किताबों से ज्यादा फेलियर्स से सीखा है : सुमित व्यास

एक्टर के तौर पर फिल्मों, टीवी शो और वेब सीरीज में खास पहचान बना चुके है

First Person। मैं राजस्थान के जोधपुर में पला और बड़ा हुआ। पढ़ाई में शुरू से ही कमजोर था और इसी वजह से मुझे घरवालों से बहुत डांट और मार भी पड़ती थी। कई बार लगातार फेल भी हुआ और इसके लिए सजा भी मिली। इस सजा ने मुझे अंदर ही अंदर गुस्से से भर दिया। कुछ सालों बाद जब समझदार हुआ, तो सोचा कि मेरे अंदर जो गुस्सा है क्यों न उसे प्रॉडक्टिव एनर्जी का रूप दिया जाए और कोई ऐसा क्षेत्र चुना जाए जिसमें इसका उपयोग में खुद को साबित करने के लिए कर सकूं। इसी बीच एक परिचित से मुझे अपनी इस एनर्जी को थिएटर के जरिए बाहर निकालने का सुझाव मिला तो मैंने थिएटर जॉइन कर लिया। हालांकि इससे पहले मुझे एक्टिंग का कोई अनुभव नहीं था। 

रिजेक्शन मिला, लेकिन हार नहीं मानी 
आज मुझे एक्टिंग के फील्ड में काम करते हुए 14 साल हो चुके हैं। कह सकते हैं कि 14 साल से जो लगातार मेहनत कर रहा हूं, उसका फल अब दिख रहा है। अपने लाइफ एक्सपीरिएंसेज से मैं यह कह सकता हूं कि जीवन में मैंने जो भी सीखा, वह किताबों को पढ़कर नहीं, बल्कि फेलियर्स को अनुभव करके सीखा। मुझे लगता है कि हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है, जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और फिर फॉलो करने की है। आप जो कुछ भी चुनें, उसे शिद्दत से करते जाएं, तो एक निश्चित समय पर सफलता जरूर मिलती है। शुरुआत के दौर की बात करें, तो कुछ सालों तक थिएटर करने के बाद ही मैंने टीवी और फिल्मों की तरफ रुख किया।

हुनर तराशने में लगाएं अपनी एनर्जी
उस दौर में मैं एक दिन में लगभग दस ऑडिशन्स में रिजेक्ट होता था। इसका मतलब है महीने में लगभग तीन सौ बार। फिर एक दिन मुझे अहसास हुआ कि मैं अपने काम की वजह से जाना जाऊं। ऐसा कई बार होता है जब हमारा फोकस हट जाता है, लेकिन जरूरी यह है हम फिर से खुद को याद दिलाएं कि हमारा उद्देश्य क्या है। मैंने बहुत गहराई से जाना कि हमारे साथ रोज होने वाली घटनाएं बहुत-से इमोशंस जगाती हैं। उन इमोशन्स में बहुत एनर्जी होती है और उस एनर्जी को आप अपने काम और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। एक बार आप इसका इस्तेमाल करना सीख जाएंगे, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

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