जीवाजी विवि: अब स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के अवसर

इसके लिए 'अर्न व्हाइल लर्न' कार्यक्रम की पूरी प्लानिंग तैयार कर ली गई है।

एजुकेशन डेस्क। कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद स्टूडेंट्स के सामने सबसे बड़ी रोजगार हासिल करने की रहती है। उनकी समस्या यह है कि वे किस क्षेत्र में रोजगार के लिए जाएं। कई बार सही सलाह न मिलने के कारण युवा रोजगार के लिए भटकते रहते हैं। इसके चलते अनेक स्टूडेंट डिप्रेशन में आ जाते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए जीवाजी विवि अब स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार का अवसर देने जा रहा है। इसके लिए 'अर्न व्हाइल लर्न' कार्यक्रम की पूरी प्लानिंग तैयार कर ली गई है।

 

पिछले 1 वर्ष से चल रहा था योजना पर काम
- पिछले एक वर्ष से इस योजना पर काम किया जा रहा था। इसमें यह देखा जा रहा था कि पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम करने से स्टूडेंट्स की शिक्षा पर कोई विपरीत असर तो नहीं पड़ेगा।
- अब स्टूडेंट जेयू में काम कर पैसा कमा सकेंगे। इसके तहत कम्प्यूटर विभाग के स्टूडेंट डाटा एंट्री एवं अन्य कार्य कर सकते हैं।
- स्टूडेंट्स से यह कार्य सुबह 10 बजे से पहले और शाम को 6 बजे के बाद ही कराया जाएगा। पढ़ाई के साथ ही उन्हें आमदनी भी होगी।


अब इस तरह से काम करेंगे छात्र
- जीवाजी यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटर व अन्य कार्य जो आउट सोर्स से कराए जाते हैं। वह काम इन छात्रों से कराए जाएंगे।

कम्प्यूटर विभाग के स्टूडेंट: डाटा एंट्री व अन्य कार्य कर सकते हैं। लेकिन स्टूडेंट्स से यह कार्य सुबह 10 बजे से पहले और शाम को 6 बजे के बाद ही कराया जाएगा। इससे उनकी पढ़ाई पर
असर नहीं पड़ेगा।

पुस्तकालय विभाग : यहां स्टूडेंट्स से पुस्तकालय में पुस्तकों को सूचीबद्ध करना, उनका डिजिटलाइजेशन करना होगा।

इकोनॉमिक्स के स्टूडेंट: इन स्टूडेंट्स से जेयू के बजट की तैयारी में सहयोग लिया जाएगा। साथ ही इकोनॉमिक्स से संबद्ध अन्य कार्यलिए जाएंगे।
कॉमर्स के स्टूडेंट: इनसे लेखा कार्य में सहयोग लिया जाएगा।
साइंस के स्टूडेंट: इन स्टूडेंट्स से साइंस प्रयोगशालाओं में तकनीकी सहायकों के रूप में  कार्यलिया जाएग

इसी साल से करेंगे शुरूआत
 'अर्न व्हाइल लर्न' कार्यक्रम की शुरुआत इसी वर्ष से की जा रही है। इसके लिए हमने तैयारी कर ली है। विषय विशेषज्ञों से इस बारे में चर्चा की गई है। स्टूडेंट्स को जब पढ़ाई के साथ पैसा कमाने का मौका मिलेगा तो आगे रोजगार पाने में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। 
प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति, जीवाजी विवि, ग्वालियर

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