सफलता के लिए साथ मिलकर काम करना आना चाहिए- नितेश तिवारी

इंजीनियरिंग की डिग्री और एडवर्टाइजिंग का कॅरिअर छोड़ बने फिल्म डायरेक्टर

First Person। मेरा जन्म इटारसी, मध्य प्रदेश में हुआ। बचपन वहीं बीता और स्कूल की पढ़ाई भी वहीं पर हुई। शुरू से ही मैं पढ़ाई में काफी ब्राइट स्टूडेंट था। यही वजह थी कि ग्रेजुएशन के लिए मैं आईआईटी बॉम्बे आ गया जहां से मैंने मेटैलर्जी और मटीरियल साइंस में इंजीनियरिंग की। आईआईटी बॉम्बे में रहते हुए मुझे पहली बार क्रिएटिविटी का असल अर्थ समझ आया। दरअसल कॉलेज के दौरान मैं ड्रामा में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता था। मुझे ड्रामा लिखना, एक्ट करना, डायरेक्ट करना - सब बहुत अच्छा लगता था। यहां तक कि ड्रामा करते हुए कई बार मुझे लगा कि मुझे एक बार इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। 

कॉलेज पूरा कर पकड़ी नई राह
मैंने सोचा कि अगर ड्रामा में कॅरिअर बना पाता हूं तो बहुत अच्छा होगा और अगर नहीं तो मेरे पास इंजीनियरिंग की डिग्री तो है ही। यही बात ध्यान में रखते हुए मैंने कॉलेज से निकलने के तुरंत बाद एक एडवर्टाइजिंग कंपनी, लियो बर्नेट में अप्लाई किया और क्रिएटिव डायरेक्टर के तौर पर सलेक्ट होकर मैं वहीं काम करने लगा। हालांकि यह एक प्रयोग था लेकिन मेरी रुचि इसी क्षेत्र में बढ़ती गई और मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

डायरेक्टर न मिलने पर खुद उठाई जिम्मेदारी
शुरुआत में मैंने फिल्ममेकर बनने के बारे में नहीं सोचा था। एडवर्टाइजिंग फर्म में काम करने के कारण मेरे बहुत कॉन्टैक्ट्स हो गए थे और मैं स्क्रिप्ट्स लिखता था। इसी क्रम में चिल्लर पार्टी के लिए मैं और विकास बहल एक डायरेक्टर ढूंढ रहे थे, लेकिन क्योंकि उसमें दस बच्चों और एक कुत्तेको डायरेक्ट करना था और कोई स्टार भी नहीं था तो कोई राजी नहीं हुआ और हमें मिलकर फिल्म डायरेक्ट करनी पड़ी। उस समय फिल्म डायरेक्ट करने के लिए मुझे मेरी एडवर्टाइजिंग की जॉब पांच-छह महीनों के लिए छोड़नी पड़ी। उस फिल्म से मेरे लिए कॅरिअर के नए विकल्प खुल गए।

दंगल से मिली सफलता ने मुझे बहुत मोटिवेटकिया
चिल्लर पार्टी के बाद मैंने भूतनाथ रिटर्न्सभी डायरेक्ट की, लेकिन दंगल ने मुझे नई पहचान दी। हालांकि अब मेरा नाम कई सफल फिल्मों से जुड़ गया है, लेकिन मैं समझता हूं कि मेरी यात्रा अभी शुरू ही हुई है। एक बार जब हममें कुछ नया सीखने की रुचि पैदा हो जाती है तो फिर हमें कोई सीमाएं नजर नहीं आतीं। वही बात मेरे साथ भी है। मेरी रुचि मेरे काम में नजर आती है। इसके अलावा मैं हमेशा यह मानता हूं कि सफलता किसी एक की नहीं होती, खासकर फिल्मों में तो यह पूरी टीम का काम होता है। मैं अपनी सफलता को अपनी टीम के साथ बांटना पसंद करता हूं। मेरे ख्याल से सफलता के लिए आपको सबके साथ मिलकर काम करना आना चाहिए।
 

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