सफलता को सेलिब्रेट करने के लिए प्रैक्टिस करती हूं : मनु भाकर

महज 16 साल की मनु यूथ ओलिंपिक्स में गोल्ड जीतने और रिकॉर्ड बनाने वाली पहली भारतीय शूटर हैं

FirstPerson। मैं हरियाणा की रहने वाली हूं। शुरू से ही मेरी रुचि खेलों में रही है। शूटिंग के अलावा कराटे, स्केटिंग, स्विमिंग और टेनिस आदि से भी मेरा जुड़ाव है, साथ ही मैं बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट्स भी करती हूं। शुरू से खेलों में रुचि होने के कारण मुझे हमेशा से मेहनत व लगन से सीखने और अभ्यास करने में मजा आता है। आज अपने गेम में मैंने जो भी सफलता हासिल की हैं, उसका सबसे बड़ा कारण मैं इस बात को मानती हूं कि मैंने कभी भी अपने लक्ष्य तय नहीं किए। बस अपनी तकनीक पर भरोसा करते हुए अपने खेल को मजबूत बनाया। मेरा मानना भी यही है कि आप अपने दिमाग से बेकार की बातें बाहर निकाल दें और अपने गोल पर पूरा फोकस करें।

दबाव मुक्त होकर खेलें अपना खेल
आपके ऊपर प्रशंसकों की उम्मीदों का जो दबाव होता है, उससे खुद को फ्री रखें। इसी सोच के साथ मैं सोलह साल की उम्र में शूटिंग में गोल्ड हासिल कर सकी। कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड प्राइज जीतने का भी यही कारण है। मैंने सिर्फ अपनी तकनीक पर ध्यान दिया और बाकी सब अपने आप होता चला गया। शूटिंग वैसे भी मेरे ख्याल में काफी सीधा और सरल गेम है। इसमें आपको निशाना साधना है और शूट करना है। दरअसल यही हमारे जीवन में भी होना चाहिए।

सफलता का जश्न मनाने का नहीं होता समय
अगर आप ज्यादा सोचेंगे, तो परेशानी होगी। स्पॉटलाइट में खेलने काप्रेशर तो होता है, लेकिन मैं खुद पर कोई दबाव आने नहीं देती। मैं अपना प्रदर्शन सबसे अच्छा करने पर ध्यान देती हूं और बाकी सबके बारे में नहीं सेाचती। मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि मैं अपनी सफलता को कैसे सेलिब्रेट करती हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मेरे पास सेलिब्रेट करने का समय ही नहीं है और यही सबसे अच्छी बात है। अभ्यास अपने आप में सेलिब्रेशन की तरह है। मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं, लेकिन मैं फोकस्ड रहना चाहती हूं।

हर मौके को दें सम्मान
किसी भी काम के लिए समर्पण की आवश्यकता होती है। खेल में बहुत बार आपको कई-कई दिनों तक पूरी तरह आराम नहीं मिलता। ट्रैवलिंग की थकान रहती है और अलग-अलग देशों के समय से सामंजस्य बिठाना पड़ता है, लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन बातों की शिकायत करते हैं या अच्छी बातों को एंजॉय करते हैं। इसे ध्यान में रखकर कुछ समय पहले मैं इस बात से बहुत खुश थी कि मैं ओलम्पिक खेलने के योग्य हुई और इसी का परिणाम है कि आज मैं कॉमनवेल्थ खेल चुकी हूं। मेरे लिए सभी गेम्स स्पेशल हैं और इसी कारण से मुझे सफलता भी मिल सकी। जीवन में हर मौके को बराबर सम्मान दें और उसका फायदा उठाएं,क्योंकि हर अवसर आपको सफलता के थोड़ा और नजदीक ले जाता है।
 

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