मध्य प्रदेश/ 15 लाख उम्मीदवारों की आस जागी, प्रदेश के 1.50 लाख की उम्मीदें टूटी

आयु सीमा विवाद के चलते सालभर से नहीं हो पा रही थी एमपीपीएससी की परीक्षाएं

एजुकेशन डेस्क, शैलेंद्र चौहान। आयु सीमा पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब मप्र लोकसेवा आयोग (एमपीपीएससी) के माध्यम से होने वाली परीक्षाओं का रास्ता खुल गया है। हाईकोर्ट के फैसले के चलते बीते एक साल से पीएससी ने किसी नई परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी नहीं किया था। सरकार के फैसले से राज्य सेवा और राज्य वन सेवा परीक्षाओं के लिए जल्द नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

हालांकि सामान्य वर्ग के 35 वर्ष से ज्यादा उम्र के उम्मीदवार आयु सीमा कम किए जाने को लेकर मुश्किल में फंस गए हैं। इनकी संख्या करीब 1.50 लाख है, जबकि बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा बढ़ने से उनकी उम्मीद जागी है। पीएससी ने हाईकोर्ट के फैसले पर 14 मई 2018 को सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगा था। तभी से भर्ती रुकी हुई थीं।

यह है मामला- राज्य शासन की सेवाओं में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में बदलाव किया गया है। इसमें बाहरी प्रदेश के युवाओं की परीक्षा के लिए आयु सीमा 28 से बढ़ाकर 35 साल की गई है, लेकिन प्रदेश के युवा उम्मीदवारों की आयु सीमा 40 से घटाकर 35 कर दी गई है।

सरकार को नहीं पता- कितने होंगे प्रभाव
- सामान्य वर्ग के युवाओं की 5 वर्ष उम्र घटाने से 35 से 40 वर्ष की उम्र के कितने युवा नुकसान उठाएंगे, इसका हिसाब सरकार के पास नहीं है। 

कांग्रेस शासन में ऐसा होता था
- अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह सरकार के समय एमपीपीएससी में मप्र से जुड़े सवाल ज्यादा होते थे। इससे बाहरी उम्मीदवारों के चयन की गुंजाइश कम होती थी। 

तब प्रदेश में ऐसा था नियम
पीएससी से सीधे पदों की भर्ती के लिए आयु सीमा निर्धारण पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 मई 2017 को परिपत्र क्रमांक सी 3-8/2016/3-1 जारी किया था। इसमें मप्र के मूल निवासियों को अधिकतम 40 वर्ष और बाहरियों के लिए 28 वर्ष आयु सीमा तय की गई थी। 

एससी में सुनवाई के पहले एसएलपी वापस
- भाजपा सरकार में उच्च शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, लेकिन सुनवाई के पहले ही एसएलपी वापस ले ली। इसलिए एक साल से भर्ती परीक्षा नहीं हो पाई।

अब एमपीपीएससी द्वारा इन परीक्षाओं के जल्द जारी होंगे विज्ञापन

परीक्षा

कब होनी थी

अनुमानित उम्मीदवार

राज्य सेवा परीक्षा

अप्रैल 2019

4 लाख

राज्य वन सेवा

अप्रैल 2019

2 लाख

राज्य अभियांत्रिकी परीक्षा

मई 2019

1 लाख

सहायक भौमिकीविद

मई 2019

10 हजार

खनिज अधिकारी

मई 2019

50 हजार 

खनिज निरीक्षक

मई 2019

1 लाख 

सहायक संचालक किसान कल्याण

जून 2019

1 लाख 

वैज्ञानिक अधिकारी

जून 2019

1 लाख

सहायक संचालक उद्यानिकी

जून 2019

1 लाख

सहायक संचालक सामाजिक न्याय

जुलाई 2019

1 लाख 

सहायक संचालक, किसान

जुलाई 2019

1 लाख

कल्याण सांख्यिकी सहायक संचालक मत्स्योघोग

जुलाई 2019

1 लाख 


कैबिनेट मंत्री बोले-हम फिर से अपनी बात रखेंग
- कैबिनेट बैठक में एमपीपीएससी की आयु सीमा बढ़ाने वाले मामले में बात रखी थी। प्रदेश के युवाओं को ज्यादा रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। प्रदेश के युवाओं की उम्र को लेकर हम आगामी कैबिनेट बैठक में अपनी बात रखेंगे।
- ओमकार मरकाम, जनजातीय कार्य मंत्री

- एमपीपीएससी में बाहरी युवाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश है। आयु सीमा में एकरूपता रखी जाना चाहिए, मध्यप्रदेश के युवाओं की उम्र 5 साल कम हुई है। हम सीएम से आग्रह करेंगे कि फैसले पर पुर्नविचार होना चाहिए। कैबिनेट में बात रखेंगे।
- महेंद्र सिंह सिसौदिया, श्रम मंत

- सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि देश का संविधान एक है। भेदभाव नहीं कर सकते। राज्य में आयु सीमा एक सामान की गई है। हम कोर्ट से अनुरोध करेंगे कि प्रदेश के हितों की रक्षा होना चाहिए। प्रदेश के युवाओं को ज्यादा मौका मिलना चाहिए ।
- जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री

- कैबिनेट बैठक में एमपीपीएससी से सीधे भर्ती की आयु सीमा में बदलाव के प्रस्ताव पर कोई विवाद नहीं हुआ था। कैबिनेट में सारे फैसले सर्वसम्मति से होते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण बाहरी उम्मीदवारों को ज्यादा उम्र के मौके पर बात रखी थी।
- तुलसी सिलावट, स्वास्थ्य मंत्री

विरोध... यह प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय है
- भाजपा सरकार ने ज्यादा रोजगार के लिए आयु सीमा में बदलाव किया था। इसके उलट कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के युवाओं का हक मारने का फैसला किया है। प्रदेश के युवाओं के लिए 5 साल की उम्र सीमा घटाना घोर अन्याय है। लगता है ये सरकार प्रदेश के युवाओं को ढोर चराने और बैंड बजाने का काम ही सौंपना चाहती है। दूसरे राज्य से ज्यादा मौके हमारे युवाओं को मिलना चाहिए।
- गोपाल भार्गव, नेता प्रतिपक्ष

आयु सीमा पर राज्य सरकार के पास थे ये तीन विकल्प

1. सरकार चाहती तो बाहरी और मूल निवासी दोनों के लिए आयु सीमा एक समान 40 वर्ष कर सकती थी। प्रदेश के युवाओं को 5 साल उम्र में कमी का नुकसान नहीं होता।

2. कांग्रेस सरकार के छह महीने हो चुके हैं। इस मामले में सरकार चाहती तो सुप्रीम कोर्ट में वापस से एसएलपी दायर कर सकती थी।

3. दूसरे कई प्रदेशों में आयु सीमा और बाहरी-मूल निवासियों के लिए अलग नियम है। इसका विस्तृत अध्ययन कराने के बाद प्रदेश के युवाओं के लिए ज्यादा अवसर निकाले जा सकते थे।

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