लोगों की उम्मीदें मुझे जीतने के लिए प्रोत्साहित करती हैं : सौरभ चौधरी

आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड बनाने वाले देश के सबसे युवा शूटर हैं सौरभ

FirstPerson। मेरठ के नजदीक कलीना गांव में रहने वाले एक किसान का बेटा होने के नाते मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं स्पोर्ट्स में इतना बड़ा मुकाम कभी हासिल कर पाऊंगा। दरअसल मेरे पिता खेती करके घर का खर्च उठाते हैं और इसी लिहाज से मुझे भी समय मिलने पर खेती में उनका हाथ बंटाना पड़ता था। इस दौरान पसंद या नापसंद का तो सवाल ही नहीं था। यह जानते हुए भी कि हमारे परिवार के गुजारे का एकमात्र साधन खेती ही है, मैं इससे अलग कुछ करना चाहता था। मेरी इसी चाहत ने मुझे प्रोफेशनल शूटिंग का रास्ता दिखाया।

दरअसल मेरी छोटी उम्र में गांव में लगे मेलों में गुब्बारों पर निशाना लगाने की प्रतियोगिता में मुझे शूटिंग के बारे में जानने को मिला और तभी से यह मेरी हॉबी बन गई। मैं 13 वर्ष का था जब मैंने अपनी इस हॉबी को प्रोफेशनल ट्रेनिंग के जरिए मजबूत बनाने का सोचा। इसके लिए मैंने मेरठ से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित एक एकेडमी जॉइन की। कई घंटों तक चलने वाली मुश्किल ट्रेनिंग के चलते मुझे अपनी फैमिली और घर से भी दूर रहना पड़ता था। लेकिन जब भी मुझे कुछ समय मिलता, तो मैं घर जाकर खेती में मेरे पिता की मदद जरूर करता था

गोल्ड जीतना किसी सपने से कम नहीं
प्रैक्टिस के दौरान तीन सालों के बाद मुझे एशियन यूथ ओलिंपिक गेम्स के जरिए वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इसके बाद मैंने यूथ ओलिंपिक्स के लिए क्वालिफाई किया और गोल्ड जीतने के साथ ही रिकॉर्ड भी बनाया। सोलह साल की उम्र में एशियन गेम्स और यूथ ओलिंपिक्स सहित कई प्रतिस्पर्धाओं में गोल्ड जीत पाना, मेरे लिए एक सपने जैसा ही है, जैसा कि मेरी उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए होगा। हालांकि मैं समझता हूं कि माता-पिता के सपोर्ट, अच्छी ट्रेनिंग और कड़ी मेहनत से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। 

परफॉर्मेंस पर ध्यान देता हूं रिजल्ट पर नहीं
शूटिंग में बेहतर कॉन्संट्रेशन लेवल होना बहुत जरूरी होता है। प्रैक्टिस हमें सिखाती है कि बाकी सबकुछ भूलकर आप अच्छा परफॉर्म कैसे करेंगे। मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा कि मुझे रिकॉर्ड बनाना है या गोल्ड मेडल हासिल करना है। मैंने सिर्फ उन बातों को फॉलो किया जो मुझे सिखाई गई थीं। मुझे लगता है कि यदि आप रिजल्ट के बारे में सोचते हैं तो आपकी परफॉर्मेंस प्रभावित होती है।

गेम को ध्यान में रखकर रणनीति बनाना जरूरी है
हालांकि मुझे इस खेल में बहुत समय नहीं हुआ है, लेकिन मैं मानता हूं कि जीत या अच्छा स्कोर एक अच्छी तैयारी को दर्शाता है। शूटिंग में ऑडियंस के शोर को नजरअंदाज करके निशाना साधना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। किसी भी काम में सफल होने के लिए आप को एक जगह ध्यान लगाना ही पड़ता है। दरअसल हर गेम अलग होता है और उसकी जरूरत के अनुसार ही हमें स्ट्रैटजी बनानी और अपनानी पड़ती है। यूथ ओलम्पिक चैंपियन बनने तक के सफर में सबसे अधिक ध्यान इसी बात का रखा कि किसी भी तरह का प्रेशर मुझ पर हावी न हो और जो कुछ मुझे कोच सर से सीखने को मिला है मैं वह अच्छे से फॉलो कर पाऊं। 
 

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