सफल फाउंडर्स से जानिए उनके प्रॉडक्टिविटी हैक्स

इन आंत्रप्रेन्योर्स में ऐसे कई मशहूर नाम शामिल हैं जो विश्वप्रसिद्ध बिजनेसेज के फाउंडर्स हैं

एजुकेशन डेस्क। क्या अपनी प्रोफेशनल या आंत्रप्रेन्योरियल लाइफ में दिन के कई घंटे व्यस्त रहने के बावजूद भी आपके काम पूरे नहीं हो पाते हैं? इस मुश्किल का सामना दुनिया के कई सफलतम फाउंडर्स ने भी किया लेकिन उन्होंने ऐसे तरीके ढूंढ निकालेजिन्होंने कम से कम समय में अधिक से अधिक काम निपटाने में उनकी सहायता कर प्रॉडक्टिविटी बढ़ाई है। इन आंत्रप्रेन्योर्स में ऐसे कई मशहूर नाम शामिल हैं जो विश्वप्रसिद्ध बिजनेसेज के फाउंडर्स हैं और आज भी प्रॉडक्टिव बनेरहने के लिए इन तरीकों का उपयोग करते हैं। अगर आप भी अपनी प्रॉडक्टिविटी बढ़ाना चाहते हैं तो जैक डॉर्सी या जेफ बेजोस जैसे लीडर्स के हैक्स जानना आपके लिए कैसा रहेगा?

ब्रायन हैलिगन कोफाउंडर, हबस्पॉट
“बुधवार को वर्क फ्रॉम होम मेरा प्रॉडक्टिविटी हैक है। इस दिन मैं बहुत कुछ सोच पाता हूं और कई काम पूरे करता हूं ”। 
क्यों फायदेमंद : स्टैनफोर्ड स्टडी के अनुसार, वर्क फ्रॉम होम आपकी प्रॉडक्टिविटी को 13 फीसदी तक बढ़ा देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आने-जाने में खर्च होने वाली आपकी एनर्जी बचती है साथ ही आपको पसंद के माहौल और समयानुसार काम करने की फ्लेक्सिबिलिटी भी मिलती है। 
प्रो टिप : इसके लिए एक डेडिकेटेड वर्कस्पेस हो जहां सही फर्नीचर के साथ पौधे, और पूरी लाइट हो। स्टडीज कहती हैं कि पौधों का हरा रंग आपकी प्रॉडक्टिविटी को बढ़ाता है और बेहतर लाइट में काम करने वाले ज्यादा अलर्ट रहते हैं।

जेनिफर हेमैन फाउंडर, रेंट द रनवे
“दिन में एक या दो प्रॉब्लम्स चुनती हूं जो सबसे जरूरी हों। रणनीति बनाती हूं और ईमेल व सोशल मीडिया नोटिफिकेशंस से दूरी बनाकर प्रॉब्लम सॉल्व करती हूं”
क्यों फायदेमंद : एक व्यक्ति औसत रूप से एक दिन में 2617 बार फोन छूता है, 74 बार ईमेल चेक करता है और 46 नोटिफिकेशन्स प्राप्त करता है। इसे कम करके फोकस और प्रॉडक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सकता है। 
प्रो टिप : अगले दिन के सबसे जरूरी कामों की पहचान करने के लिए आइजनहावर मैट्रिक्स का इस्तेमाल करें। इस तकनीक में आपको महत्व और अर्जेंसी के स्तर के हिसाब से अपने काम को जांचकर उसकी स्ट्रैटजी तय करनी होती है। 

जेफ बेजोस फाउंडर, अमेजन
“जरूरी इंफॉर्मेशन का 70 फीसदी भी हासिल हो जाए तो फैसला लेना ठीक होगा, क्योंकि 90 फीसदी इंफॉर्मेशन मिलने के इंतजार में आपकी रफ्तार कम हो जाएगी”।
क्यों फायदेमंद : निर्णय लेने में जितनी देर होगी, जोखिम उतना ही ज्यादा होगा। इंतजार में अवसर खो सकते हैं जिसका फायदा आपका प्रतिस्पर्धी उठा सकता है।
प्रो टिप : निर्णय लेने की एक डेडलाइन सेट करें, यह आपको एक्शन लेने के लिए मजबूर करेगी। डाइट (DIET) अप्रोच अपनाएं जिसमें जरूरी डेटा को डिफाइन (D) करें, उसे डिसिजन मेकिंग प्रोसेस में इंटिग्रेट (I) करें, ऑप्शन्स एक्सप्लोर (E) करें और सॉल्यूशन्स को टेस्ट (T) करें। 

काट्या ब्यूचैंप कोफाउंडर, बर्चबॉक
“इस बात पर जोर देती हूं कि कंपनी के लोग अपनी सभी ईमेल्स में यह बताएं कि उन्हें मेल्स का जवाब कब चाहिए। इससे बाकी कर्मचारियों के लिए वरीयता तय करना काफी आसान हो जाएगा”।
क्यों फायदेमंद : ईमेल में रेस्पॉन्स टाइम की स्पष्टता आपको एक नजर में अपने कम्युनिकेशन की वरीयता तय करने और तुरंत निपटाने वाले प्रोजेक्ट्स पर फोकस करने में मदद करेगी।
प्रो टिप : ईमेल लिखते हुए दो गोल्डन रूल्स फॉलाे करें। पहला - सब्जेक्ट लाइन में यह लिखें कि ईमेल किसके लिए है और किस तरह का एक्शन लेना है। दूसरा - ईमेल के अंत में स्पष्ट करें कि कितने समय में क्या किया जाना है।

जैक डॉर्सी कोफाउंडर, ट्विटर
“मेरी ज्यादातर मीटिंग्स गूगल डॉक्स बेस्ड होती हैं, जिनकी शुरुआत 10 मिनट की रीडिंग और फिर डॉक्स में अपने कमेंट्स लिखने से होती है। इससे हरेक सदस्य को एक ही पेज पर आने और किसी भी लोकेशन से काम करने और क्रिटिकल थिंकिंग को पहले से तेज बनाने में मदद मिलती है।”
क्यों फायदेमंद : एक ही पेज पर पूरी टीम की एक्सेस होने से मीटिंग के दाैरान टीमवर्क और क्रिटिकल थिंकिंग को बल मिलता है। 
प्रो टिप : क्रिटिकल थिंकिंग आपको प्रोफेशनल और पर्सनल फैसले लेने में मदद करती है। इसे मजबूत बनाने के लिए यह नियम बना लें कि जब मीटिंग में कोई बाेल रहा हाे तो उसे बीच में न रोकें।
 

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