NCERT/ प्ले स्कूल के स्तर से ही लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने की शुरुआत होनी चाहिए

शिक्षक लड़कों और लड़कियों पर समान रूप से ध्यान दें

एजुकेशन डेस्क। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कहा कि लैंगिक रूढ़ियों को प्राथमिक-स्कूल के स्तर पर ही खत्म किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे जब बड़े हों तो वे लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करें। संस्था ने प्राथमिक-स्कूल शिक्षा के लिए दिशा-निर्देशों में ‘लैंगिक समानता’ की सिफारिश की है। संस्था ने स्कूलों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि शिक्षक लड़कों और लड़कियों पर समान रूप से ध्यान दें, उन्हें सम्मान और समान अवसर दें। इसके अलावा लैंगिक भेदभाव किए बगैर लड़के एवं लड़कियों दोनों से समान रूप से अपेक्षाएं रखें। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘स्कूलों को ऐसी किताबों, नाटकों और अन्य गतिविधियों का चयन करना चाहिए जो लैंगिक पक्षपात से मुक्त हों।’ अधिकारी के मुताबिक ‘शिक्षकों को ऐसी कहानियों, गीतों, गतिविधियों का उपयोग करना चाहिए जो लड़कियों एवं लड़कों के साथ विशेष जरूरतों वाले बच्चों को सभी पेशों में समान रूप से पुरुष एवं महिला के तौर पर चित्रित करते हों।

निजी शिक्षा क्षेत्र में मातृत्व अवकाश देने वाला  देश का पहला राज्य बना केरल
केरल निजी शिक्षा के क्षेत्र में मातृत्व अवकाश का फायदा देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इससे राज्य में निजी शिक्षा सेक्टर में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह ही 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिल सकेगा।केरल को इस संबंध में अधिसूचना जारी करने के लिए केंद्र से अनुमति भी मिल गई है। इस बदलाव का फायदा गैर अनुदान प्राप्त संस्थानों को भी मिलेगा। राज्य सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछली 29 अगस्त को राज्य कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी और इसे केंद्र के पास अनुमति के लिए भेजा गया था।

नए नियम के तहत नियोक्ताओं को अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को 1000 रुपए मेडिकल खर्च के रूप में भी देना होंगे। सरकार ने कहा है कि गैर अनुदान प्राप्त संस्थाओं में काम कर रहे शिक्षकों के न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के कर्मचारी लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों की तरह मातृत्व अवकाश की मांग कर रहे थे। 
 

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