मध्य प्रदेश / 26 सवाल हल किए, नंबर जुड़े 25 के, इससे रिजल्ट प्रभावित हुआ

हाईस्कूल व हायर सेकंडरी की काॅपियां जांचने में लापरवाही उजागर

एजुकेशन डेस्क। प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की भले ही लाख कोशिश कर ले, लेकिन मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) का रवैया सुधर ही नहीं पा रहा है। इस बार भी हाईस्कूल व हायर सेकंडरी के स्टूडेंट्स की कॉपियों के मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी उजागर हुई है। यहां पर हालात यह हैं कि हायर सेकंडरी की एक छात्रा ने गणित विषय में 26 सवालों के जवाब दिए, लेकिन 25 प्रशन के अंक जोड़े गए। 26वें नंबर के प्रश्न के 5 अंक जोडे ही नहीं। इससे रिजल्ट प्रभावित हुआ। 

वहीं, हाईस्कूल के एक छात्र काे अंग्रेजी के पेपर में 100 में से 28 अंक दे डाले, जबकि पेपर कुल 80 अंकाें का था। गड़बड़ी की वजह से ही इस बार 63 हजार 141 परीक्षार्थियों ने री टोटलिंग कराई और 10 हजार स्टूडेंट्स ने आंसर काॅपी मांगी। मंडल ने इस बार 15 मई काे हाईस्कूल व हायर सेकंडरी का रिजल्ट एक साथ घोषित किया था। इस बार हायर सेकंडरी का रिजल्ट 73.37 फीसदी रहा, जबकि हाईस्कूल का 61.32 प्रतिशत रहा। 10वीं में 63.69 फीसदी छात्राएं और 59.15 प्रतिशत छात्र पास हुए थे। 12वीं में 76.31 फीसदी छात्राएं और 68.94 प्रतिशत छात्र पास हुए थे। विभाग ने दावा किया था कि इस बार रिजल्ट सुधरा है।

गड़बड़ियां ऐसी - ऐसी : अंकों की टेबल में जोड़े ही नहीं गए नंबर

  • राधिका साेलंकी को 12वीं की परीक्षा में गणित विषय में प्रश्न-19 में 5 अंक दिए गए हैं। सवाल कुल 4 अंक का था। प्रश्न नंबर 26 में 5 अंक दिए लेकिन अंकाें की टेबल में यह 5 नंबर नहीं जाेड़े गए।
  • 10वीं के छात्र जितेंद्र जाधव काे 100 में से 28 नंबर दे दिए, जबकि पेपर कुल 80 नंबर का था। रीटोटलिंग कराई ताे नंबर 28 ही मिले, लेकिन मार्कशीट पर 23 ही अंकित किए। 

  • गडबड़ी की खास वजह : 

शिक्षा विभाग के पास गणित, अंग्रेजी और साइंस विषय के शिक्षकाे की कमी है। जितने बचे थे उन शिक्षकों की उनकी चुनाव में और लाेकल लेवल की परीक्षा में ड्यूटी लगाई गई थी। इसी वजह से करीब 60 फीसदी प्राइवेट स्कूलाें के टीचर्स से यह मूल्यांकन कराया गया। इसके लिए इन्हें 30 अप्रैल तक का वक्त दिया गया था। निजी स्कूलाें के इन शिक्षकाें काे वेतन वृद्धि रुकने, नाेटिस मिलने या काेई सरकारी कार्रवाई के दायरे में नहीं अाते, इसलिए ज्यादतर शिक्षक जल्दबाजी में यह काम निपटाते हैं। इसी कारण एेसी गड़बड़ी हाे रही है।

तय प्रावधान के मुताबिक दोषियों पर लगेगा जुर्माना
बताैर पेनाल्टी 100 रुपए प्रति अंक मूल्यांकनकर्ता, डिप्टी हेड, और हेड वेल्युअर से लिए जाने का प्रावधान है। अभी मैरिट लिस्ट अस्थाई है। फाइनल बाद में जारी हाेगी। पुनर्गणना कराने पर अंक बढ़ते हैं ताे मैरिट के लिहाज से स्टूडेंट्स का नुकसान नहीं हाेगा। - शीला दाहिमा, अतिरिक्त सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल 

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