टॉपर कैसे होते हैं / पहली बार सीबीएसई के10 वीं और 12वीं के 31 टॉपर्स से एक साथ बातचीत

ऐसे होते हैं टॉपर्स: 68% कोचिंग नहीं गए, छुट्टियों में भी औसतन 9 घंटे पढ़ाई की, 80% ने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी

क्यों किया / टॉपर बिरले ही होते हैं। उनकी आदतें और पढ़ने का तरीका सभी लोगों को पता चले इसलिए आज की इस स्टोरी में पढ़िए, आखिर कैसे कोई छात्र टॉपर बनता है।

कैसे किया / टॉपर के इंटरव्यू अलग-अलग छपते रहते हैं, लेकिन पहली बार किसी भी मीडिया ने 31 टॉपर्स से एक साथ बात की। इसका निचोड़ निकाल सफलता का मंत्र बताया।

एजुकेशन डेस्क। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में 99.8% तक अंक लाने वाले देशभर के छात्रों ने परीक्षाओं के दिनों में रोजाना औसतन 9 घंटे तक पढ़ाई कर यह सफलता पाई है। टॉपर्स में से केवल 32 फीसदी छात्र ही कोचिंग गए। देशभर के 21 शहरों के दसवीं और बारहवीं के सीबीएसई के 31 टॉपर्स से भास्कर ने बात की। उनसे बातचीत में ये आंकड़े सामने आए हैं। सीबीएसई ने 2 मई को बारहवीं और 6 मई को दसवीं के नतीजों की घोषणा की थी। इन परीक्षाओं में इस साल 29.7 लाख छात्र शामिल हुए। इनमें से सिर्फ 0.004% छात्रों ने टॉप किया। यानी जिन्हें 500 में से 499, 498 या 497 अंक मिले। दसवीं में जहां 97 छात्र टॉप 3 में थे, वहीं बारहवीं में 23 छात्रों ने देश में पहली, दूसरी और तीसरी रैंक पाईं। भास्कर ने कुल 120 टॉपर्स में से 31 छात्रों से बात की। इनमें से दसवीं के 17 और बारहवीं के 14 छात्र-छात्राओं से सवाल किए गए।

साक्षात्कार का उद्देश्य यह जानना था कि टॉपर्स आखिर होते कैसे हैं? वे बाकि छात्रों से अलग, ऐसा क्या करते हैं जिससे उन्हें यह सफलता मिली है। टॉपर्स ने पढ़ाई के तरीके और माहौल के बारे में बताया। बातचीत में पढ़ाई को लेकर चली आ रही कुछ धारणाएं भी टूटीं। जैसे अक्सर सुबह के समय पढ़ाई करने को बेहतर बताया जाता है, लेकिन बातचीत में ज्यादातर टॉपर्स ने कहा कि वे रात में पढ़ाई को प्राथमिकता देते हैं। कोचिंग की बजाय सेल्फ स्टडी को ज्यादा पसंद करते हैं। पढ़ाई से जुड़े सभी के अपने-अपने तरीके थे, लेकिन कुछ चीजें सभी में समान थीं। जैसे सभी ने एनसीईआरटी की किताबों को फॉलो जरूर किया। नोट्स बनाए। सभी ने कम से कम 10 साल के सैंपल पेपर्स सॉल्व करने की बात भी कही। ज्यादातर ने सोशल मीडिया को पढ़ाई से भटकाने वाला माना। हालांकि कई छात्रों का कहना था कि खुद पर नियंत्रण हो तो सोशल मीडिया के सीमित उपयोग से फायदा भी हो सकता है। पढ़ाई में पेरेंट्स के सहयोग से जुड़ी बातें भी टॉपर्स ने बताईं। पढ़िए बातचीत से निकले नतीजे।

