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प्राचार्यों-शिक्षकों का रिजल्ट लक्ष्य अधूरा तो रुकेंगी दो वेतनवृद्धि

प्राचार्यों और शिक्षकों को 30 सितंबर तक विभाग को अपना टारगेट बताना है।

एजुकेशन डेस्क। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी समेत अन्य कक्षाओं का परीक्षा परिणाम बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूल के प्राचार्यों-शिक्षकों की हर स्तर पर मॉनिटरिंग करेगा। शिक्षकों को खुद टारगेट तय करना पड़ेंगे कि वार्षिक परीक्षा में वे कितना परिणाम दे पाएंगे। अगर वे इसे पूरा नहीं कर पाएंगे तो उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने के साथ ही विभागीय जांच की जाएगी। प्राचार्यों और शिक्षकों को 30 सितंबर तक विभाग को अपना टारगेट बताना है।

विभाग ने विभिन्न स्तरों पर अपेक्षाकृत परीक्षा परिणाम नहीं आने पर फीडबैक लिया था। इसमें यह तथ्य सामने आया कि लक्ष्य निर्धारित न होने से शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम की प्राप्ति के लिए समुचित मॉनीटरिंग नहीं हो पाती। इसके मद्देनजर विभाग ने चालू शिक्षा सत्र से नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब विभाग की प्रत्येक इकाई की भूमिका और जिम्मेदारी निर्धारित कर मॉनीटरिंग की जाएगी। 

स्कूलों को दो श्रेणियों में बांटा 
- विभाग ने स्कूलों को दो श्रेणियों में बांटा है। प्रथम श्रेणी में एक्सीलेंस और मॉडल स्कूलों को रखा गया है जबकि दूसरी श्रेणी में अन्य स्कूलों को रखा गया है। इनमें से प्रत्येक श्रेणी के स्कूल में भी चार-चार श्रेणियां रखी गई हैं जो क्रमश: ए प्लस, ए, बी और सी है।
- इन स्कूलों में छात्रों की संख्या का आंकलन कर लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। 

ये होगा लक्ष्य 
एक्सीलेंस स्कूलों के लिए 

- श्रेणी 1 :ए प्लस - 90 फीसदी या उससे अधिक अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 2 : ए - 80 से 89 फीसदी अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 3 : बी - 70 से 79 अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 4 : सी - 60 से 69 अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
 
अन्य स्कूलों के लिए यह श्रेणी 
- श्रेणी 1 : ए प्लस - 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 2 : ए - 60 से 79 प्रतिशत तक का अंक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 3 : बी - 45 से 59 प्रतिशत तक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
- श्रेणी 4 : सी - 33 से 44 प्रतिशत तक का लक्ष्य निर्धारित करने वाले छात्रों की संख्या। 
 
यह करना होगा शिक्षकों को 
- विषय शिक्षक अपनी कक्षा में प्रवेशित छात्रों का पिछली परीक्षा और त्रैमासिक परीक्षा परिणाम में अपने विषय में प्राप्तांक के आधार पर छात्रों के वर्तमान स्तर का आंकलन करेंगे। इसके बाद वे विभिन्न स्थितियों को देखते हुए अपना लक्ष्य तय करेंगे। 
- इसी तरह प्राचार्य सभी कक्षाओं के विषय शिक्षकों और छात्रों द्वारा तय किए गए लक्ष्य के आधार पर स्कूल का कक्षावार औसत लक्ष्य निर्धारित करेंगे। खास बात यह है कि प्राचार्यों को लक्ष्य की एंट्री विभाग के पोर्टल पर करना होगी ताकि समय आने पर इसका आंकलन किया जा सके। - जिला शिक्षा अधिकारियों को भी अपना लक्ष्य तय करना होगा। 
 
ऐसी कार्रवाई होगी 
 - लक्ष्य में 10% कमी तो कोई कार्रवाई नहीं। 11 से 20% की कमी तो एक वेतनवृद्धि रुकेगी। 
 - 21 से 40% तक कमी पर दो वेतनवृद्धि रुकंेगी। 40% से अधिक कमी होने पर विभागीय जांच, कार्रवाई। 
 

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