काम से इतना प्यार करती हूं कि वह काम ही नहीं लगता : शैफाली शाह

फिल्म रंगीला से शुरुआत करने वाली यह अभिनेत्री नेटफ्लिक्स की मशहूर सीरीज में नजर आ रही है

FirstPerson। मेरा जन्म मुम्बई में हुआ और मैं सांता क्रूज में पली-बढ़ी। मेरे पिता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में काम करते थे और मां होम्योपैथी डॉक्टर थीं। जब मेरा कॉलेज जाना शुरु हुआ, तो नाटक और फिल्मों की तरफ मेरी रुचि पैदा हुई। बाद में मैंने एक्टिंग के क्षेत्र को अपने कॅरिअर के तौर पर चुना और टेलीविजन से शुरुआत की। फिल्मों में मेरी शुरुआत वर्ष 1995 में रिलीज हुई फिल्म रंगीला से हुई। आज इस क्षेत्र में मुझे 20 साल से ज्यादा हो चुके हैं। हाल ही नेटफ्लिक्स पर आई मेरी फिल्मों पर मुझे दर्शकों का बहुत अच्छा रेस्पाॅन्स मिल रहा है जिससे मुझे बेहद खुशी होती है। कॅरिअर के दौरान मैंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं, लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं समझती हूं कि सबसे ज्यादा जरूरी है कि लोग आपके काम को देखें और प्रतिक्रिया दें, मेरे लिए यही मायने रखता है।

मेरे काम ने ही दिलवाई है मुझे पहचान
- कॅरिअर की यात्रा से मैंने सीखा कि आप कौनसा रोल निभा रहे हैं, यह जरूरी नहीं है, बल्कि आप जो कुछ कर रहे हैं, वह किस तरह से कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है। मैं अपने काम से इतना प्यार करती हूं कि मुझे कभी महसूस ही नहीं होता कि वह काम है। दरअसल अपना क्राफ्ट दिखाने के लिए हर नए समय में आपके पास बहुत से माध्यम होंगे, जरूरी बस इतना है कि आप उन माध्यमों का उपयोग करने के लिए तैयार हों। मैं जो कुछ भी करती हूं, उससे संतुष्ट होना मेरे लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि संतुष्टि के बिना आप जो भी काम करते हैं, उससे न्याय नहीं कर पाते। आपका सलेक्शन ही आपकी आगे की यात्रा तय करता है।

निर्णय ऐसा हो कि पछताना न पड़ा
- मेरे अनुभव और अच्छे रोल्स करने की इच्छाएं मुझे अपने कम्फर्ट जोन से बाहर रहने में मदद करते हैं। वर्तमान समय एक्टर्स के लिए खासतौर पर अच्छा है, क्योंकि अब बहुत-से फ्रेमवर्क्स टूट रहे हैं और अलग तरह की स्क्रिप्ट्स लिखी जा रही हैं। ये स्किप्ट्स एक कलाकार के तौर पर आपको अपना क्राफ्ट दिखाने का मौका देती हैं। यहां आपके पास ज्यादा काम होना मायने नहीं रखता, बल्कि आपके पास अच्छा काम होना चाहिए। मुझे अपने हर काम पर बहुत गर्व है, क्योंकि मैं बहुत सोच समझकर निर्णय लेती हूं। इसीलिए मुझे कभी अपने किसी निर्णय पर पछताना नहीं पड़ता।

निर्णय बदलना मेरी आदत में नहीं है
- अगर मुझे पास्ट में जाने का मौका मिले, तो मैं एक बार फिर उन्हीं किरदारों का चयन करूंगी जो मैंने किए हैं। चाहे फिर वह नब्बे के दशक में इक्कीस साल की उम्र की मां का किरदार निभाना हो या कॅरिअर के बीच में ब्रेक लेकर मां बनना हो। एक बार निर्णय करने के बाद मैं उन्हें बदलती नहीं हूं। इसी वजह से मेरे पास फिल्मों की लम्बी लिस्ट नहीं है, लेकिन हां जो फिल्में मैंने की हैं, वे सभी बहुत खास हैं। रोल छोटा हो या बड़ा, मैं उसे पूरे समर्पण के साथ अपना काम करती हूं। मेरे ख्याल में यही वजह है कि मैं यहां तक पहुंच सकी हू

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