अल्पसंख्यक कॉलेजों को काउंसलिंग की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य

उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश। आधार कार्ड, 10वीं, 12वीं की मार्कशीट के साथ टीसी की फोटो कॉपी जरूरी

एजुकेशन डेस्क। उच्च शिक्षा विभाग ने अल्पसंख्यक कॉलेजों से कहा है कि एडमिशन लेने वाले हर छात्र की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करें। ऑनलाइन एडमिशन वाले कॉलेजों को हर काउंसलिंग के बाद पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना होती है कि कुल कितने एडमिशन हुए और कितनी सीटें खाली हैं। अब अल्पसंख्यक कॉलेजों को भी यही करना होगा। आखिर में सारे एडमिशन की पूरी सूची पोर्टल पर अपलोड होगी, लेकिन इस दौरान जिन छात्रों के टीसी या आधार और 10वीं-12वीं की मार्कशीट की कॉपी सहित अन्य दस्तावेज की जानकारी नहीं होगी उनका एडमिशन पक्का नहीं माना जाएगा। जिन छात्रों के नाम राज्य शासन के पास पोर्टल पर होंगे, उन्हें ही यूनिवर्सिटी परीक्षा में बैठाएगी। 

21 जून को पहली सूची पोर्टल पर देना होगी 
ऑनलाइन एडमिशन की प्रक्रिया में 9 जून तक रजिस्ट्रेशन होंगे। जबकि 14 जून को पहली सूची जारी होगी। इसमें जिन छात्रों को पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन मिलेगा उन्हें 15 से 20 जून तक संबंधित कॉलेज में दस्तावेज और फीस जमा करना। कॉलेजों को 21 जून तक पहली सूची पोर्टल पर अपलोड करना है। अल्पसंख्यक कॉलेजों के लिए भी यह बाध्यता रहेगी। 

सीएलसी के बाद अल्पसंख्यक कॉलेजों में भी बंद हो जाएंगे एडमिशन 
जहां ऑनलाइन प्रक्रिया है वहां खाली सीटों के लिए सीएलसी (कॉलेज लेवल काउंसलिंग) भी होगी। 4 अगस्त को सूची जारी होगी। इसके बाद छात्र फीस व दस्तावेज 6 से 8 अगस्त तक जमा कर सकेंगे। 7 तक सूची अपलोड करना होगी। वहीं अल्पसंख्यक कॉलेजों को भी अंतिम सूची इसी दौरान अपलोड करना होगी। अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त कॉलेजों को इसके निर्देश शासन की तरफ से भेजे गए हैं। इनमें चार गुजराती कॉलेज, इंदौर क्रिश्चियन, जैन दिवाकर, अरिहंत कॉलेज, रेनेसा, कोठारी, आईआईएल, एलिक्जिया, इस्बा, विशिष्ट और शामिल हैं। वहीं ऑनलाइन कॉलेजों में होलकर साइंस, जीएसीसी, दोनों जीडीसी, निर्भय सिंह पटेल और गवर्नमेंट लॉ सहित सभी सरकारी और प्रक्रिया में शामिल निजी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों को भी हर काउंसलिंग के बाद सूची अपलोड करना होगी। 

सीईटी : रिजल्ट पर आपत्ति के बाद परीक्षार्थियों को दिखाएंगे आंसरशीट, दो हजार देना होगी फीस 
छात्र नेताओं ने कहा- जांच हो, ताकि पता चले इतने कम नंबर क्यों 
इंदौर | देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की सबसे प्रतिष्ठित सीईटी (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) एक बार फिर विवादों में है। हालांकि विवाद शुरू होते ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इसका समाधान निकालने का दावा किया है। रिजल्ट में गड़बड़ी और कुछ विद्यार्थियों को कम अंक दिए जाने की शिकायत सामने आने के बाद एक तरफ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन की तैयारी की है, वहीं दूसरी तरफ प्रबंधन ने कहा कि 5 जून तक छात्र 2 हजार रुपए फीस के साथ स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी में आवेदन कर सकते हैं। इधर, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस ने यूनिवर्सिटी से मामले की जांच की मांग की है। कहा है कि यह पता चलना चाहिए कि छात्रों को कम अंक क्यों आए। इसके पीछे क्या घोटाला है। बताते हैं कि पांच छात्रों ने कम अंक दिए जाने की शिकायत की थी। लेकिन बवाल मचने के बाद अब यूनिवर्सिटी पूरे मामले में पारदर्शिता की बात कह रही है। 

मेरिट लिस्ट पर उठे थे सवाल 
सीईटी का रिजल्ट शुक्रवार देर रात घोषित किया गया था। मेरिट लिस्ट जारी नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। परीक्षा 22 मई को देशभर के 27 शहरों में आयोजित हुई थी। दो शिफ्ट में परीक्षा हुई थी, जिसमें 8217 और 7420 विद्यार्थी शामिल हुए थे। यूनिवर्सिटी के आईएमएस आईआईपीएस, स्कूल ऑफ लॉ, कॉमर्स, फॉर्मेसी, इकोनॉमिक्स, एसजेएमसी और ईएमआरसी सहित लगभग डेढ़ दर्जन विभागों में एडमिशन के लिए यह परीक्षा हुई थी। इस बार 48 कोर्स की 2653 सीटों के लिए परीक्षा हुई। सीईटी चेयरमैन डॉ. अनिल कुमार के अनुसार रिजल्ट में गड़बड़ी का सवाल नहीं उठता। जिन छात्रों को आपत्ति है, वे अपनी कॉपी देख सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट पर निर्देश अपलोड कर दिए गए हैं। 

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