महान फुटबॉलर पेले से मेहनती और दृढ़ निश्चयी रहना सीखा है मैंने : रियान पराग

महज17 वर्ष की उम्र में आईपीएल खेलने वाला क्रिकेटर

FirstPerson। मैं आसाम का रहने वाला हूं। मेरी उम्र सत्रह साल और कुछ महीने है। मैंने गुवाहाटी की गलियों में क्रिकेट की प्रैक्टिस की। हाल ही मुझे आईपीएल में एंट्री मिली जिसमें मुझे राजस्थान रॉयल्स के लिए चुना गया है। गुवाहाटी की गलियों में खेलते हुए स्टेडियम में मेरे आइडल धोनी के सामने क्रिकेट खेलने तक का मेरा अनुभव काफी रोचक और चुनौतीभरा था क्योंकि मैं जिनका फैन हूं, उन्हीं के सामने खेलने का मौका मिला। महान फुटबॉलर पेले के अनुसार, सफलता अचानक नहीं मिलती, बल्कि वह अथक मेहनत, दृढ़ निश्चय, सीखने की लगन और जो कुछ आप कर रहे हैं, उसके प्रति प्यार उत्साह व विश्वास की वजह से मिलती है। मैं हमेशा इस बात का ख्याल रखता हूं।

पिता से मिला प्रोत्साहन बना सफलता का कारण
लोग अक्सर मुझसे मेरी सफलता के बारे में पूछते हैं कि यह मुझे इतनी कम उम्र में कैसे प्राप्त हुई। मैं बताना चाहता हूं कि दरअसल आज मैं जो कुछ भी हूं, वह अपने पिता की वजह से ही हूं। जब मैं पंद्रह साल का था, तो एक दिन मुझे फोन पर बताया गया कि मुझे स्टेट लेवल टी 20 क्रिकेट के लिए चुन लिया गया था। उस समय मेरे दसवीं के एग्जाम भी हाेने वाले थे। असमंजस की स्थिति में मैं अपने माता-पिता के पास गया, तो उस समय मेरे पिता ने मुझे दिल पर हाथ रखकर दो मिनट सोचने के लिए कहा कि मैं क्या करना चाहता हूं। इस तरह मेरे पिता मे मिले प्रोत्साहन के अनुसार, अपने दिल की बात सुनते हुए मैंने क्रिकेट को चुना।

चुनने की स्वतंत्रता से मिली सकारात्मक दिशा
पिता से मिली सीख से एक बात मेरे समझ आई कि सही निर्णय लेना पूरी तरह से हमारे बस में ही है। इसी के आधार पर एक बार जब मैंने क्लियर कर लिया कि मुझे अपना भविष्य क्रिकेट में ही बनाना है, तो मैं पढ़ाई में भी अच्छा परफॉर्म कर पाया। इसी का परिणाम रहा कि मुझे बोर्ड एग्जाम में डिस्टिंक्शन मार्क्स मिले। इसके साथ ही क्रिकेट में मुझे एक के बाद एक अवसर मिलते ही चले गए। फिर तो लंदन में टेस्ट क्रिकेट खेलने और 2017 में रणजी ट्रॉफी खेलने के बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत ही नहीं रही।

हुनर को बेहतर बनाने में लगाएं अपनी एनर्जी
मुझे लगता है कि मैं यह सब इतनी कम उम्र में इसलिए भी कर पाया कि मेरे और मेरे माता-पिता के बीच कॅरिअर के चुनाव को लेकर सामंजस्य था। अक्सर हम देखते हैं कि इस उम्र में युवाओं की बहुत-सी ऊर्जा तो माता-पिता को समझाने और खुद पर यकीन जुटाने में ही लग जाती है। जबकि अगर कॅरिअर चुनना आसान हो, तो आप अपनी सारी एनर्जी अपने हुनर को बेहतर बनाने में लगा सकते हैं।

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