आत्मविश्वास से भर देता है अभ्यास - हरमनप्रीत कौर

फिटरहने से अच्छी होती है परफॉर्मेंस

FirstPerson। मेरी क्रिकेटर बनने की इच्छा हमेशा से ही रही। बहुत कम उम्र से ही मैं देश के लिए खेलने और अच्छा प्रदर्शन करने के बारे में सोचने लगी थी। मध्यम -वर्गीय परिवार से होने की वजह से खेल में कॅरिअर बनाने की मेरी यात्रा थोड़ी मुश्किल रही, लेकिन उन प्रॉब्लम्स ने चैम्पियन बनने की मेरी जिद को मजबूत ही किया। 2005 में जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला वर्ल्ड कप फाइनल खेला था तब मेरा क्रिकेट के साथ रिश्ता शुरू ही हुआ था। मेरे पिता के एक मित्र ने मुझे दसवीं क्लास में दाखिला दिलवाया और मेरी फीस भी माफ करवा दी। मुझे स्कूल से ही बैट्स, शूज और क्रिकेट किट भी मिल गया था। यह सब क्रिकेट में मेरी रुचि और पैशन को देखते हुए किया गया था। अगले चार साल मैंने जोरदार मेहनत की और उसका नतीजा यह हुआ कि मैं 2009 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला गेम खेल पाई। मेरे परिवार के
लिए एक लड़की का क्रिकेट खेलना कोई सहज बात नहीं थी। लेकिन मेरी मेहनत और लगन देखकर मेरे मैं समझती हूं कि सफलता संयुक्त प्रयासों से ही संभव हो पाती है। 

फिटरहने से अच्छी होती है परफॉर्मेंस
- मेरे माता पिता के अलावा मेरे कोच ने भी मेरे साथ बहुत मेहनत की। स्कूल में मुझे ट्रेनिंग देने वाले कोच तब तक मुझे छुट्टी नहीं देते थे जब तक मैं सौ दो सौ छक्के नहीं मार लेती थी। तो इस तरह मेरी प्रैक्टिस इतनी अच्छी हुई कि मुझे अपने गेम में बहुत आत्मविश्वास आ गया। इसके लिए मैं उनकी बहुत ही आभारी रहूंगी। प्रैक्टिस ही है जो मैदान में आपको कॉन्फिडेंट बनाती है। साथ ही आपकी सेहत भी आपके खेल पर बहुत असर डालती है। खेल का मैदान हो या जीवन का, किसी और काम से पहले खुद को फिट रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप फिट होंगे तो आपकी परफॉर्मेंस खुद-ब-खुद अच्छी हो जाएगी। इस तरह अपनी सफलता से मैंने यही सीखा कि अगर आप एक ही चीज के बारे में लगातार सोचते हैं और मेहनत करते जाते हैं तो सफलता जरूर मिलती है।

लीडरशिप सिखाती है फोकस करना
- खेल से मैंने यह भी सीखा की मौके कभी भी मिल सकते हैं जरूरत है कि हम उनके लिए तैयार रहें। जैसे कई मैच खेल लेने के बाद जब मुझे अचानक टीम को लीड करने का मौका मिला तो थोड़ी घबराहट ताे हुई, लेकिन साथ ही यह विश्वास भी था कि मैं लीड कर सकती हूं। इसके लिए मैंने जो भी सीनियर्स से सीखा, उन सब बातों का ध्यान रखा और अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की। दरअसल खेल आपको इस तरह तैयार कर देता है कि आप किसी भी चुनौती से घबराते नहीं हैं। इसी तरह लीडरशिप भी कोई घबराने की बात नहीं है बल्कि मैंने सीखा कि लीडरशिप में जो जिम्मेदारियां आपको निभानी होती हैं उनकी वजह से आप न सिर्फ अपने खेल के प्रति बल्कि पूरी टीम के प्रति बहुत सजग और सचेत रहते हैं। साथ ही आप खेल को जीतने के हिसाब से कई तरह की प्लानिंग्स और स्ट्रैटजीज बनाना सीख जाते हैं। लीडरशिप आपको फोकस्ड रहना सिखा देती है। 

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