मध्य प्रदेश / अगस्त 2018 में आया था पीएससी का रिजल्ट, अब तक नियुक्ति नहीं

मंत्री बोले- असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति का मामला कोर्ट में, अभी कुछ नहीं कह सकते

एजुकेशन डेस्क। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। कॉलेजों में 5 हजार से ज्यादा प्रोफेसरों के पद खाली हैं और जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। उधर, अगस्त 2018 में पीएससी से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर्स नियुक्ति पाने के लिए जून की गर्मी में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि यह मामला कोर्ट में है। जब तक कोर्ट से निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस पर कुछ नहीं कह सकते। उधर, चयनित उम्मीदवारों का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर नियुक्ति के मसले के निराकरण में देरी की है। यही वजह है कि चार महीने तक सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कोई जवाब पेश नहीं किया गया। इसी वजह से हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए। 

516 कॉलेजों में 5 हजार पद खाली
- तीन दशकों से असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती नहीं होेने से प्रदेश के 516 सरकारी कॉलेजों में 5 हजार शैक्षणिक पद रिक्त पड़े हैं। नियमित फैकल्टी नहीं होने के चलते यूजीसी और रुसा के माध्यम से मिलने वाली मदद पर भी रोक लगी हुई है। उधर बीते पांच साल में प्रदेश में खुले नए 130 कॉलेजों में नियमित फैकल्टी के बिना ही संचालित हो रहे हैं।

जानिए, कब क्या हुआ और क्या रहा सरकार का रुख
- 31 अगस्त 2018 को समाजशास्त्र विषय के अभ्यर्थी घनश्याम चौकसे की याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने विकलांग आरक्षण को लेकर सरकार को नोटिस जारी किया।
- 17 सितंबर 2018 को हुई सुनवाई में सरकार ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर 2018 की तारीख दे दी। 
- 1 अक्टूबर को हुई अगली सुनवाई में भी जवाब नहीं दिया। {10 अक्टूबर को भी जवाब नहीं दिया।
- 30 अक्टूबर को कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए 6 सप्ताह का अल्टीमेटम दिया। 
- 18 दिसंबर को सुनवाई में नवगठित कांग्रेस सरकार ने तीन सप्ताह का समय और मांगा।
- 29 जनवरी 2019 को विभाग ने जवाब पेश किया, लेकिन वह अपठनीय था। यानी पेपर में क्या लिखा गया था, यह पढ़ने लायक नहीं था। कोर्ट ने फिर एक माह का समय दे दिया।
- अगली सुनवाई 17 जून 2019 को होगी।

जवाब देने में 4 माह लगा दिए
- विकलांग आरक्षण पर सरकार ने अपना जवाब देने में चार माह से ज्यादा का वक्त लगा दिया, जिसके चलते कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दे दिए। 29 जनवरी को सरकार ने जो जवाब दिया वह भी अस्पष्ट था। खास बात यह है कि इस याचिका से विकलांग कोटे के केवल
153 अभ्यार्थी ही प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को हाईकोर्ट से अनुमति लेकर बाकी 2300 से ज्यादा अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे देना चाहिए।
- डॉ. प्रकाश खातरकर, प्रदेश अध्यक्ष पीएससी चयनित सहायक प्राध्यापक संघ

कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। उम्मीदवारों के वकीलों और शासन के वकीलों से भी बात की है। जल्द निराकरण की उम्मीद है। जब तक मामला कोर्ट में है, इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता।
- जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दिए थे नए सत्र से पहले भर्ती के आदेश
- नरेश सिंह चौहान विरुद्ध स्टेट ऑफ मप्र के केस में ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने सरकार को अकादमिक सत्र 2018-19 के शुरू होने के पहले इन सभी पदों को नियुक्ति कर लेने के लिए कहा था। इसी के चलते सरकार ने दिसम्बर 2017 में असिस्टेंट प्रोफेसर चयन परीक्षा का जारी किया गया था। 23 से ज्यादा संधोधन के बाद पीएससी ने जून-जुलाई में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित कर अगस्त में चयन-सूची भी जारी कर दी थी। सितम्बर में दस्तावेजों का सत्यापन भी हो गया था।

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