ब्रेक में नेटफ्लिक्स- यूट्यूब से रिलेक्स
- अब बोर्ड एग्जाम का मतलब केवल पढ़ाई में डूबे रहना नहीं है। टॉपर्स ने बताया कि वे समय-समय पर पढ़ाई से ब्रेक लेते हैं और नेटफ्लिक्स पर सीरीज देखना, यूट्यूब पर वीडियोज देखना पसंद करते हैं। परिवार के साथ समय बिताना और दोस्तों से बातें करना भी पसंद करते हैं। पढ़ाई के चक्कर में शौक भी पीछे नहीं छूट रहे हैं। टॉपर्स ने बागवानी, पेंटिंग, डांस और कविता- कहानी लिखने जैसे शौक भी पूरे किए।

वॉट्सएप-इंटरनेट से मदद मिली
- टॉपर्स ने बताया कि अच्छे नंबर लाने के लिए मोबाइल से दूरी बनाना भी जरूरी नहीं है, बशर्ते इसका सही उपयोग किया जाए। दसवीं के टॉपर्स में से ज्यादातर के पास मोबाइल नहीं था, लेकिन वे अपने मम्मी-पापा के मोबाइल से अपने दोस्तों से जुड़े रहे। बारहवीं के टॉपर्स ने वॉट्सएप का उपयोग नोट्स शेयर करने और डिस्कशन के लिए किया। कुछ टॉपर्स ने नोट्स बनाने के लिए भी इंटरनेट का सहारा लिया।

योग और ध्यान ने किया तनावमुक्त
- पढ़ाई के दबाव का तनाव न हो और वे अपने विशेष साल में स्वस्थ रहें, इसके लिए टॉपर्स ने योग और एक्सरसाइज जैसे तरीके अपनाए। बेडमिंटन, क्रिकेट जैसे आउटडोर गेम्स खेलना भी कई टॉपर्स को पसंद है। कुछ टॉपर्स ने जिम भी जॉइन किया। तनावमुक्त रहने के लिए कई टॉपर्स ध्यान करते थे। वहीं ज्यादातर के लिए संगीत सुनना और लंबी वॉक स्ट्रैस से बचने का तरीका बना। खानपान का भी विशेष ध्यान रखा।

दसवीं के छात्रों के टिप्स : पेंटिंग करिए, आत्मकथाएं पढ़िए

छात्र

रैंक

टॉपर ने बताया

योगेश कुमार गुप्ता, जौनपुर, उप्र

1

तनाव से बचने के लिए पेंटिंग करता था। इंटरनेट पर रोचक चीजें पढ़ता था।

अंकुर मिश्रा, गाजियाबाद, यूपी

1

बोर्ड एग्जाम के साथ-साथ आईआईटी की तैयारी भी कर रहा था।

मान्या, भटिंडा, पंजाब

1

बोर्ड के साथ मेडिकल की तैयारी कर रही थी। ज्यादा नंबर लाने का प्रेशर नहीं था।

आर्यन झा, जामगनर, गुजरात

1

मेडिटेशन करता हूं। पढ़ाई से ब्रेक में नेटफ्लिक्स और क्रिकेट देखना पसंद था।

तरू जैन, जयपुर, राजस्थान

1

फिट रहने के लिए साइकिलिंग की। परिवार से बात करते रहने से तनाव नहीं होता।

अपूर्वा जैन, गाजियाबाद, यूपी

1

इंटरनेट से मदद मिलती थी लेकिन सोशल मीडिया कभी इस्तेमाल नहीं किया।

आयुषी पुष्कर, लखनऊ, यूपी

2

अगर स्कूल में ध्यान दें तो घर पर पढ़ाई के लिए ज्यादा समय नहीं देना पड़ता।

शिविका डुडानी, नई दिल्ली

2

संगीत तनाव से बचाता है। सोशल मीडिया ध्यान भटका सकता है।

प्रियंका वालिया, अंबाला, हरियाणा

2

कुछ देर आंखें बंदकर बैठने से तनाव कम होता है। वीकेंड पर ज्यादा पढ़ाई की।

अर्जित श्रीवास्तव, बरेली, यूपी

3

मम्मी-पापा नोट्स बनाने में मदद करते थे। 

नेहा जैन, नई दिल्ली

3

खेल-कूद तनाव से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। फिल्में भी देखती थी।

