जड़ों से मेरा जुड़ाव ही मेरे काम को निखारता है - भूमि पेडनेकर

पहली ही फिल्म के लिए कई अवॉर्ड जीतने वाली यह अभिनेत्री अभी-भी खुद को स्ट्रगलर ही मानती हैं

First Person। बचपन में मैं और मेरी बहन अक्सर बहुत देर तक मां के साथ बैठकर बातें करते रहते थे। इन्हीं बातों के दौरान एक बार मैंने मां को बता दिया था कि मैं एक्ट्रेस बनना चाहती हूं। मैं अचानक ही इस लाइन में आ गई, ऐसा नहीं है, लेकिन हां यह जरूर है कि जो रास्ता मैंने अपनाया वह अलग जरूर था। मेरे पास लंदन जाकर आगे की पढ़ाई करने का मौका था, लेकिन मुझे पता था कि मेरी मंजिल कहां है। शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के लिए मैंने असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर यशराज फिल्म्स को जॉइन किया। यशराज फिल्म्स के साथ काम करना फिल्म स्कूलिंग जैसा अनुभव था। वहां से मैंने बहुत कुछ सीखा और आगे चलकर एक फिल्म के लिए ऑडिशन देकर मैंने फिल्मों में कदम रखा।

पूरा होमवर्क और रिसर्च वर्क करना जरूरी है
बचपन में छुट्टियों के दौरान हम जहां छोटे शहरों में हमारे रिश्तेदारों के यहां जाते थे, वहीं मेरे दोस्त विदेश घूमने जाया करते थे, तो उस समय हमें बुरा महसूस होता था, लेकिन अब लगता है कि छोटे शहरों में मैंने जो दोस्त बनाए और दुनिया देखी, उसी ने मुझे अपनी जड़ों से जोड़े रखा। अपने काम में अब तक मैंने जाे सफलता पाई है और जो रोल्स निभाए उसकी एक वजह यह भी थी कि मैं बचपन से ही अलग-अलग जगहों और लोगों से मिलने का अनुभव करती आई हूं। मेरी सफलता की एक वजह यह भी रही कि मैं एक एक्टर के तौर पर अपने रोल को निभाने के लिए काफी होमवर्क करती हूं। मैं उस रोल से संबंधित काफी रिसर्च करती हूं। यह बात एक्टिंग ही नहीं, जीवन में भी हर काम में लागू होती है।
 
कम्फर्ट जोन को लगातार तोड़ते रहना होगा
मेरे लिए क्वालिटी ज्यादा मायने रखतीे है। सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब मैं देखती हूं कि अब मैं अपनी कला को समझने लगी हूं। इससे मुझे लगता है कि मैंने जो समय अपने काम को दिया वह खराब नहीं हुआ। किसी को भी सफल होने के लिए अपने आपको कम्फर्ट जोन से बाहर धकेलना ही पड़ेगा। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो कुछ नया कर पाने की उम्मीद खत्म हो जाएगी। लोग निश्चित तौर पर इस बात पर गौर करते हैं कि आप चुनौतियां लेने वाले इंसान हैं या नहीं। फिल्म चुनने और उनकी प्रक्रिया से मैंने सीखा है कि आपको न कहना जरूर आना चाहिए, क्योंकि अगर आप सही समय पर न नहीं कह पाएंगे, तो इसका असर आपके काम और जीवन, दोनों पर पड़ेगा जिसे मिटाना संभव नहीं होगा।

मैं खुद अपनी आलोचक
सबसे खास बात यह है कि एक बार आप जब भी कुछ करने के लिए तय कर लें, तो उसके लिए अपनी ओर से पूरी तैयारी कर लें। इससे न सिर्फ आप वह काम अच्छी तरह से कर पाएंगे, बल्कि आप बहुत हद तक अपना समय व्यर्थ होने से भी बचा पाएंगे। मेरी कुछ फिल्मों को सफलता मिलने के बाद भी मुझे नहीं लगता कि मेरा स्ट्रगल खत्म हो गया है। इसकी वजह यह है कि मैं खुद को लेकर काफी क्रिटिकल हूं। इसके साथ ही मुझे लगता है कि मैं इससे भी कहीं बेहतर परफॉर्म कर सकती हूं। एक आलोचक के रूप में मैं हमेशा ही अपने काम की आलोचना करती हूं और देखती हूं कि सुधार की गुंजाइश कहां बाकी है।
 

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