IIT दिल्ली को दो साल में मिले 765 करोड़ रुपए के रिसर्च प्रोजेक्ट्स

ग्रेजुएट कोर्स की तुलना में पीजी और पीएचडी पर ज्यादा फोकस

एजुकेशन डेस्क। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली को पिछले दो वर्षों (मार्च 2017 से मार्च 2019) में 765 करोड़ रुपए के रिसर्च प्रोजेक्ट्स मिले हैं। आधिकारिक डाटा के अनुसार, रिसर्च और कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स लगातार बढ़ रहे हैं। 2016-17 में 158 और 2017-18 में 282 रिसर्च प्रोजेक्ट्स शुरू हुए। साल 2018-19 में यह संख्या 317 हो गई साथ ही 290 कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट भी किए गए।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक वी. रामगोपाल राव ने कहा, "हम लगातार रिसर्च को बढ़ा रहे हैं। हम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जैसे संस्थानों की तरह रिसर्च को बढ़ाते रहेंगे।" राव ने कहा कि रिसर्च और कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स, सरकारी एजेंसियों या उद्योगों द्वारा सम्मानित की जाती हैं, जिन मुद्दों पर वे समाधान चाहते हैं।
राव ने कहा कि परिसर के अंदर और बाहर अंतःविषय (अलग-अलग विषय में) अनुसंधान किए जा रहे थे अब आईआईटी दिल्ली अपने परिसरों के भीतर 59 अलग-अलग विषयों में अनुसंधान कर रहा है, मेडिसिन और बायो मेडिसिन के क्षेत्र में एम्स के साथ 47 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इसी प्रकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से कृषि क्षेत्र में लगभग 10 रिसर्च प्रोजेक्ट्स हैं।

लगातार महंगे हो रहे हैं रिसर्च प्रोजेक्ट्स
आईआईटी दिल्ली के अनुसार, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और इसके रेट कुछ साल पहले के मुकाबले बहुत अधिक बढ़ गए हैं। उदाहरण के लिए, 2015-16 में, केवल 72.4 करोड़ रुपए के 136 रिसर्च प्रोजेक्ट्स किए गए। वर्तमान में टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट द्वारा 50 करोड़ रुपए की लागत से भारत की साइंस,टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पॉलिशी को बढ़ाने के लिए  रिसर्च प्रोजेक्ट किया जा रहा है।
शैक्षिक रूप से देखें तो आईआईटी दिल्ली अब ग्रेजुएट कोर्स की तुलना में पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टरेट कोर्स पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। पिछले तीन वर्षों में,आईआईटी दिल्ली से 1,000 से अधिक पीएचडी स्कोलर  पास हुए हैं। वर्तमान में, संस्थान में कुल  2,833 रिसर्च स्कोलर पीएचडी कर रहे हैं।

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