या को मौके में बदल सकते हैं और यह भी आपके ऊपर ही निर्भर करता है कि आप उन मौकों का किस तरह फायदा उठा सकते हैं और उनसे क्या सीख सकते हैं। 

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