मध्य प्रदेश / बिजनेस मॉडल और छात्रों के रोजगार में कंवर्ट हों इनोवेशन, इसका प्लान तैयार

आरजीपीवी करेगा फुल टाइम रिसर्च व प्रोजेक्ट के लिए भी फंडिंग

एजुकेशन डेस्क। टेक्निकल एजुकेशन में रिसर्च और इनोवेशन का माहौल डेवलप करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने एक प्लान तैयार किया है। अभी ऐसे इनाेवेशन और रिसर्च नहीं हो पा रहे हैं, जिन्हें बिजनेस के रूप में तब्दील किया जा सके या वे पब्लिक यूटीलिटी के तौर पर उपयोगी हों। विवि की अपेक्षा है कि ऐसे इनोवेशन हों, जिन्हें बिजनेस माॅडल में कंवर्ट किया जाए और उनमें युवाओं के लिए राेजगार के अवसर बन सकें।

इसके लिए विश्वविद्यालय ने प्लान तैयार कर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए 24 फुल टाइम फैलोशिप और 100 रिसर्च प्राेजेक्ट के लिए फंडिंग की जाएगी। हाल ही में आरजीपीवी में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन प्रो. एमपी पूनिया और विवि के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें विवि से संबद्ध हर एक टेक्निकल इंस्टीट्यूट में कम से कम एक इनोवेशन कराने पर चर्चा हुई। प्रो. पूनिया का मानना है कि विवि यदि 400 इंस्टीट्यूट संबद्ध हैं और एक-एक इनोवेशन भी होता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि मिल सकती है।

फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए विवि ने उठाए ये कदम

रेसीडेंशियल सुविधा के साथ 33 हजार रुपए प्रति माह की फैलोशिप
रिसर्च को बढ़ावा देने 24 छात्रों को फुल टाइम फैलोशिप दी जाएगी। रेसीडेंशियल सुविधा के लिए हॉस्टल भी बनकर तैयार हो गया है। 24 ऐसे स्टूडेंट्स की खोज की जा रही है जो विवि कैंपस में रहकर फुल टाइम रिसर्च वर्क कर सकें। इन्हें विवि में रेसीडेंशियल सुविधा और प्रतिमाह 33 हजार रुपए की फैलोशिप भी दी जाएगी।

100 प्रोजेक्ट को तीन-तीन लाख रुपए की फंडिंग-
आरजीपीवी 100 रिसर्च प्रोजेक्ट अवॉर्ड कर रहे हैं। हर रिसर्च प्रोजेक्ट पर 3 लाख रुपए की फंडिंग विवि की आेर से जा रही है। लगभग 30 प्राेजेक्ट अवॉर्ड हो चुके हैं। इसके जरिए एक पूरा इको सिस्टम तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए लेटेस्ट लैब भी उपलब्ध कराई जाएगी।

पॉलिसी इंफ्रास्ट्रक्चर के बाद विवि का पूरा फोकस अब मैकेनिज्म पर है
कुलपति प्रो. सुनील कुमार ने बताया कि इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए तीन सबसे आवश्यक बातें हैं। इसके लिए पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर और उसका एग्जीक्यूट करने के लिए एक मैकेनिज्म होना चाहिए, जिससे पॉजिटिव माहौल तैयार हो सके। इसके लिए सबसे जरूरी फाइनेंशियल फंडिंग की व्यवस्था भी की गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग तैयार है। पाॅलिसी भी बना ली गई है। इसके लिए फैलोशिप सहित विभिन्न योजनाओं के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। कुलपति ने बताया कि इनोवेशन में बेसिक कंपोनेंट रिसर्स से ही प्राप्त होते हैं।

इंक्यूबेशन सेंटर की सुविधा के लिए एमओयू 
आरजीपीवी अपना खुद का इंक्यूबेशन सेंटर तैयार कर रहा है। लगभग यह तैयार भी हो चुका है। यह जल्द ही आॅपरेशनल मोड में आ जाएगा। वहीं, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के साथ एमओयू भी किया है। यह विवि परिसर से लगा हुआ है। इनके इंक्यूबेशन सेंटर में छात्रों को इनोवेशन करने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
 

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