लक्ष्य साफ हो तो कोई मुश्किल आड़े नहीं आती : ऋतु करीधल

रॉकेट वुमन ऋतु करीधल ने चन्द्रयान 2 की मिशन डायरेक्टर के तौर पर खास पहचान बनाई है

FirstPerson। मेरा जन्म लखनऊ में हुआ था। मेरे पिता डिफेंस सर्विसेस में कार्यरत थे। किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार की ही तरह हमारे घर में भी बच्चों की पढ़ाई पर काफी जोर दिया जाता था। हमारे माता-पिता हम चार भाई-बहनों की पढ़ाई के साथ ट्यूशन का खर्च उठा पाने में असमर्थ थे। हम चारों आपस में एक-दूसरे की मदद किया करते थे, साथ ही एक-दूसरे को आगे बढ़ने और अच्छा परफॉर्म करने के लिए मोटिवेट भी करते थे। पढ़ाई के अलावा मुझे अंतरिक्ष बहुत ही आकर्षित करता था।

मैं हमेशा सोचती थी कि चांद कैसे अपनी साइज और शेप बदल सकता है, अपनी जिज्ञासा के चलते मैं घंटों छत पर बैठकर सितारों को देखती रहती थी। वहां से ही मैंने यह तय कर लिया था कि मुझे स्पेस साइंस से जुड़े फील्ड में कॅरिअर बनाना है। जब मुझे पता चला कि इसके लिए मुझे इसरो जाना होगा, तो स्कूल के दिनों से मैं इसरो की एक्टिविटीज को फॉलो करने लगी। मैं अखबार में इसरो से संबंधित सभी न्यूज देखती और उनकी कटिंग्स को संभालकर रख लेती थी। कॉलेज की पढ़ाई के बाद मैंने गेट एक्जाम पास किया और आईआईएससी में एडमिशन लेकर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री हासिल की। इसके बाद मेरे लिए इसरो मात्र एक कदम की दूरी पर था।

दृढ़ता से जुटे रहकर यहां तक पहुंची हूं
मेरे लिए वह दिन बहुत खास था जब मुझे इसरो से कॉल आया था। यह 1997 की बात है। उस समय इसरो में ज्यादा औरतें काम नहीं करती थीं, लेकिन मैं इस बात से परेशान नहीं हुई और मैंने इसरो जॉइन करने का फैसला लिया। तब से इसी दृढ़ता के साथ मैं साइंटिस्ट के तौर पर काम करती रही और चन्द्रयान 2 के लिए मिशन डायरेक्टर के पद तक पहुंची।

जिम्मेदारी भरा काम पाकर उत्साहित हूं
यहां मुझे एक के बाद एक कई स्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिला। बहुत-से प्राेजेक्ट कर लेने के बाद मुझे मंगलयान प्रोजेक्ट मिला जो मेरे लिए अद्भुत अनुभव था। दस महीने में पूरे किए गए इस प्रोजेक्ट ने भारत को मार्स पर पहुंचने वाला चौथा देश बना दिया। इसको कॉन्सेप्च्युलाइज और एग्जीक्यूट करना एक चुनौती की तरह था। इसके बाद अब चन्द्रयान 2 की मिशन डायरेक्टर के तौर पर मैं बहुत ही उत्साहित हूं। हालांकि यहां तक का सफर मेरे लिए आसान नहीं रहा और मैं समझती हूं कि समस्याएं तो लगभग हर काम में आती हैं, लेकिन अगर आपके सामने लक्ष्य स्पष्ट हो, तो फिर आपको कोई और मुश्किल बड़ी नहीं लगती।

मजबूत होगा मन, तो जरूर जीतेंगे
अगर आपका मन मजबूत है, तो समस्याएं खुद दूर हो जाती हैं। उदाहरण के तौर पर प्रोजेक्ट्स के दौरान मैं कई-कई दिनों तक नींद पूरी किए बगैर काम करती रही। मैंने काम खत्म होने से पहले खुद को थकान महसूस होने ही नहीं दी। यह मन की शक्ति से ही संभव हो सका। मैं यह भी मानती हूं कि किसी भी व्यक्ति का अचीवमेंट उसके अकेले का नहीं होता। आप जीतते हैं, क्योंकि बहुत सारे लोग आपका सहयोग करते हैं।
 

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