नई दिल्ली / कोविंद ने उच्च शिक्षा को नये सिरे से विकसित करने का किया आह्वान

अच्छे अनुवादकों तथा सामग्री की कमी भाषाओं का उपयोग बढ़ाने में बाधा

एजुकेशन डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश की शिक्षा व्यवस्था को 21 वीं सदी के अनुरूप बनाने के लिए उच्च शिक्षा को नए सिरे से विकसित करने तथा भारत को शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व का केंद्र बनाने का आह्वान किया है। श्री कोविंद ने बुधवार को यहां फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स (फिक्की) के 15 वें अंतर-राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए यह आह्वान किया।

सम्मेलन में 76 देशों के 1500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जिनमे 350 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि हैं। सम्मेलन में उच्च शिक्षा से संबंधित 160 प्रदर्शनियां लगाई गई है। श्री कोविंद ने कहा कि भारत मे उच्च शिक्षा का पुराना इतिहास है और नालंदा विश्विद्यालय के रूप में दुनिया का सबसे पुराना विश्विद्यालय रहा है जहां एशिया के दस हज़ार छात्र पढ़ते थे। आज पूरी दुनिया मे शिक्षा की सबसे बड़ी व्यवस्था भारत में है लेकिन 21 वीं सदी की जरूरतों को देखते हुए उसमे आमूल चूल परिवर्तन लाने की जरूरत है और इसके लिए नवाचार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतर अनुशासन के विषयों को एक साथ पढ़ाने एवं पाठ्यक्रमों में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

उन्होंने भारत को दुनिया मे शोध एवं अनुसंधान का केंद्र बनाने की भी अपील की। राष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा के विकास के लिए उद्योगपतियों से फंड जुटाने की अपील करते हुए दिल्ली आईआईटी में पूर्व छात्रों के कोष का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि किस तरह इन पूर्व छात्रों ने 250 करोड़ रुपये का कोष बना लिया है और उसका लक्ष्य एक अरब डॉलर करने का है। राष्ट्रपति ने देश की अर्थव्यस्था को मजबूत बनाने के लिए उच्च शिक्षा के इस्तेमाल पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक टूल्स के जरिये उच्च शिक्षा को कौशल विकास उद्यमशीलता उद्योग जगत के साथ प्रशिक्षण कार्य और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अपनाना होगा।

अच्छे अनुवादकों तथा सामग्री की कमी भाषाओं का उपयोग बढ़ाने में बाधा
सरकार ने बुधवार को कहा कि, वह देश की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को देश की सभी भाषाओं में कराने के लिए प्रयासरत है लेकिन प्रामाणिक सामग्री एवं उत्तम अनुवाद की कमी इस दिशा में एक बड़ी बाधा बनी हुई है जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में प्रश्नकाल में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आयी है तब से 1968 के राजभाषा अधिनियम को लागू करने का प्रयास कर रही है। इन पांच वर्षों में हिन्दी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग बहुत बढ़ा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार चाहती है कि निश्चय ही आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कीं जाएं लेकिन उसके लिए सामग्री भी उच्चस्तर की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उस स्तर के अनुवादकों की कमी है जिससे उच्च स्तरीय सामग्री उपलब्ध नहीं है। सरकार प्रयास कर रही है कि यह कमी दूर हो और अधिक से अधिक प्रामाणिक अनुवाद हो सके। 
--आईएएनएस

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