ऑर्गनाइज्ड रिटेल के क्षेत्र मे मिलेंगे दस लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

देश की रिटेल इंडस्ट्री की कुल जीडीपी में करीब 10 फीसदी की हिस्सेदारी है।

एजुकेशन डेस्क। टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के दौर में शॉपिंग युवाओं के शौक के रूप में बन कर उभरा है। मॉल कल्चर के बाद ई-कॉमर्स वेबसाइट ने इसे नया रूप दिया है। यही कारण है कि विश्वभर में रिटेल सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। भारत में भी स्थिति इससे कुछ अलग नहीं है। हाल ही में सरकार ने सिंगल रिटेल ब्रैंड में 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी है। इससे रिटेल सेक्टर को तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। रिटेल सेक्टर रोजगार का एक बड़ा जरिया है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में जॉब के मौके बढ़ेंगे। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में रोजगार के दस लाख से ज्यादा अवसर हैं। ऐसे में यह करियर का एक विकल्प हो सकता है।

 

रिटेल सेक्टर की जीडीपी में 10 फीसदी की हिस्सेदारी 

- देश की रिटेल इंडस्ट्री की कुल जीडीपी में करीब 10 फीसदी की हिस्सेदारी है।
- वहीं देशभर के कुल रोजगार में 8 फीसदी इस क्षेत्र में ही मिलते हैं।
- एक रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र 2026 तक सालाना 10 फीसदी की दर से बढ़कर 16 खरब डॉलर की हो जाएगी।
- 2016 में रिटेल इंडस्ट्री का बाजार करीब 641 अरब डॉलर था। वहीं अप्रैल, 2000 से लेकर जून, 2017 तक इसमें करीब 1 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुअा है। अागे भी इस क्षेत्र में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं। 

 

किसी भी बैकग्राउंड के छात्र बना सकते हैं करियर 

- किसी भी शैक्षणिक बैकग्राउंड के छात्र इसमें करियर बना सकते हैं। हालांकि अच्छे पदों पर जॉब के लिए एमबीए या पीजीडीएम करना जरूरी होता है।
- देशभर के विभिन्न संस्थानों में रिटेल मैनेजमेंट के स्पेसिफिक कोर्स भी कराए जाते हैं। किसी भी स्ट्रीम से बैचलर डिग्री करने के बाद रिटेल मैनेजमेंट के एमबीए या पीजीडीएम कोर्स में प्रवेश लिया जा सकता है।
- इसी प्रकार रिटेल मार्केटिंग का भी कोर्स भी संचालित किया जाता है। एमबीए या पीजीडीएम कोर्स में प्रवेश कैट, ज़ैट, मैट, सीमैट या एटीएमए के वैलिड स्कोर, ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर मिलता है। हालांकि कुछ संस्थान खुद का एंट्रेंस टेस्ट भी आयोजित करते हैं। - - वहीं छात्र फैशन मर्केंडाइजिंग या फैशन रिटेल मैनेजमेंट का भी कोर्स कर सकते हैं। इसके कोर्स अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों स्तर पर संचालित किए जाते हैं। 

 

डिग्री के साथ स्किल भी जरूरी
 
- रिटेल सेक्टर में करियर बनाने के लिए डिग्री के साथ-साथ कम्युनिकेशन स्किल की भी जरूरत होती है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इस क्षेत्र में ज्यादातर समय सीधा ग्राहकों से सवांद करना होता है।
- यह करियर ग्राेथ के लिए भी जरूरी है। कस्टमर रिटेल एसोशिएट से लेकर स्टोर मैनेजर और वर्चुअल मर्केंडाइजर जैसे पदों पर जॉब के मौके होते हैं।
- इसके अलावा ये प्राफेशनल बतौर लॉजिस्टिक्स एंड वेयर हाउस मैनेजर और रिटेल मार्केट एग्जीक्यूटिव भी जॉब कर सकते हैं। 

 

2 लाख रुपए तक का शुरुआती सालाना पैकेज 

- इस क्षेत्र में शुरुआत में औसतन 15 हजार रुपए का सैलरी पैकेज मिल सकता है। लेकिन एमबीए या पीजीडीएम जैसे स्पेशिफिक कोर्स करने के बाद बड़े ब्रैंड्स में अच्छे पदों पर जॉब मिलने की संभावना होती हैं और यहां पैकेज भी ज्यादा होता है।
- मल्टीनेशनल कंपनियों में शुरुआत में ही 20 से 25 हजार रुपए प्रति माह तक सैलरी मिल सकती है। हालांकि एक से दो वर्ष के अनुभव के बाद पैकेज में 30 से 40 फीसदी का इजाफा होने की संभावना होती है। 

 

नौकरियों के मौके और जरूरी योग्यता 

रिटेल सेक्टर बेहद व्यापक क्षेत्र है। इसमें कई सब-सेक्टर हैं। सेल्स पर्सन, सेल्स एसोसिएट, स्टोर मैनेजर, रिटेल मैनेजर जैसे पदों पर हर सब-सेक्टर को जरूरत है। 

सेल्स पर्सन- रिटेल सेक्टर में किसी प्रोफेशनल की प्रारंभिक पोस्टिंग सेल्सपर्सन के रूप में होती है। ये कंपनी के फर्स्ट लाईन ऑफ पब्लिक इंटेरेकशन कहे जा सकते हैं। कंपनी के उत्पादों को उसकी गुणवत्ता से आगे ले जाकर पेश करना इनका दायित्व होता है। सेल्स एसोसिएट, सेल्स मैनेजर, डिपार्टमेंट मैनेजर के लिए इंटरमीडियट पास की ही जरूरत होती है परंतु ग्रेजुएट्स को प्राथमिकता दी जाती है। 

स्टोर मैनेजर- बोलचाल की भाषा में इन्हें जनरल मैनेजर या स्टोर मैनेजर कहा जाता है। कार्यशैली के हिसाब से यह बेहद जिम्मेदारी वाला पद होता है। स्टोर की पर्फार्मेंस के लिए बहुत हद तक इनकी ही जिम्मेदारी होती है। 

रिटेल मैनेजर- एक रिटेल मैनेजर का कार्य आउटलेट के लिए प्लान तैयार करने से लेकर कोऑर्डिनेशन तथा ऑपरेशन आदि है। रिटेल ऑर्डर एवं स्टॉक की मॉनीटरिंग, एम्प्लाई की रिपोर्ट तैयार करने का काम इस सेक्शन के अंतर्गत आता है। एमबीए कर चुके छात्र रिटेल मैनेजर के रूप में करियर स्टार्ट कर सकते हैं। 

रिटेल बायर्स एवं मर्चेडाइजर- ये रिटेल के सामान तय करने तथा उन्हें खरीदने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें कस्टमर की समझ, ट्रेंड व मार्केट की जानकारी होनी जरूरी है। 

विजुअल मर्चेडाइजर- यही वे लोग होते हैं जो ब्रांड को आकार देते हैं। एक मार्डन कंज्यूमर की साइकोलॉजी को समझ कर उसका डिजाइन व कॉन्सेप्ट तैयार करने से लेकर कंप्लीट लेआउट तैयार करते हैं। बिहार में रिटेल सेक्टर के विस्तार से विजुअल मर्केंडाइजिंग की मांग भी बढ़ी है। शॉपिंग मॉल्स, फाइव स्टार होटल, बुटीक और रिटेल आउटलेट में विजुअल मर्केंडाइजर की मांग रहती है। किसी भी स्ट्रीम से बारहवीं कर चुके छात्र विजुअल मर्केंडाइजिंग के डिप्लोमा या बैचलर कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। 
 

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