MHRD/ नौकरी से पहले आसानी से होगा छात्रों के एकेडमिक रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन

फर्जी सर्टिफिकेट पर लगेगी रोक, 30 तक नि:शुल्क होंगे छात्रों के रजिस्ट्रेशन

नैड योजना - राष्ट्रीय स्तर पर एमएचआरडी कर रहा डाटाबेस तैयार, प्रदेश के 51 इंस्टीट्यूट जुड़े

एजुकेशन डेस्क।
 मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने राष्ट्रीय स्तर का एकेडमिक रिकाॅर्ड का डाटाबेस तैयार किया है। इसमें हर छात्र के स्कूल से लेकर कॉलेज, यूनिवर्सिटी सहित प्रोफेशनल कोर्स के सर्टिफिकेट होंगे। इसके लिए नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (नैड) योजना तैयार की गई है। इससे जुड़ने वाले शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों को नौकरी या अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रमाणपत्र साथ लाने व ले जाने की झंझट भी नहीं होगी, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर तैयार इस डाटाबेस से फर्जी सर्टिफिकेट पर रोक लगेगी।

सबसे अहम बात यह है कि मैन्युअली तौर पर कराए जाने वाली वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में जहां एक से दो महीने और कई बार इससे भी अधिक समय लग जाता है, अब इस व्यवस्था से तत्काल वेरिफिकेशन हो सकेगा। हालांकि, अभी इसकी शुरुआत धीमी गति से चल रही है, इसलिए 30 अगस्त तक की स्थिति में देशभर के 579 शैक्षणिक संस्थानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। मप्र की बात करें तो 51 सरकारी और निजी संस्थान ही शामिल हो सके हैं, लेकिन सरकारी संस्थाएं इसमें स्टूडेंट्स का डाटा अपलोड करने में धीमी गति से चल रहे हैं, वहीं स्टूडेंट्स की रजिस्ट्रेशन की संख्या भी कम है। जबकि, 30 सितंबर तक यह सुविधा फ्री में उपलब्ध रहेगी।

असमंजस...इससे जुड़ने के बाद विवि को कितना पैसा मिलेगा, स्पष्ट नहीं
इसके लिए दो एजेंसी एनएसडीएल और सीडीएसएल राष्ट्रीय डाटाबेस सिस्टम से वेरिफिकेशन और एकेडमिक रिकॉर्ड के संचालन का काम देख रही हैं। भोज मुक्त विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एचएस त्रिपाठी का कहना है कि यह योजना महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि देशभर के संस्थानों के छात्रों का एकेडमिक रिकॉर्ड एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, लेकिन वर्तमान में कुछ बातें स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि कोई विश्वविद्यालय सत्यापन की प्रक्रिया के लिए 200 रुपए लेता है। इससे विवि को आमदनी होती है, लेकिन इस व्यवस्था से जुड़ने के बाद उसे कितनी राशि मिलेगी, यह बात स्पष्ट नहीं है।

विवि के सामने चुनौती…
विश्वविद्यालयों के पास बीते कुछ वर्षों का ही डेटा डिजिटलाइज्ड रूप में है, जिसे वे नैड में अपलोड कर पा रहे हैं, लेकिन विवि व संस्थाओं के सामने मार्कशीट, डिग्री, ट्रांसस्क्रिप्ट, प्रोविजनल मार्कशीट सहित सभी एकेडमिक सर्टिफिकेट के लिए पुराने वर्षाें के डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में नए सत्रों में पासआउट होने वाले छात्रों को ही लाभ मिल सकेगा।

इसके लिए काम करने वाली एक एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि इसके लिए इंस्टीट्यूट्स से अनुबंध करा रहे हैं, लेकिन सरकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज इसमें धीमी गति से कार्य कर रहे हैं। ऐसा इसलिए भी हो रहा क्योंकि इनके पास स्टाफ और कंप्यूटर नहीं है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी भी बार-बार बदलते रहते हैं, इसलिए भी परेशानी आती है।

ऐसी होगी प्रक्रिया 
विभिन्न कंपनियां या संस्थाएं नौकरी देने से पहले छात्रों का पूरा एकेडमिक रिकॉर्ड उसके यूआईडी नंबर के माध्यम से उसकी अनुमति के बाद चैक कर सकती हैं। कर्मचारी या छात्र की ईमेल आईडी पर वेरिफिकेशन लिंक जाएगी। इसे वेरिफाई करने के बाद नियोक्ता कंपनी को सर्टिफिकेट देखने का अधिकार मिल जाएगा।

8,23,435 रजिस्टर्ड छात्रों की संख्या

4,94,10,292 रिजल्ट अवॉर्ड अपलोड

202- वेरिफिकेशन कराने वालों की संख्या

http://nad.gov.in से अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। (30 अगस्त की स्थिति)

इंस्टीट्यूट को फायदा

  • सभी शैक्षणिक दस्तावेजों का डिजिटल रूप में स्थाई और सुरक्षित रिकॉर्ड रखा जा सकता है। 
  • डुप्लीकेट दस्तावेज जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • सभी शैक्षणिक दस्तावेज को एनएडी द्वारा सत्यापित किया जा सकता है।

स्टूडेंट्स को राहत

  • शैक्षणिक संस्थान द्वारा अपलोड करने पर
  • अकादमिक दस्तावेजों की तत्काल उपलब्धता।
  • ऑनलाइन, अकादमिक दस्तावेजों का स्थाई रिकॉर्ड।
  • दस्तावेजों के खोने, नुकसान पहुंचाने का कोई जोखिम नहीं।

कंपनियों को लाभ

  • छात्र की पूर्व सहमति के साथ शैक्षणिक दस्तावेजों का ऑनलाइन, त्वरित व विश्वसनीय सत्यापन। 
  • अकादमिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति तक पहुंच। 
  • नकली और जाली प्रमाणपत्रों का कोई जोखिम नहीं। 
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