मध्य प्रदेश / विश्वविद्यालयों का अकादमिक कैलेंडर पिछड़ने से छात्र परेशान

बेपटरी उच्च शिक्षा... स्थाई समिति की बैठक में उठा मामला

एजुकेशन डेस्क।  बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी सहित प्रदेश की किसी भी यूनिवर्सिटी में राज्यपाल से अनुमाेदन के बाद जारी होने वाले अकादमिक कैलेंडर का पालन नहीं हो रहा है। इस पर शासन ने संज्ञान लेते हुए सभी यूनिवर्सिटी से अकादमिक कैलेंडर का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा है, क्योंकि इसका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग ने सोमवार को स्थाई समिति का कार्रवाई विवरण जारी कर दिया है।

इस मामले में कुलपति और प्रोफेसर आमने-सामने आ गए हैं। कुलपतियों का कहना है कि प्रोफेसर्स परीक्षा संबंधी कार्य में सहयोग नहीं करते तो प्रोफेसर्स का कहना है कि विवि पहले अपनी व्यवस्थाएं ठीक करे। कुलपतियों से मिली जानकारी के बाद उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त राघवेंद्र सिंह ने आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

आमने-सामने... लेकिन समाधान पर कोई चर्चा नहीं हुई

कुलपति बोले- प्रोफेसर्स नहीं करते परीक्षा संबंधी कार्यों में सहयोग
कुलपतियों ने प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अकादमिक कैलेंडर पिछड़ने के पीछे विलंब से होने वाली परीक्षाएं हैं। साथ ही उनका कहना है कि कॉलेजों के रेगुलर प्रोफेसर्स के असयोग की वजह से प्रश्न-पत्र सेटिंग व मूल्यांकन कार्य में अनावश्यक देरी होती है। हालांकि इस मामले में कुलपति प्रो. सुनील कुमार, डॉ. केएनएस यादव, डॉ. संगीता शुक्ला ने कुछ सुझाव भी दिए हैं।

प्रोफेसर्स का तर्क- पहले अपनी व्यवस्थाएं सुधारें विवि, फिर अंगुली उठाएं
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष प्रो. कैलाश त्यागी ने कुलपतियों द्वारा बैठक में दिए तर्कों को गलत बताते हुए कहा कि विवि प्रश्न-पत्र सेट और मूल्यांकन करा लेते हैं और सालों तक इसका भुगतान नहीं करते। इतना ही नहीं प्रैक्टिकल में आने वाले शिक्षकों को भी ट्रेवल्स अलाउंस का भुगतान समय पर नहीं हाेता। पहले विवि अपनी व्यवस्था सुधारें, इसके बाद शिक्षकों पर अंगुली उठाएं।

छात्रों पर असर... दूसरे प्रदेशों में नहीं ले पाते एडमिशन
अकादमिक कैलेंडर का पालन नहीं होने के कारण प्रदेश के छात्रों को दूसरे प्रदेशों में एडमिशन लेने में असुविधा होती है। इसके अलावा प्रदेश के भीतर ही अन्य यूनिवर्सिटी या नियामक संस्थाओं से नियंत्रित कोर्सेस में एडमिशन लेने कठिनाई आती है।
 

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