जिनके पास हाईकोर्ट से अनुमति है, सिर्फ वही एग्जाम में बैठेंगे: MPPSC

MPPSC ने विगत फरवरी माह में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, नायब तहसीलदार जैसे लगभग 300 पदों के लिए एग्जाम कंडक्ट कराया था।

एजुकेशन डेस्क, ग्वालियर। एमपीपीएससी के एक फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में जाने वाले उम्मीदवारों को ही उसने मुख्य परीक्षा के लिए पात्र माना है। लेकिन जिन कैंडिडेट्स के साथ अन्याय हुआ और वे कोर्ट नहीं गए तो उन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने का मौका ही नहीं दिया। इससे उनमें असंतोष व्याप्त है। मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की दोहरी नीति के चलते राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2018 देने वाले सैकड़ों आवेदक परेशान हैं। इस परीक्षा में पांच प्रश्न कैंसिल करने और 10 प्रश्नों के उत्तर बदलने के बाद 322 आवेदक हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने इन आवेदकों के पक्ष में आदेश भी कर दिया है। इसके बाद अफसरों ने सिर्फ उन्हीं आवेदकों को मेंस में शामिल करने की प्रक्रिया की है, जो कोर्ट गए थे। लेकिन जो कैंडिडेट कोर्ट नहीं जा सके, उन्हें आयोग ने राहत नहीं दी है।

यह था मामला 

- एमपीपीएससी ने विगत फरवरी माह में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, नायब तहसीलदार जैसे लगभग 300 पदों के लिए परीक्षा आयोजित कराई थी। 
- परीक्षा की मॉडल आंसरशीट जारी होने के बाद आवेदकों ने दावे-आपत्तियां प्रस्तुत की थीं। इसकी प्रक्रिया के बाद एमपीपीएससी के अफसरों ने फाइनल आंसरशीट जारी की। इसमें पांच प्रश्न कैंसिल कर दिए गए और 10 प्रश्नों के उत्तर बदल दिए गए। - आवेदकों ने दोबारा आपत्ति जताई, लेकिन आयोग ने उस पर सुनवाई नहीं की। इसके चलते 322 आवेदक हाईकोर्ट चले गए। वहां मामले की सुनवाई होने तक आयोग ने कटऑफ मार्क्स के हिसाब से मेरिट में आए आवेदकों को आगामी 23 जुलाई से होने वाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए लिंक ओपन कर दी। 


322 उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था 
05 प्रश्न निरस्त करने की मांग की गई थी 
10 प्रश्नों के उत्तर बदलने के लिए गुहार लगाई 

 

कोर्ट के आदेश पर ही करेंगे शामिल 

हम मुख्य परीक्षा में उन्ही कैंडिडेट्स को शामिल करेंगे, जिनके लिए कोर्ट ने आदेश दिया है। कटऑफ मार्क्स में कम नंबरों से चूके अन्य कैंडिडेट्स को बिना कोर्ट ऑर्डर के मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। जहां तक इन 322 कैंडिडेट्स की बात है, तो संभव है कि फाइनल ऑर्डर पर वे इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएं।
- दिनेश जैन, डिप्टी सेक्रेटरी, एमपीपीएससी 

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