लाइफ अलग-अलग स्टेज पर रिहर्सल करवाती है - मनीष पॉल

एक्टर-कॉमेडियन मनीष मानते हैं कि परफॉर्म करने से पहले का डर उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस देने को प्रेरित करता है।

First Person। मैं एक मिडल क्लास पंजाबी परिवार में पैदा हुआ। हमारा परिवार 1947 में सियालकोट से भारत आया था। बड़े संघर्षों के बाद ही मेरे पिता एक सामान्य जीवनशैली में हमें पाल सके। हम तीन बहन-भाई हैं जिनमें मैं सबसे छोटा हूं। बंटवारे के समय भारत में आकर आगे बढ़ते हुए मेरे पिता ने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन मैंने देखा कि वे कभी-भी किसी मुसीबत से घबराते नहीं थे, बल्कि सामान्य रहकर उसका समाधान निकालते थे। बहुत-से लोग मुझसे पूछते हैं कि इतना सेंस ऑफ ह्यूमर कहां से आता है तो मैं यही कहता हूं कि यह मुझे अपने
पिता से मिला है। उन्हें देखकर ही मैंने सीखा कि मुश्किल स्थितियों को तनाव से नहीं, बल्कि ह्यूमर से जीता जा सकता है। मैंने उन्हीं से सीखा कि लाइफ में कितनी भी खराब स्थिति हो, हमें अपने आप पर और परिस्थितियों पर हंसने की अपनी क्षमता को बनाए रखना चाहिए। अगर आप खुद पर हंस सकते हैं, अपना मजाक बना सकते हैं तो आप बहुत कुछ कर सकते हैं।

बचपन में हासिल किया अनुभव आज भी काम आ रहा है
- स्ट्रगल सभी की लाइफ का हिस्सा है, जितना जल्दी आप यह समझ लेंगे, उतनी ही आसानी से मुश्किल दिनों को गुजार लेंगे। मैं हमेशा से ही एक्टर बनना चाहता था इसलिए मुम्बई आ गया। मुम्बई आने के एक साल तक मैं कुछ कमा नहीं पाया, तब मेरी पत्नी ने घर खर्च चलाने के लिए स्कूल में जॉब कर ली। बाद में धीरे-धीरे जब मुझे अवसर मिलने लगे तो समझ में आया कि दरअसल हमारे साथ जाे कुछ भी हो रहा होता है वह हमें लाइफ के लिए तैयार कर रहा होता है। उदाहरण के तौर पर जब स्कूल के दिनों में कोई फंक्शन होता था तो मैं अक्सर स्टेज के आस-पास होता था और अपनी बारी का इंतजार कर रहा होता था, ऐसे में अगर कभी टेप खराब हो जाता या कोई और परेशानी होती ताे मुझे स्टेज पर भेज दिया जाता था ताकि मैं ऑडियंस का मनोरंजन कर सकूं। 

आज मुझे महसूस होता है कि उस समय मेरी रिहर्सल हो रही थी और उस दौरान मैंने जो सुधार करना और ऑडियंस का मनोरंजन करना सीखा, वह अब मेरे काम आ रहा है। हालांकि अब स्टेज और ऑडियंस दोनों ही अलग होते हैं, लेकिन बचपन का मेरा अनुभव आज भी मेरे काम आता है। स्टेज पर जाने से पहले अब भी डर लगता है, लेकिन यही डर पहले की तरह अब भी मुझे अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस देने के लिए प्रेरित करता है।

अक्सर मुझे पता नहीं होता कि मैं स्टेज पर जाकर क्या करने वाला हूं और मैं जो करता हूं वह मुझे याद भी नहीं होता, लेकिन हां, उस समय मैं एक तरह के परफॉर्मेंस मोड में चला जाता हूं। वहां पहुंचकर लगता है कि जो कुछ करना है यहीं करना है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब आपको अपने पसंद का काम करने का मौका मिलता है तो आप उसे एंजॉय करते हुए करते हैं। जीवन में जब आप यह सोच कर निर्णय लेते हैं कि आपको कोई जिम्मेदारी उठानी है तो आप अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी अच्छा कर पाते हैं। मैं अपने प्रोफेशन से बहुत खुश हूं, क्योंकि इसमें मैं लोगों को हंसा सकता हूं। आज लोग मुझे एक मुस्कुराहट के साथ मिलते हैं और मुझसे दूर जाते समय वे और अधिक हंसते व मुस्कुराते हैं, क्योंकि मैं लोगों को हंसाने को ही अपनी जिम्मेदारी समझता हूं। 

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