सिर्फ कोशिश के मार्क्स नहीं मिलेंगे, रिजल्ट्स भी देने होंगे : फरहान अख्तर 

युवाओं के लिए फरहान अख्तर के सक्सेस टिप्स 

FirstPerson। जब मैं कॉलेज के थर्ड ईयर में था तो बहुत ही उदास और अकेला रहने लगा था। सारा दिन फिल्में देखता और घर पर बैठा रहता। उस वक्त मेरी मां ने अलग-अलग तरह से मुझे समझने और समझाने की कोशिश की, लेकिन मुझ पर उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने कहा कि कुछ काम करो वर्ना मैं तुम्हें घर से निकाल दूंगी। मां की इस बात का मुझ पर बहुत असर हुआ और मैंने काम करना शुरू कर दिया।

असल में हमारे पेरेंट्स हमें बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वे यह भी चाहते हैं कि कहीं हम उनके प्यार की वजह से बिगड़ न जाएं इसलिए वे हमारे साथ कठोर होकर हमें हमारी क्षमताओं का अहसास करवाते हैं। आज मैं उनके उस व्यवहार का बहुत शुक्रगुजार हूं। इस घटना का जिक्र इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि उस उम्र में युवा अपने पेरेंट्स, टीचर्स या मेंटर्स का ये भाव नहीं समझ पाते, जबकि वे चाहें तो उनकी नसीहतों से अपने विजन के लिए ऊर्जा जुटा सकते हैं। 

विकल्प चुनने में जल्दबाजी न करें 
मेरे पेरेंट्स ने हमेशा मुझे और जोया (बहन) को अपना हर फैसला खुद लेने की आजादी दी। निर्णय लेने की इस प्रक्रिया में हमने कामों के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों को भी समझा। फ्रीडम देने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप बेपरवाह हो जाएं बल्कि यह आपको ज्यादा जिम्मेदार बनाती है। बस हमारा फोकस यही होना चाहिए कि जो भी काम हम चुनें उसमें अपना बेस्ट दें। आप चाहें जो भी हों एक डॉक्टर या किसान। अपने काम के प्रति ईमानदार व समर्पित रहें। इसके साथ ही भविष्य के चुनाव में खासतौर पर सावधानी बरतें। आपके हरेक चयन के साथ आपकी जिंदगी की दिशा बदलती है। जल्दबाजी न करें, अपने विकल्प सोच समझकर चुनें और उन्हें बेहतर बनाने के लिए मेहनत भी करें। 

जरूरी नहीं कि हर मेहनत सफल होगी 
फिल्मों से भी मैंने बहुत कुछ सीखा है। लक्ष्य फिल्म बनाने में मैंने बहुत मेहनत की। कई बार जब आप किसी काम के लिए पूरा परिश्रम करते हैं और इसके बावजूद वह सफल नहीं होता तो आपको दुख होता है। आपको लगता है कि उसे आपकी कोशिशों की वजह से ही पसंद कर लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। याद रखें, आपको कोशिश करने के मार्क्स नहीं मिलते। सराहना के लिए सफल परिणाम देने पड़ते हैं। इस असफलता को दिमाग से निकालने में मुझे बहुत वक्त लगा। इससे मैंने सीखा कि कामयाबी का कोई फॉर्मूला नहीं है। आपके हाथ में यही होता है कि आप अपना काम पूरे मन और मेहनत से करते रहें। असफलताएं आप को निराशाओं की ओर धकेलेंगी, लेकिन अाखिरकार आपको खुद ही उठना होगा और आगे बढ़ना होगा। 
 

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