क्लास 1 और 2 के बच्चों को नहीं दिया जाए होमवर्क: हाईकोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चों के स्कूल बैग के वजन को भी कम किया जाए। स्कूल बैग का वजन बच्चे के वजन से 10% से ज्यादा नहीं हो।

एजुकेशन डेस्क। मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए क्लास-1 और 2 के बच्चों को होमवर्क नहीं देने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चे कोई वेटलिफ्टर नहीं है, जो उनके स्कूल बैग का वजन इतना ज्यादा किया जा रहा है। इस बारे में कोर्ट ने केंद्र सरकार को गाइडलाइंस जारी करने को भी कहा है।

छोटे बच्चों को होमवर्क देने की बात सोचना भी अवास्तिवक

- बुधवार को एम पुरुषोत्तमानन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस एन किरुबाकरन ने स्कूलों को सख्त हिदायत देते हुए क्लास-1 और 2 के बच्चों को होमवर्क नहीं देने को कहा है। इसके पीछे कोर्ट ने कहा कि छोटी उम्र के बच्चों को कम से कम 11 घंटे की नींद लेना जरूरी है और अगर बच्चे होमवर्क में ही उलझे रहेंगे तो आराम कब करेंगे?
- अपने फैसले में जज ने कई तरह की रिसर्च स्टडी और पैरेंटिंग साइकोलोजिस्ट का उल्लेख करते हुए कहा, कई विशेषज्ञों का मानना है कि होमवर्क बड़े बच्चों के लिए काफी फायदेमंद होता है, जबकि छोटे बच्चों में आदेशों को मानने, एकाग्र होने, निर्देशों को समझने, भावना को काबू करने और बातों को दिमाग में रखने की शक्ति कम होती है। इसलिए ये KG, पहली और दूसरी क्लास के बच्चों को होमवर्क देना या खुद उनसे असाइनमेंट कराने की बात सोचना ही अवास्तविक है। इसलिए क्लास पहली और दूसरी के बच्चों को होमवर्क देने पर रोक होना ही चाहिए।
- साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि ये बेहद हैरान करने वाली बात है कि क्लास एक के स्टूडेंट्स को भी ग्रामर और कंप्यूटर साइंस पढ़ाया जा रहा है। ये बात समझ नहीं आ रही कि 5 साल का एक बच्चा कैसे कंप्यूटर का कॉन्सेप्ट समझ सकता है, या जनरल नॉलेज को समझ सकता है।
- सुनवाई के दौरान जज, याचिकाकर्ता-एडवोकेट की इस दलील से सहमत नजर आए कि CBSE स्कूलों में क्लास वन और टू के बच्चों को भी होमवर्क दिया जा रहा है, जबकि NCERT ने इस पर रोक लगा रखी है।

सरकार से कहा- चिल्ड्रन स्कूल बैग पॉलिसी बनाई जाए

- इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के वजन से 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हालांकि इसका ज्यादा असर नहीं हुआ, जिसके बाद कोर्ट ने एकबार फिर केंद्र सरकार से पुराने आदेश का पालन कराने के लिए कहा है। इस बारे में हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि बच्चे न ही वेटलिफ्टर हैं और न ही स्कूल बैग कोई कंटेनर। 
- हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र और तेलंगाना सरकार के सरकारी ऑर्डर्स का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में चिल्ड्रन स्कूल बैग पॉलिसी बनाने के लिए आदेश जारी करने को कहा है। इस पॉलिसी की मदद से बच्चों के बैग का वजन कम किया जा सकता है। 

स्कूलों में पढ़ाए जा रहे गैर जरूरी विषय

- जज ने ये भी कहा कि स्कूल, बच्चों को कई अप्रासंगिक विषय पढ़ाते हुए उन पर गैरजरूरी दबाव बना रहे हैं। ये विषय NCERT या CBSE के सिलेबस में भी नहीं हैं।
- राज्यों के बोर्ड का जिक्र करते हुए भी जज ने कहा कि 'इसी तरह स्टेट बोर्ड स्कूल्स में और दूसरे सिस्टम्स में भी बच्चों से होमवर्क और की गैर जरूरी चीजें करवाई जा रही हैं।'
- जज ने ये भी कहा कि स्टेट बोर्ड्स को भी NCERT के डायरेक्शन्स को फॉलो करना चाहिए। निर्देश जारी करने के बाद जज ने दो हफ्तों के भीतर CBSE और NCERT से रिपोर्ट मांगी है।

याचिका में क्या की गई थी मांग

- मद्रास हाईकोर्ट में एडवोकेट एम पुरुषोत्तमानन ने याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने कहा था कि CBSE स्कूलों में क्लास-1 और 2 के बच्चों को भी होमवर्क दिया जा रहा है, जबकि NCERT ने इस पर रोक लगा रखी है।
- इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि CBSE स्कूलों में केवल NCERT की किताबों का ही इस्तेमाल किया जाए।
 

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