एनसीईआरटी / अब कक्षा के अनुसार छात्रों की परखी जाएगी योग्यता

एनसीईआरटी ने एलिमेंट्री एजुकेशन के लिए एक लर्निंग आउटकम मॉड्यूल किया तैयार

एजुकेशन डेस्क। किसी भी क्लास में बच्चे ने क्या सीखा इस बात को परखने के लिए एक्जाम में पास होना ही अब तक बैंचमार्क माना जाता है, लेकिन इस एजुकेशन पैटर्न को फॉलो करते हुए यह इनश्योर नहीं किया जा सकता है कि वाकई में बच्चे ने अगली क्लास में प्रमोट किया जाए, उतना सीखा भी है या नहीं। यही वजह है कि क्वालिटी एजुकेशन और लेवल ऑफ एजुकेशन बेहतर करने के लिए हाल ही में एनसीईआरटी ने एलिमेंट्री एजुकेशन के लिए एक लर्निंग आउटकम मॉड्यूल तैयार किया है। 

इसमें पहली से 8वीं क्लास तक हर बच्चे को उसके सभी सब्जेक्ट से जुड़ी कितनी बेसिक नॉलेज होनी चाहिए, यह बताया गया है। खास बात यह है कि बच्चों को इस लर्निंग आउटकम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सिर्फ टीचर की नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी टीचर के साथ पैरेंट्स और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी व कम्युनिटी मेंबर्स की भी होगी। इस मॉड्यूल पर शहर के एजुकेशनिस्ट से सिटी भास्कर ने जाना कि आखिर सीबीएसई एलिमेंट्री एजुकेशन में किस तरह के बदलाव करने जा रही है। 


स्कूलों को करनी होगी इस तरह की पहल 

- मीनिंगफुल और जॉय फुल लर्निंग के लिए टीचर्स लर्निंग आउटकम डॉक्यूमेंट्स को प्रैक्टिस में लाएं। 
- टेक्स्ट बुक को ही संपूर्ण करिकुलम न मानकर उसी तक सीमित न रहें, बल्कि अलग-अलग करिकुलम एरिया को भी एक्सप्लोर कर बच्चे को लर्निंग आउटकम तक पहुंचाने की कोशिश करें। 
- पैरेंट्स को भी जागरूक करें ताकि बच्चे को उन क्लासेस के हिसाब से जरूरी कॉम्पिटेंसी लेवल को बताने वाले कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेने के लिए भेजें। हर साल पैरेंट्स-टीचर्स मीट भी करें। 
- प्रिंसिपल स्कूल में वार्षिक प्लान बनाने में मदद करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी क्लासेस के लिए टीचर्स ऐसा ही प्लान बनाएं। 
- प्रिंसिपल यह भी सुनिश्चित करेंगे कि टीचर्स ने जो एनुअल प्लान बनाया है, वे इफेक्टिवली इम्प्लीमेंट किया जा रहा है या नहीं। 
- हर स्कूल को टीचर्स के लिए तीन दिन का इन हाउस ट्रेनिंग प्रोग्राम करना होगा, जिससे टीचर्स अपनी प्लानिंग को बेहतर और पुख्ता कर सकें। 
- स्कूल के असेसमेंट का तरीका भी इसी लर्निंग आउटकम पर केंद्रित होना चाहिए। 
- आर्ट, हेल्थ, फिजिकल, लाइफ स्किल्स और वैल्यू एजुकेशन भी इस करिकुलम में जरूर शामिल करें। 
- स्कूल मैनेजमेंट और प्रिंसिपल, टीचर्स को ट्रेनिंग देंगे कि लर्निंग आउटकम डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किस तरह से करें। 

तय हुआ छात्र को कितनी जानकारी होना है जरूरी 
- काउंसलर डॉ. दीप्ति गौड़ ने बताया कि अब तय कर दिया गया है कि पहली क्लास में पढ़ रहे बच्चे को हिंदी, अंग्रेजी, गणित में कम से कम कितना आना जरूरी है। जैसे पहली क्लास में के बच्चे को लिखा दिया गया है कि मेरा नाम विमला है, तो इसके हर अक्षर को वह पहचाने। पूछा जाए कि 'म' कहां है, तो वह 'म' पर अंगुली रखकर बता सके। अपने आस-पास मौजूद प्रिंट के अर्थ का अनुमान लगा सके, जैसे टॉफी के कवर पर लिखे नाम को टॉफी, लॉलीपॉप या चॉकलेट बता सके।

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