NEET 2018: रिजल्ट घोषित, 56% कैंडिडेंट्स क्वालिफाय

स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट cbseneet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं।

एजुकेशन डेस्कए नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए जरूरी प्रवेश परीक्षा नीट 2018 (NEET 2018) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। मानव संसाधन मंत्रालय विभाग के सचिव अनिल स्वरूप ने अपने ट्विटर ये जानकारी दी है। स्टूडेंट्स cbseresults.nic.in पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। प्रवेश परीक्षा 6 मई को आयोजित की गई थी जिसमें 13 लाख 26 हजार स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था।

 

13 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने दी NEET

- इस साल NEET एग्जाम में 13,26,725 से ज्यादा कैंडिडेट्स ने हिस्सा लिया। इसमें 7,46,076 फीमेल कैंडिडेट्स और 5,80,648 कैंडिडेट्स शामिल हैं। जबकि एक ट्रांसजेंडर कैंडिडेट ने भी NEET एग्जाम दिया था।
- इस एग्जाम के लिए देशभर के 136 शहरों में 2,225 एग्जाम सेंटर्स बनाए गए थे। बता दें कि एग्जाम का रिजल्ट 5 जून तक डिक्लेयर किया जा सकता है और इसी के बाद आगे की प्रोसेस शुरू होगी।

पिछले साल का कट-ऑफ
गौरतलब है कि, प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर CBSE रैंक देगा। 2017 में अनारक्षित श्रेणी के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटेज 50 प्रतिशत था और क्वालिफाइंग स्कोर 720 में 131 था। OBC/ SC/ ST श्रेणी के लिए यह स्कोर 107 था और क्वालिफाइंग पर्सेंटेज 40 प्रतिशत था। शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों के लिए स्कोर 118 था।

NEET एग्जाम से जुड़ी 3 बड़ी बातें

- साल 2016 से पहले तक मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) कहा जाता था। जिसमें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों की 15% एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों को भरा जाता था, जबकि बाकी की 85% सीटें स्टेट गवर्नमेंट अपने एंट्रेंस एग्जाम के जरिए भरती थी। इसके साथ ही प्राइवेट कॉलेज भी अलग से एंट्रेंस टेस्ट लेते थे।
- इतने सारे एग्जाम्स की जगह 2017 में NEET का कॉन्सेप्ट आया और इसी साल पहली बार देशभर में ये एग्जाम हुआ। इस एग्जाम के जरिए ही स्टूडेंट्स को प्राइवेट और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिलता है। 
- NEET एग्जाम के जरिए AIIMS, JIPMER और AFMC को छोड़कर बाकी सभी गवर्नमेंट और प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन मिलता है।


पहली बार 20 कोड में आया था पेपर

- इस साल देश के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 556 से कम नंबर पर ही ऑल इंडिया कोटे से एडमिशन मिल जाएगा। इसके साथ ही इस साल मार्क्स रेंज में भी गिरावट तय मानी जा रही है।
-  एक्सपर्ट के अनुसार इस साल का पेपर पिछले साल से आसान जरूर था, लेकिन कुछ पार्ट को काफी क्वालिटेटिव रखा गया। उधर, 2 से 3 सवालों में बोनस की उम्मीद की जा सकती है। इस कारण सीबीएसई के पास काफी आपत्तियां जा सकती हैं। 
- पिछले साल ऑल इंडिया कोटे से 556 नंबर आने पर सरकारी कॉलेजों में एडमिशन मिला था।
- पहली बार पेपर 20 कोड में आया है। पिछले साल 12 कोड में ही पेपर आया था। 

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इस साल देशभर के लगभग 12 लाख कैंडिडेट्स एग्जाम में अपीयर हुए जिसमें से लगभग 7 लाख कैंडिडेट्स ने एग्जाम क्वालिफाय किया।

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