मध्य प्रदेश / हिंदी विवि में गेस्ट फैकल्टी से पद भरने पर दूसरे संस्थानों में भर्ती पर होगा असर

नए अवसर हाेंगे कम} राज्यपाल व उच्च शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद शुरू हुई नई बहस

एजुकेशन डेस्क। प्रदेश में सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालय जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रोजगार के अवसरों को लेकर दिन व दिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में युवा पीएचडी डिग्री हासिल कर रहे हैं, वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए नेशनल इलिजबिलिटी टेस्ट और राज्य पात्रता परीक्षा की योग्यता भी प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन नए अवसर नहीं मिल रहे हैं। इधर, गेस्ट फैकल्टी और कॉन्ट्रेक्ट फैकल्टी भी अपने भविष्य को लेकर चितिंत हैं। यह भी अपने रोजगार को स्थाई कराने के लिए आंदोलनरत हैं।

ऐसे में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि के गेस्ट फैकल्टी को राज्यपाल लालजी टंडन और उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी की ओर से विवि में खाली पड़े शिक्षकों के पदों पर नियुक्त करने का आश्वासन मिलने से उन्हें राहत मिली, लेकिन भर्ती के लिए इंतजार करने वाले बाहर के युवाओं की परेशानी बढ़ गई है। हिंदी विवि असिस्टेंट प्रोफेसर के करीब 18 पद शासन से स्वीकृत हैं, जबकि यहां पर 33 गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं ली जा रही है। यदि इन्हें रेगुलर किया जाता है तो इसका असर प्रदेशभर के उच्च शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ेगा। जानकार कहते हैं किसी एक संस्थान के लिए नियम तैयार किए जाएंगे तो उन्हें सभी पर लागू करना पड़ेगा। यदि नहीं किया जाता है तो बड़ी संख्या में न्यायालयीन प्रकरण बढ़ने लगेंगे। इसके लिए पूरी नीति तैयार करनी होगी। इसके तहत समग्रता के साथ नियम तैयार करने होंगे, लेकिन इससे युवाओं के अवसर कम हो जाएंगे। 5201 पद खाली : विवि अनुदान आयोग के तय मापदंड के अनुसार काॅलेजों और विश्वविद्यालयों में एंट्री लेवल का पद असिस्टेंट प्रोफेसर है। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में ही असिस्टेंट प्रोफेसर के 4727 पद खाली हैं। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर्स और प्रोफेसर के मिलाकर 5201 पद खाली हैं। इन पदों के विरूद्ध उच्च शिक्षा विभाग हर साल गेस्ट फैकल्टी के विज्ञापन जारी कर नियुक्त करता है। हालांकि, अब गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं के संदर्भ में आदेश दिया है कि गेस्ट फैकल्टी को गेस्ट फैकल्टी से नहीं बदला जा सकता जब तक नियमित पदों पर नियुक्ति नहीं कर ली जाती।


परेशानी... पीएससी चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति का इंतजार
सरकारी कॉलेजों के लिए एमपीपीएससी की परीक्षा पास कर चयनित हुए उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश मिलने का इंतजार है। इसके लिए वे एक साल से संघर्षरत हैं। अब पीएससी दोबारा से चयनसूची जारी करने लगा है। वहीं ऐसे उम्मीदवार जिनका चयन नहीं हो सका है, वे लगातार आरक्षण नियमों में विभिन्न कमियां मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं।

एक्सपर्ट... इस व्यवस्था से योग्य युवाओं के अवसर कम होंगे 
लंबे समय से कार्यरत योग्य गेस्ट फैकल्टी को रेगुलर पदों पर रखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इससे योग्य युवाओं के अवसर बहुत हो सकते हैं, जो कहीं भी गेस्ट फैकल्टी नहीं है। हालांकि गेस्ट फैकल्टी को इस तरह नियुक्त करने में कई बाधाएं हैं। इसके लिए सरकार को नीति बनानी होगी। सामान्य प्रशासन विभाग जब नीति बनाएगा तो उसे सभी कॉलेजों और विवि में लागू करना पड़ेगा। पूर्व में 31 मार्च 1985 तक एडहॉक पर नियुक्त लोगों को रेगुलर बनाने की नीति बनाई थी और रेग्ुलर भी किया था। - डॉ. राधाबल्लभ शर्मा, रिटायर्ड अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग


विरोध...पीएससी से नियुक्तियों पर नहीं लगनी चाहिए रोक
राज्यपाल ने हिंदी भाषा के लिए समर्पित और हिंदी विवि को विशेष दर्जा देकर नियुक्ति करने की बात कही है। कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को सीधे तौर पर रेगुलर करने का विरोध बरकरार रहेगा। यूजीसी के मापदंड अनुसार योग्य गेस्ट फैकल्टी को रोस्टर के अनुसार रेगुलर करने की नीति बनाकर सरकार कार्रवाई कर सकती है। पीएससी से होने वाली नियुक्तियों पर रोक नहीं लगनी चाहिए। यह राजपत्रित पोस्ट होती है। पहले से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर्स को जल्द ही नियुक्ति दी जानी चाहिए। -डॉ. प्रकाश खातरकर, अध्यक्ष, पीएससी चयनित असिस्टेंट प्राध्यापक संघ (हिंदी विवि में गेस्ट फैकल्टी भी हैं)

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