परीक्षा में मेडिकल स्टूडेंट अब हिंदी में भी लिख सकेंगे आंसर,आयुष ने बनाया प्रस्ताव 

कई बार प्रश्नों के उत्तर जानते हुए भी स्टूडेंट्स सही तरीके से जवाब नहीं लिख पाते। इस वजह से वे अंग्रेजी माध्यम के स्टूडेंट्स से पिछड़ जाते हैं। 

एजुकेशन डेस्क। मेडिकल के साथ डेंटल स्टूडेंट को डॉक्टरी की परीक्षा में आंसर हिंदी में लिखने की छूट देने की तैयारी चल रही है। आयुष विवि ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही कार्य परिषद की बैठक में इसे मंजूरी मिलने की संकेत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हिंदी में आंसर देने की व्यवस्था लागू होने से हिंदी माध्यम वाले स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी। मेडिकल व डेंटल में अभी तक पढ़ाई व परीक्षा देने का माध्यम अंग्रेजी रहा है। इससे हिंदी माध्यम में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को परेशानी होती है। कई बार प्रश्नों के आंसर जानते हुए भी वे सही तरीके से जवाब नहीं लिख पाते। इस वजह से वे अंग्रेजी माध्यम के स्टूडेंट्स से पिछड़ जाते हैं। 

25 से 30 प्रतिशन स्टूडेंट्स होंगे प्रभावित 
- एक सर्वे के अनुसार प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में सीजी बोर्ड के 25 से 30 प्रतिशत स्टूडेंट्स का चयन होता है। यानी इतने स्टूडेंट्स आयुष के इस फैसले से प्रभावित होंगे। 
- आंसर हिंदी में लिखने की व्यवस्था लागू करने के बाद विद्यार्थियेां को परेशानी नहीं होगी। विवि के अधिकारियों ने बताया कि स्टूडेंट्स के पास आंसर लिखने का विकल्प होगा। चाहे तो वे हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषा में आंसर लिख सकते हैं। 
- टेक्नीकल व वैज्ञानिक शब्द हिंदी में उपलब्ध नहीं होने पर वे अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं। यही नहीं मौखिक व प्रायोगिक परीक्षा में भी हिंदी में जवाब देने की छूट की तैयारी है। वैज्ञानिक आधार पर उनका आंसर सही है तो अंक नहीं काटे जाएंगे। 

अपने तरह के पहले प्रस्ताव को जल्द ही कार्य परिषद में मंजूरी मिलने के आसार 

मध्यप्रदेश में पिछले माह लागू 
- मप्र आयुर्विज्ञान विवि जबलपुर ने पिछले माह एमबीबीएस, बीडीएस के अलावा बीएएमएस, बीएचएमएस, के अलावा नर्सिंग, यूनानी, योगा व नेचुरोपैथी में हिंदी माध्यम में लिखने का नियम लागू कर दिया है। 
- विवि के कुलपति डॉ. रविशंकर शर्मा ने कहा है कि स्टूडेंट्स के हित व राष्ट्रभाषा हिंदी को व्यापक महत्व देने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
-26 मई को जारी आदेश में कहा गया है कि इसका पालन कड़ाई से किया जाए। 

नर्सिंग छात्राएं लिख रहीं हिंदी में 
- आयुष विवि ने पिछले साल से बीएससी व एमएससी नर्सिंग की छात्राओं को हिंदी में आंसर लिखने की छूट दे दी है। छूट देने से हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाली छात्राओं को फायदा हो रहा है। 
- प्रदेश में साढ़े चार हजार छात्राएं हैं, जो नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। आठ सरकारी समेत 92 कॉलेज हैं। अधिकारियों ने बताया कि आंसर लिखने का माध्यम बदलने का अच्छा प्रभाव पड़ रहा है।
 


 

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