पूर्ति श्रीवास्तव, लखनऊ, यूपी

3

सोशल मीडिया में रुचि नहीं है। फिट रहने के लिए हल्का खाना खाती थी।

आयुषी शाह, जामनगर, गुजरात

3

दसवीं के साथ साइंस ओलिंपियाड जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही।

दिशा मल्होत्रा, भिवानी, हरियाणा

3

योग करने से बहुत मदद मिली। वीकेंड्स पर ज्यादा पढ़ाई करती थी।

कौशल सिंह, मथुरा, यूपी

3

मम्मी-पापा घर के काम नहीं करवाते थे, ताकि पढ़ाई को पूरा समय मिलता रहे।

अपूर्वा गुलाटी, सोनपत, हरियाणा 

3

अगर पढ़ाई पर फोकस हो तो सोशल मीडिया से फर्क नहीं पड़ता है।

श्रीधर वशिष्ट, चंडीगढ़

3

महान लोगों की आत्मकथाएं पढ़ता था। आउटडोर गेम्स खेलता था।

 

बारहवीं के छात्रों के टिप्स: सैंपल पेपर सॉल्व कीजिए

छात्र रैंक टॉपर ने बताया

करिश्मा अरोड़ा, मुजफ्फरनगर, यूपी

1

पढ़ाई के साथ-साथ शौक भी पूरा किया। क्लासिकल डांस भी सीखती थी।

ऐश्वर्यासिन्हा, रायबरेली, यूपी

2

मेडिटेशन करने और परिवार के साथ समय बिताने से तनाव से बच सकते हैं।

भव्या, सफीदों, जींद, हरियाणा

2

सोशल मीडिया अकाउंट बंद नहीं किए, लेकिन सीमित इस्तेमाल करती थी।

आयुषी उपाध्याय, लखनऊ, यूपी

3

बोर्ड के साथ क्लैट की तैयारी भी कर रही थी। बैडमिंटन खेलकर फिट रही।

महक तलवार, नई दिल्ली

3

तनाव होने पर लंबी वॉक पर निकल जाती थी। सुबह पढ़ना ज्यादा पसंद।

पार्थसैनी, सोलन, हिमाचल

3

गेम्स खेलकर तनाव दूर करता था। रोजाना एक्सरसाइज जरूर करता था।

अनन्या गोयल, मेरठ, यूपी

3

पढ़ाई से ध्यान न भटके इसलिए मम्मी-पापा सालभर कहीं घूमने नहीं गए।

रूबानी चीमा, हिसार, हरियाणा

3

बोर्डिंग में रहती थी। वहां के प्रतिस्पर्धी माहौल से पढ़ने की प्रेरणा मिलती थी।

एशना जैन, गाजियाबाद, यूपी

3

इंटरनेट काफी सर्फ करती थी। मम्मी-पापा ने ज्यादा पढ़ने का दबाव नहीं बनाया।

अर्पित माहेश्वरी, गाजियाबाद, यूपी 

3

बागवानी का शौक है। बोर्ड के साथ आईआईटी की भी तैयारी कर रहा था।

टिशा गुप्ता, अलवर, राजस्थान

3

पापा पढ़ाई में मदद करते थे। सैंपल पेपर्स और कोचिंग से भी मदद मिली।

गरिमा शर्मा, नोएडा, यूपी

3

सोशल मीडिया का नियंत्रित इस्तेमाल किया जाए तो फायदा हो सकता है।

इबादत सिंह बख्शी, जीबी नगर

3

मम्मी-पापा नोट्स बनाने में मदद करते थे। ब्रेक में नेटफ्लिक्स पर सीरीज देखीं।

प्रज्ञा खड़कवाल, गाजियाबाद, यूपी

3

सैंपल पेपर्स से बहुत मदद मिली। एनसीईआरटी की किताबें ही फॉलो कीं।

 

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