खेलने के शौकीन हैं तो स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में भी है कई मौके

इंडियन प्रीमियर लीग, हॉकी प्रीमियर लीग की वजह से बढ़ रही प्रोफेशनल्स की मांग।

एजुकेशन डेस्क। खेलने के शौकीन है या खेल के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की इच्छा रखने वाले ज्यादातर लोग नेशनल या इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में एक खिलाड़ी के तौर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की सोचते हैं। लेकिन अब इस फील्ड का हिस्सा बनने के लिए केवल यही एक रास्ता नहीं है। इंडियन प्रीमियर लीग, हॉकी प्रीमियर लीग, इंडियन सुपर लीग, प्रो कबड्डी लीग जैसे खेलों की शुरुआत होने के बाद से इस क्षेत्र में एथलीट्स के अलावा ऐसे प्रोफेशनल्स की भी मांग की जाने लगी है जो न केवल खेल की जानकारी रखते हों बल्कि मैच आॅर्गनाइज करने से लेकर टीम के फाइनेंसेज को मॉनिटर करने और एथलीट्स के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए नेगोशिएट करने तक के काम कर सकें। संक्षेप में कहें तो अब सभी स्तर पर खेलों से जुड़े बिजनेस और गवर्नेंस के तमाम पहलुओं को मैनेज करने के लिए स्पोर्ट्स मैनेजर्स की मांग बड़े स्तर पर होने लगी है। 

टॉप इंस्टीट्यूट्स-बीबीए-बीए के लिए
- नेशनल एकेडमी ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, मुंबई जॉर्ज कॉलेज, कोलकाता मौलाना अब्दुल कलाम आजाद यूनि. ऑफ टेक्नोलॉजी, प. बंगाल इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट (आईआईएसएम), मुबंई िसम्बायोिसस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, पुणे
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर  

एमबीए-मास्टर्स डिग्री के लिए संस्थान 
- नेशनल एकेडमी ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, मुबंई इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेल्फेयर एंड बिजनेस मैनेजमेंट, कोलकाता इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, मुबंई इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट (आईआईएसटी), पुणे तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनि., चेन्नई लक्ष्मीबाई नेशनल यूनि. ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर 

ऐसे बढ़ें इस कॅरिअर की ओर

स्टेप 1 : 10वीं के बाद कोई भी स्ट्रीम चुनें स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में कॅरिअर बनाने के लिए आपको 11वीं में किसी खास सब्जेक्ट स्ट्रीम को चुनने की जरूरत नहीं है। हालांकि एक्सपर्ट्स कॉमर्स स्ट्रीम लेने की सलाह देते हैं क्योंकि इसमें बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स, अकाउंटेंसी जैसे सब्जेक्ट्स का अध्ययन आपको बिजनेस प्रोसेसेज को गहराई से समझने और ग्लोबल बिजनेस से जुड़े मुद्दों को जानने में मदद करता है।

स्टेप 2 : बीबीए/स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन
- यहां शुरुआत के लिए 12वीं के बाद स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में बीए/बीबीए करना सही होगा। इन तीन वर्षीय प्रोफेशनल कोर्सेस में स्टूडेंट्स को प्रोफेशनल प्रोजेक्ट को खुद हैंडल करने का मौका तो मिलता ही है। साथ ही इंडस्ट्री से जुड़ी नॉलेज दी जाती है, जिससे वे मार्केटिंग मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स प्लानिंग व फंडिंग, स्पोर्ट्स लॉ, एथिक्स, रिस्क मैनेजमेंट आदि पर फोकस करना सीखते हैं।

स्टेप 3 : मास्टर्स डिग्री लेने का फायदा होगा 
- प्रोफेशनल वर्कप्लेस में जगह बनाने के  लिए मास्टर्स डिग्री होनी जरूरी है। कुछ संस्थान स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में एमबीए तो कुछ मास्टर्स डिग्री व डिप्लोमा कराते हैं। पीजी में न केवल स्पोर्ट्स की थ्योरिटिकल नॉलेज मिलती है बल्कि स्टूडेंट्स बेहतर मैनेजीरीयल स्किल्स से लैस हो जाते हैं, जिसका फायदा उन्हें स्पोर्ट्स मार्केटिंग, स्पोर्ट्स मीडिया, स्पोर्ट्स अपैरल से जुड़े जॉब्स में मिलेगा।

प्रमुख कॅरिअर आॅपर्च्यूनिटीज
स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में डिग्री लेने के बाद आप खेलों की दुनिया में मौजूद इन प्रोफेशनल आॅपर्च्यूनिटीज में कॅरिअर तलाश सकते हैं।

- स्पोर्ट्स एजेंट्स : स्पोर्ट्स एजेंट एथलीट के कानूनी कॉन्ट्रैक्ट्स के अलावा उनके फाइनेंसेस और एंडोर्समेंट डील्स को संभालते हैं। एक स्पोर्ट्स एजेंट की सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि वे किस एथलीट के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें इंडस्ट्री का अनुभव कितना है। आमतौर पर सैलरी 25,000 से लेकर 70,000 रु प्रतिमाह तक हो सकती है।

- स्पोर्ट्स इंफॉर्मेशन डायरेक्टर : ये प्रोफेशनल्स स्पोर्ट्स टीम और मीडिया आउटलेट्स के साथ काम करते हैं और पॉजिटिव मीडिया कवरेज के जरिए पब्लिक रिलेशन्स को मजबूत बनाते हैं। पर्याप्त अनुभव के बाद यहां आपको 40,000 से लेकर 70,000 रुपए प्रतिमाह तक की सैलरी मिल सकती है। 

- स्पोर्ट्स मार्केटिंग मैनेजर : मार्केटिंग स्पोर्ट्स ईवेंट्स को प्रमोट और स्पॉन्सर करने में मदद करने के अलावा ब्रांड लॉयल्टी बनाने में भी अहम रोल निभाती है। ये प्रोफेशनल्स एथलीट्स के साथ नहीं बल्कि उन स्पोर्ट्स कंपनियों के साथ काम करते हैं जिनके साथ टीम जुड़ी होती है। एक स्पोर्ट्स मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर आप 50,000 से 80,000 प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। 

- स्पोर्ट्स ईवेंट मैनेजर : इन्हें ऐसे आॅडियंस और ब्रांड्स की पहचान करनी होती है जिनके साथ जुड़ा जा सके। इसके अलावा ईवेंट का वेन्यू प्लान करने से लेकर उसकी मेन्टेनेंस, स्टाफ, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देना होता है। औसत आय 36,000 होती है जो अनुभव के साथ बढ़ती है। 

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